तारीख़े इस्लाम भाग 1

तारीख़े इस्लाम  भाग 10%

तारीख़े इस्लाम  भाग 1 लेखक:
कैटिगिरी: इतिहासिक कथाऐ

तारीख़े इस्लाम  भाग 1

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

लेखक: जनाब फरोग़ काज़मी साहब
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तारीख़े इस्लाम भाग 1
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तारीख़े इस्लाम  भाग 1

तारीख़े इस्लाम भाग 1

लेखक:
हिंदी

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

हज़रते अय्यूब अ 0

खुदा के मखसूस बन्दो की हालत भी अजीबो ग़रीब होती है। कभी इनका इम्तेहान राहत व खुशहाली और ऐश व आराम में मुब्तेला करके इनकी आज़माइश की जाती है। हज़रते अय्यूब बिन मूस बिन ऐस बिन इस्हाक बिन इब्राहीम अ 0 का शूमार भी उन खास बन्दो में होता है। जिन्हें खुदा ने इम्तेहान की खातिर ऐशओं आराम के बाद मसाएब व अलाम की सखतियों से हम किनार किया।

आप की वालिदा हज़रते लूत की साहबज़ादी थी जिनके साये शफक़्क़त से आप बचपन में ही महरुम हो गये थे। आप की ज़ौजा का नाम रहीमा था। जो जुलैखा के बदन से हज़रते यूसुफ़ की बेटी थी। बाज़ मोअर्रेखीन ने आप की ज़ौजा का नाम ज़ेबा बिन्ते याकूब तहरीर किया है। और बाज़ में रहीमा को इब्राहीम बिन यूसुफ़ को दुख़तर क़रार दिया है। जो मेरे नज़दीक ग़लत है।

हज़रते अय्यूब ऐसे शुक्र गुज़ार बन्दे थे कि ख़ल्लाके आलम में इनके दामाने तशक्कुर को मुख़तलिफ़ क़िस्मों की नेअमतों मालो मता और दौलत सरवत नीज़ कसरते औलाद से भर दिया था। चुनान्चे मोअर्रख़ीन ने आप के बेटों की तादाद 25 बतायी है। मेहमान नवाज़ी तुर्रेइम्तियाज़ और इबादत और इताअत आपका शेआर थी। नीज़ इबादत और रियाज़त के लिए आप हमेशां ऐसा रास्ता इख़तेयार करते थे जिसमें मेहनत और मशक़्क़त ज्यादा हो। आप के 80 बरस इन्तेहायी कुनून और इतमिनान और असूदा हाली में गुज़रे इसके बादज जो इन्तेहान का सिलसिला शुरू हुआ तो , तमाम औलादें मर गयीं , दोलत तबाह हो गयी , जानवर हलाक हो गये , खेतियां बरबाद हो गयी , फाक़ों पर फाक़े होने लगे और ख़ुद तरंह – 2 की बीमारियों के शिकार हो गये। फिर वह मंज़िल भी आयी कि तमाम लोगों ने हज़रते अय्यूब को उनकी बीमारी की बिना पर छोड़ दिया। कोई न था जो उनका साथ देता उन मुसीबतों आलाम यास और नामुरादजी के आलम में ख़ुदा की ज़ात के अलावा बस एक ज़ात आप की बीबी रहीमा की थी जो शबो रोज़ आप की देखभाल और आपकी तीमारदारी के फराएज़ अन्जाम देही में हमानत मसरूफ़ रहती थीं।

वह आप की ख़िदमत भी करती थीं और मज़दूरी करके हज़रते अय्यूब के खाने पीने का समान भी फराहम करती थीं। जब सात साल यूं ही गुज़र गये तो एक दिन शैतान ने रहीमा से कहा कि तुम एक आला ख़ानदान की औरत होकर इतनी मेहनत और मशक़्क़त करती हो। आख़िरकार इसका सिला क्या है जबकि अय्यूब खुद सख़्त तरीन बलाओं और शदीद तरीन मूज़ी मर्ज का शिकार हैं। आप ने जवाब दिया कि यह सब कुछ अल्लाह की तरफ़ से हैं।

