तारीख़े इस्लाम भाग 1

तारीख़े इस्लाम  भाग 10%

तारीख़े इस्लाम  भाग 1 लेखक:
कैटिगिरी: इतिहासिक कथाऐ

तारीख़े इस्लाम  भाग 1

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

लेखक: जनाब फरोग़ काज़मी साहब
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तारीख़े इस्लाम  भाग 1

तारीख़े इस्लाम भाग 1

लेखक:
हिंदी

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

तारीख़े इस्लाम

भाग 1

नबीयों के हालात

लेखकः अल्लामा फ़रोग़ काज़मी

नोटः ये किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क के ज़रीऐ अपने पाठको के लिऐ टाइप कराई गई है और इस किताब मे टाइप वग़ैरा की ग़लतीयो को सही किया गया है।

Alhassanain.org/hindi

अर्ज़े नाशिर

हिन्दुस्तानी मुस्लिम ब्रादरी और ख़ुसूसी तौर पर शिया मुस्लिम समाज में तारीख़े इस्लाम पर मबनी कोई ऐसी जामेय और मुफ़स्सिल किताब मेरी नज़रों से नहीं गुज़री थी कि जिसकी सिर्फ़ एक ही जिल्द में किसी मुसन्निफ़ या मोअल्लिफ़ ने इब्तेदाये आफरीनिश से खि़लख़ते आदम (अ.स.) तक और खि़लख़त हज़रत आदम (अ.स.) से ख़ातेमुल अम्बिया तक तमाम अम्बिया व मुरसलीन (अ.स.) नीज़ हज़रत अली (अ.स.) इब्ने अबु तालिब (अ.स.) से इमामुल अस्र वल ज़मां अजल्लाह फ़रजह तक तमाम आइम्मा ए मासूमीन (अ.स.) के तारीख़ी व तफ़सीली और मुस्तनद व मोतबर हालात मुजतमा किये हों। लेहाज़ा मेरी दिली ख़्वाहिश व कोशिश यह थी कि उर्दू ज़बान में कोई ऐसी किताब मंज़रे आम पर लायी जाये जिसकी एक ही जिल्द मौजूदा इस्लामी तक़ाज़ों और वक़्त की इस अहम ज़रूरत को पूरा कर सके।

ख़ुदा का शुक्र है कि मोहक़िक़ बसीर जनबा फ़रोग़ काज़मी ने मेरे इस कर्ब को महसूस किया और इन्तेहाई मेहनत , लगन , तहक़ीक़ व जुस्तजू के बाद तफ़सीरे इस्लाम के उनवान से यह किताब मुकम्मल कर के मेरे ख़्वाब को ताबीर से हमकिनार कर दिया।

तक़रीबन नौ सौ सफ़हात पर मुश्तमिल यह ज़ख़ीम किताब यक़ीनन जनाब फ़रोग़ काज़मी का इन्फ़ेरादी कारनामा है जिसके दामन में इस्लामी तारीख़ से मुतअल्लिक़ सब कुछ है।

मुझे मसर्रत है कि मैं इस गिरां क़द्र किताब की अशाअत का शरफ़ हासिल कर रहा हूं और इसके साथ ही दुआगो हूं कि परवरदिगारे आलम इसकी मक़बूलियत व कामयाबी को दोश बदोश मोहतरम फ़रोग़ काज़मी की तौफ़िक़ात में भी इज़ाफ़ा फ़रमाये।

वाज़ेह हो कि हमने हिन्दीदां तबक़े के लिये इसको तीन भागों में विभाजित कर दिया है। पहला भाग नबियों के हालात पर आधारित है , दूसरे भाग में हज़रते मोहम्मदे मुस्तफ़ा (स.अ.व.व.) के हालात और तीसरे भाग में खि़लाफ़त और इमामत की तफ़सीलात और ज़हूरे इमाम तक की तफ़सीलात हैं। हमें उम्मीद है कि हिन्दीदां हज़रात हमारी कोशिश को सराहेंगे।

वस्सलाम

सै 0 अली अब्बास तबातबाई