उसी ने हमें नेअमतें अता की इज़्ज़त बख़्शी माल व मता और कसरते औलाद से सरफराज़ किया और अब वही हमारा इम्तेहान ले रहा है। और हम बहर हाल उसका शुक्र करते हैं। शैतान ने कहा यह तुम्हारी ग़लत फहमी है। इसकी कोई वजह और भी हो सकती है। यह कह कर शैतान ने ज़ौजए अय्यूब के दिल में एक वस्वसा पैदा कर दिया। और शक़ूक व शुबाहात के दरवाज़ों को खोल दिया। रहीमा जब अपने शौहर के पास आयीं तो सारा वाक़ेया बयान किया। हज़रते अय्यूब ने फरमाया कि वह शैतान है जो तुम्हें खुदा की राह से बरगशता करना चाहता है। और हमें इम्तेहान में नाकाम करने की कोशिश कर रहा है। आश़िरकार तुमने उसकी बातों पर तवज्जों ही क्यों की। याद रखो कि अगर मैं ठीक हो गया तो इस जुर्म की पादाश में तुम्हें सौ क़मजियां मारूंगा कि तुमने ऐसे मलउन शख़्स से मेरे इस इम्तेहान के बारे में गुफतुगू क्यों की जो खुदा की तरफ से हमें बरगशता करना चाहता हैं।

आख़िर कार शैतान के वरग़लाने और बहकाने से जब लोगों ने जनाबे अय्यूब को ताना देना शुरू किया और यह कहने लगे कि तुमने कोई पोशीदा गुनाह ज़रूर किया है। जिसकी सज़ा ख़ुदा तुम्हें दे रहा है। और शैतान ने कहा कि तुम्हारा मर्ज़ इतना तुलानी हो गया है। मगर तुम्हारा ख़ुदा तुम पर कोई रहम नहीं करता। तो आप का पैमानए सब्र छलक उठा। जब़्तो तहम्मुल की ताब न रही चुनान्चे आपने बारगाहे इलाही में दुआ की और फरमाया पालने वाले तू देख रहा कि मेरे उम्मती मुझे ताने दे रहे हैं और मुझ पर गुनाहों की तोहमत आयद कर रहे हैं। इसके अलावा शैतान भी तरह तरह की अज़ीयते पहुंचा रहा है। तू बड़ा रहीम और करीम है। अब मुझे मसायबो आलाम से निजात दे।

चुनान्चे हुकम हुआ कि ऐ अय्यूब ज़मीन पर एक ठोकर मारो। ग़र्ज़ ठोकर का मारना था कि ज़मीन का सीना शक़ हुआ और उससे आबे शीरीं व सर्द का एक चश्मा बरामद हुआ। जिससे आपने गुस्ल किया और पानी को पिया जिससे आप की तमाम तकलीफे दूर हो गयीं और परवरदिगार की रहमत ने आपको एक सेहतमंद इन्सान बना दिया। और इसके बाद ख़ुदा ने पहले आपको जितनी नेअमत , दौलत और औलादें अता की थीं उससे ज़्यादा दोबारा अता कर दीं। फिर खुदा ने बीबी रहीमा के मामले में अय्यूब को अपनी क़सम पूरी करने का तरीक़ा यह बताया कि इन्हें सौ क़चियां मारने के बजाये सौ क़मचियों का एक मुट्ठा बनाकर सिर्फ एक बार मार दो। मोअर्रेख़ीन ने हज़रते अय्यूब के वाक़ेयात में इनके जिस्म में कीड़ों का पड़ना भी तहरीर किया है। जिसे मेरा ज़हन कुबूल नही करता। क्योंकि पैग़म्बरों में ऐसी कोई बीमारी नहीं होती जो लोगों के लिए सबबे कराहत बने।

मोअर्रेख़ीन ने हज़रते अय्यूब की उम्र 63 साल की बतायी है। इन्तेक़ाल से क़ब्ल 62 साल में आप ने अपने वसी व जानशीन मोहल को मुकर्रर फरमाया।

हज़रते जुलकफल अ 0

आप हज़रते अय्यूब के साहब ज़ादे थे आपका नाम बशर और लक़ब जुलकफ़ल था। आप अपने वालिद अय्यूब के बाद मन्सबे पैग़म्बरी पर फायज हुए बहैसियते नबी लोगों को दीने हक़ और तौहीद का दर्स देते रहें आप चूंकि अज़इब्तेदा ता इन्तेहा शाम में ही सुकूनत पज़ीर रहे। इसलिए 75 साल की उम्र में वही आप का इन्तेक़ाल भी हुआ। आपने अपना वसी अपेन फरज़ंद अब्दान को बनाया था।

हज़रते शुऐब अ 0

आप हज़रते इब्राहीम के फरज़ंद मदीन के बेटे मिनकाएल के साहबज़ादे थे। इस तरंह हज़रते इब्राहीम आपके पर दादा हुए। लेकिन बाज़ मोअर्रेख़ीन का ख़याल है कि आप हज़रते इब्राहीम की औलाद में नहीं थे। बल्कि उन लोगों में से किसी शख्स की औलाद में से थे कि जो आप पर ईमान लाने के बाद उनके साथ हिजरत करके आए थे शाम में सुकूनित पज़ीर हो गए थे।

मदीना एक बस्ती का नाम भी था जो परज़न्दे इब्राहीम (मदीना) के नाम से मौसूफ थी। इस बस्ती मैं 40 घर थे। इन लोगों की हिदायत भी आप ही से मुताल्लिक़ थी। मदीन के लोगों में मिनजुम्ला और बुरी आदतों के दो तीन बातें बहुत ही ख़राब थी। जिनमें हर शख़्स मुब्तेला था। अव्वल यह लोग रहज़नी और चोरी के खूगर थे। और जो मुसाफ़िर इनकी बस्तदी से गुज़रता था उसे लूट लेते थे। दूसरे नाप तौल में ज़्यादा लेना और कम देना इनकी सरिशत में दाख़िल था। तीसरी यहलोग मुखरिक थे।

चुनान्चे आपने नाप तौल के लिए पैमाना ईजाद किया और वज़न मुक़र्रर किये। लोगों का शिर्क से रोकते रहे। और चोरी और रहज़नी की मुख़लेफ़त में आवाज़ बुलन्द करते रहे। नीज़ उन्हें नमाज़ की तरगीब देते रहे। मगर इन पर कोई असर न हुआ। वह कहते कि तुम्हारी नमाज़ हमारे बाप दादा के खुदाओं की परशतिश से हमें रोकती है। नाप तौल के बारे में उनका कहना था कि आप हमें रोकने वाले कौन होते हैं। हमारा माल हम जिस तरंह चाहें ख़रीदें और फरोख़त करें। अगर हमारे ज़्यादा दख़लन्दाजी करोगे तो हम तुम्हें संगसार कर देंगे।

ग़र्ज कि जब अहले मदीन अपनी हद से गुज़र गये और जनाब शुऐब की तमाम तर इस्ली कोशिशें नाकाम हो गयीं तो खुदा ने उन पर अजाब नाज़िल करने का फैसला किया और इन्हे इस क़द्र शदीद गर्मी में मुब्तेला किया कि सरदाबों में भी उन्हें चैन मयस्सर न आ सका। इसके बाद एक खुश्क और सर्द अब्र का टुकड़ा नमूदार हुआ जिसके नीचे राहत की तलवाश में तमाम लोग जमा हो गये। तो एक सदा बुलन्द हुई जिससे ज़मीन लरज़ने लगी और उस अब्र के टुकड़े से ऐसी आग बरसी कि सब के सब हलाक हो गये।

हज़रते शुऐब का दिल मोहब्बते इलाही से इस क़द्र मामूर था कि आप अपने परवरदिगार के लिए शबो रोज़ गिरया किया करते थे। यहां तक कि आप की मुसलसल गिरये की वजह से तीन दफा आप की बीनामी चली गयी। और तीनों बार खुदा वन्देआलम ने उन्हें नूर बख्शा। आपके मोजिज़ात में से यह भी था कि आप जब किसी पहाड़ पर चढ़ने का कस्द करते थे तो इस पहाड़ की चोटी सर निगूं होकर ज़मीन से लग जाती थी। और आप आसानी से इस पर चढ़ जाते थे। बाज़ रवायतों से पता चलता है कि हज़रते मूसा का असा भी आप ही का अतिया था। और हज़रते मूसा के क़ब्ल आपके पास इससे मोजिज़ात ज़ाहिर हुआ करते थे। तारीखों से यह इन्केशफ़ भी होता है कि आपने अपनी बेटी सफूरा का निकाह हज़रते मूसा से किया था। आपकी विलादत और वफ़ात के बारे में तारीख़ें ख़ामोश नज़र आती है।

हज़रते मूसा बिन इमरान अ 0

हज़रते मूसा बिन इमरान बिन लावी बिन याकूब अ 0। हज़रते ईसा अ 0 से पन्द्रह सौ 75 बरस क़ब्ल और हज़रते यूसुफ से 400 बरस बाद मिस्र की सरज़मीन पर मुतावल्लद हुए। आप का क़द लम्बा आंखें नीली दाढ़ी घनी और दराज़ जिस्म पर बाल ज्यादा और रंग गंदुमी था। आप का नाम क़बती जुबान में मूं और सी से मुरक्कब है। मूं को पानी और सी का इस्तेमाल दरख़त के मानी में होता है। वजहे तसमिया यह बयान की जाती है कि वह सन्दूक जिसमें बन्द करके मूसा दरियाये नील मैं डाले गये थे बहते बहते क़स्रे फिरऔन के किनारे एक दरख़त के नीचे आकर ठहरा था। इसलिए पानी और दरख़त की निस्बत से आप का नाम मूसा हुआ।

आप की वालेदा के नाम में इख़तेलाफ है। मोहक़्क़ेक़ीन व उलमा फाहिया नजीबा अबाहेसा एयारख़ा , बुज़ाइद और ख़ाएस वग़ैरह तहरीर किया है। मगर इस नतीजे तक नहीं पहुंचे कि हक़ीक़तन आप का अस्ल नाम क्या था। मगर इस अम्र में इख़्तेलाफ नही है कि आप एक पाक बाज़ और इबादत गुज़ार इस्राइली ख़ातून थीं। बनी इस्राइल को हज़रते यूसुफ़ ने मिस्र में आबाद किया था। और यही क़ौम यूसुफ़ के बाद इख़तेदार की मालिक बनी। मगर अपने ग़लत तौरो तरीकों की वजह से बहुत जल्द अपना वेक़ार खो बैठी। और हुकूमत पर क़बतियों का क़ब्ज़ा हो गया। जिसका आख़री ताजदार वलीद बिन मसअद था। जो फ़िरऔन के नाम से मशहूर हुआ।

यह बनी इस्राइल के हक़ में बड़ा ज़ालिम व जाबिर बादशाह था। जब किसी इस्राइली को सज़ा देता तो इस को जंमीन पर चितलेटा कर उसके हाथों और पैरों में लोहे की मेंख़ें ठुकवा देता था। जिसकी ताब न लाकर वह हलाक हो जाता था। हज़रते मूसा अपने घर में सबसे छोटे थे। आपके हक़ीक़ी भाई हारून आप से तीन साल बड़े थे। और उनसे बड़ी एक बहन थी जिसका नाम मरियम था। वह ख़ानवाद – ए - याक़ूब का कालिब बिन यूक़ना को ब्याही थीं। और ज़्यादातर अपने वालदैन के घर में रहीं थीं। फ़िरऔन ने एक शब ख़्वाब में देखा कि बैतुल मुक़द्दस की तरफ से एक आतिशी शोला उठा जिसने मिस्र के तमाम क़िबतियों के घरों को जला कर राख कर दिया। मगर बनी इस्राइल को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाया। इस ख़्वाब की ताबीर मालूम की गयी तो नुजूमियों और काहिनों ने बताया कि बनी इस्राइल में एक बच्चा पैदा होने वाला है जो बड़ा होकर फिरऔनियत का तख़ता पलट देगा और पूरी सलतनत को तबाह और बरबाद कर देगा। उसी वक़त से फिरऔन के मज़ालिम बनी इस्राइल पर और ज़यादा बढ गये। और वह उन्हें अपना हरीफ़ समझने लगा। उसने फरमान जारी किया और दाइयां मुक़र्रर की कि बनी इस्राइल की कोई औरत अगर हामेला हो तो उसको हमल जांया कर दिया जाये। और जल्लादों को इस अम्र पर मामूर किया कि अगर किसी के घर में कोई बच्चा पैदा हो तो वह उसे क़त्ल कर दें।

चुनान्चे हज़ारों औरतों के हमल गिरा दिये गये। और लातादाद मासूम बच्चे माओं की गोदों में ज़बह कर दिये गये। इस शोरिश के ज़माने में मूसा पैदा हुए। और खुदा की शान की वह फिरऔन की ही गोद में पले बढ़े और जवान हुए। वाक़ये का इजमाल यह है कि जनाबे मुसा की विलादत के बाद मादरे मूसा को यह फिक्र दामनगीर हुई कि कहीं उनका बच्चा क़त्ल न कर दिया जाये। तो वह बेहद परेशान और मुज़तरिब हुईं। यहां तक कि खुदा वंदेआलम ने बज़रियए वही उन्हें मुत्तला किया कि तुम कोई ख़ोफ़ न करो और इस बच्चे को सन्दूक में बन्द कर के दरिया में डाल दो। हम इसके मुहाफ़िज़ हैं। और इसे फिर तुम्हारे पास पहुंचा देंगे। और इसे अपना रसूल बनायेंगे। (कुरआने मजीद सू 0 अलक़सस आयत 7) इस हुक्में इलाही के बाद मादरे मूसा को तरद्दुद पैदा हुआ कि सन्दूक कहां से महैया किया जाये।

चुनान्चे वह हिज़क़ील बिन सबूर के पास गयीं जो फिरऔन का चचा ज़ाद भाई था और नज्जारी का काम करता था। उससे आपने पांच बालिशका एक लकड़ी का संदूक बनवाया मगर उसके इसरार पर आपने अपनी ग़रज़ भी बयान कर दी। लिहाज़ा हिज़क़ील इस इरादे से फिरऔन के दरबार में गये कि वह उससे यह वाक़या बयान कर दें। मगर खुदा ने उन्हें गोयायी से महरूम कर दिया। और वह इशारों के जरियें फ़िरऔन को अपनी बात समझा नहीं सके। और जब वह वहां से वापस अपनी दुकान पर आये तो उनकी ज़बान फिर बहुक्में खुदा खुल गयी। फिर उन्होंने चाहा कि इस राज़ को तशत अज़बाम कर दें। तो ज़बान फिर बन्द हो गयी। इस बार इनकी आंखों से बीनायी भी रूखस्त हो गयी तो वह बहुत घबराये और खुदा की बारगाह में तौबा की तो उन्हें गोयायी और बीनायी फिर वापस मिली।

इसके बाद आप मूसा पर ईमान ले आये। और मोमिने आले फिरऔन कहलाये। जिसका ज़िक्र कुरआन में मौजूद है। इस सिलसिले में एक रवायत यह भी है कि वह सनदूक़ जिबरइले अमींन मादरे मूसा की ख़िदमत में लेकर हाज़िर हुए थे। बहरहाल जब रात हुई और तमाम शहर पर तारीकी मोहित हो गयी तो मादरे मूसा ने अपने दिल पर पत्थर रख कर मूसा को सन्दूक में बन्द किया और सब्रो सूकुन की छाओं में दरिया के हवाले कर के तड़पती ममता के साथ घर वापस आ गयी। सूबह के वक्त आसिया ज़ने फिरऔन अपने कुछ कनीज़ों के साथ जब दरियाये नील के कनारे सैर के लिये निकली तो उसने देखा कि एक सन्दूक पानी की सतह पर तैर रहा है। जिसे हवा के नर्म व लतीफ झोंके आहिस्ता - 2 उसकी तरफ बढ़ रहे है वह खड़ी हुई इसके कनारे पर बैचैनी से इन्तिज़ार करने लगी। रफता रफता करके सन्दूक एक दरख़त के निचे ठहरा जहां पानी बहुत ही कम था।

आसिया ने अपनी कनीजों को हुक्म दिया कि इसे बाहर निकालो चुनान्चे जब वह संदूक बाहर निकाल कर खोला गया उसने देखा कि सन्दूक के अन्दर एक इन्तेहायी हसीन व जमील व खूबसूरत बच्चा आराम से लेटा हुआ है। अपने दाहिने हाथ का अंगूठा चूस रहा है। खुदा की कुदरत की बच्चे को देखते ही इसके दिल में मोहब्बत का एक तुफान करवटें लेने लगा। चूंकि इसका दामन मुराद नेअमते औलाद से खाली था। इसलिए बेइख़तेयार होकर उसने मूसा को गोद में उठा लिया और प्यार करने लगी। फिर वह उन्हें अपने सीने से लगाये हुए अपने महल में आई और फिरऔन से सारा वाक़ेया बयान किया और कहा कि अगर आप इजाज़त दें तो हम इसे पाल ले और अपनी औलाद बना लें। क्योंकि ख़ुदा ने हमें तमाम नेअमतें दी हैं मगर हम औलाद की नेअमत से महरूम हैं। फिरऔन बच्चे को क़त्ल करना चाहता था। और आसिया की बातों से मुत्तफ़िक़ न था मगर मशीयते ऐज़दी मूसा की आड़ में उसकी तबाही और बरबादी का तमाशा देखना चाहती थी। इसलिए आसिया ने ख़ुशामद दरामद करके आख़िरकार उसे रज़ामंद कर लिया।

दाईयों की तलाश

फिरऔन का राज़ी होना था कि यह खबर दूर-दूर तक फैल गयी कि आसिया को दरियाये नील से एक खूबसूरत बच्चा मिला है जिसे फ़िरऔन ने अपनी फरज़ंदी में ले लिया है। और अब इसे दूध पिलाने वाली एक दाया की तलाश है। यह ख़बर सुनकर बहुत सी औरतें आयीं और लायीं गयीं। मगर जनाबे मूसा ने किसी की तरफ रुख़ भी न किया। यह बात जब मादरे मूसा को मालूम हुई तो उन्होंने समझ लिया कि उनका बच्चा फिरऔन के महल में पहुंच गया है।

लिहाज़ा मामता से मजबूर होकर अपनी बेटी का इस काम पर मामूर किया कि वह महल में जाकर वाक़ेया का पता लगाये और सही सूरते हाल से इन्हें मुत्तेला करे। मां के इस हुक्म पर वह क़सरे फ़िरऔन की तरफ रवाना हुई। और जब महल के कऱीब पहुंची तो उन्होंने देखा कि दूध पिलाने वाली कूछ पेशावर किबती औरतें ले जायी जा रही हैं।

चुनान्चे वह भी इन्हीं औरतों में दाख़िल होकर अन्दर दाखिल हो गयीं। इस वक़्त मूसा आसिया की गोद में थे। पास ही फ़िरऔन भी ख़ड़ा था। और औरतें बारी बारी बच्चे को दूध पिलाने की कोशिश में दिलों जान से मसरूफ़ थीं। मगर मूसा किसी की तरफ रूख नहीं कर रहे थे। थोड़ी देर में फिरऔन जब वहां से हट गया तो ख़्वाहरे मूसा ने आसिया से कहा कि तूझे मैं भी एक ख़ातून का पता बताऊं जिसका हसब व नसब व ख़ानदान बहूत ही अच्छा है। हो सकता है कि यह बच्चा इन्हीं की तरफ रूजू हो जाये। आसिया ने पूछा वह औरत किस क़बीले से ताअल्लूक़ रखती है। कहा बनी इस्राईल से।

आसिया ने कहा कि हमें किसी भी इस्राइली औरत की ज़रुरत नही है। क्योकि फिरऔन इस बात को कभी पसन्द नही करेगा। कि बनी इस्राइल की औरत इस बच्चे को अपना दूध पिलाये या इसकी परवरिश करे। कनीज़ों ने कहा कि जब बच्चा किसी का दूध नहीं पी रहा और इसकी जिन्दगी का सवाल है तो आप फ़िरऔन पर दबाव डालें और इससे कहे शायद यह बच्चा उसी का दूध पी ले। ग़र्ज कि जब कनीज़ों का इसरार हद से ज़्यादा बढ़ा तो आसिया फ़िरऔन के पास गयी और मादरे मूसा के बारे मुख़तसर नसली तअर्ररूफ़ के बाद उन्हें बुलाने की इजाज़त चाही। फ़िरऔन ने कहा अगर यह बच्चा भी बनी इस्राईल से हुआ तो हमारी तबाही और बरबादी का ज़िम्मेदार कौन होगा। लिहाज़ा क़िबती औरत तलाश करो। ताकि उसका दूध इस बच्चे खून में शामिल होकर इसकी इस्राइलियत और हमारी ख़्वाब की ताबीर को बदल दे। आसिया ने कहा जब इसकी नशोनुमां परवरिश और तरबियत हमारी निगरानी में आप के ज़ेरे साया होगी। तो यह ख़ुदबख़ुद क़बती हो जायेगा। हमें डर व ख़ौफ़ किस बात का।

मुख़तसर यह कि थोड़ी सी बहसो मुबाहेसे के बाद आसिया ने बिल आख़िर फिरऔन को राज़ी कर लिया और मादरे मूसा तलब फ़रमायी गयीं। वह आयीं और जैसे ही अपना दूध मूसा की तरफ बढ़ाया तो उन्होने हुमक कर अपने दहन में ले लिया। और पीने लगे फिरऔन के महल में खुशी की एक लहर दौड़ गयी। और आसियाओ फिरऔन का दामन मसर्रत तहनियतओ मुबारकबाद के फूलों से भर गया। इसके बाद फ़रऔन ने मादरे मूसा को दूध पिलाने के ले मुलाज़िम रख लिया। और उनकी तनख़्वाह मुक़र्रर कर दी। इस तरंह ख़ुदा ने वादे के मुताबिक़ उसका बच्चा उसको वापस कर दिया। और बाज़ाब्ता जनाबे मूसा की परवरिश होने लगीं।

फिरऔन की दाढ़ी

जनाबे मूसा अभी डेढ़ बरस के थे कि एक दिन फ़िरऔन ने इन्हें गोद में उठा कर चाहा कि प्यार करें। अचानक आपने उसकी दाढ़ी पकड़ कर और ज़ोरदार झटका दिया कि मुट्ठी भर बाल जड़ से उख़ड़ कर आप के हाथ में रह गये। और वह बदबख़त तक़रीबन अपनी चौथाई दाढ़ी से महरूम हो गया।

बेशक फ़िरऔन के ख़िलाफ़ जनाबे मूसा का यह पहला ताज़ीरी कारनामा था। जिसने उसकी फ़िरऔनियत को चक्कर में डाल दिया। और वह बड़ी संजीदगी से यह सोचने पर मजबूर हो गया कि कहीं यह बच्चा वहीं तो नहीं जिसके बारे में नजूमियों ने पेशिंगोइयां की है। यह ख़याल पैदा होते ही इसके ग़ैज़ो ग़ज़ब की कोई इन्तेहा न रही। और उसने इरादा किया कि मूसा को फ़ौरी तौर पर क़त्ल कर दें। मगर आसिया फिर आड़े आयीं उन्होंने कहा यह नासमझ और नादान बच्चों की फितरत हुआ करती है। कि जिस चिज़ पर फौरन हाथ डाल देते हैं। और एक आप हैं कि अपनी मुटठी भर दाढ़ी के लिये मेरे बच्चे की जान लेना चाहते हैं यह कैसा इन्साफ है। फिरऔन ने कहा कि अगर तेरी नज़र में इसका यह फेल तिफलाना है तो मैं इसकी आज़माइश करूंगा। ताकि हक़ीक़त वाज़ेह हो जाये। फिर इसके हुक्म के मुताबिक़ दो तबक़ इस नोअय्यत के तैयार किये गये। कि एक में दहकते हुए अंगारे थे और दूसरे में लालो जवाहीर।

इसके बाद यह दोनों तबक़ मूसा के सामने रख दिये गये और इन्हें आज़माइश के लिए छोड़ दिया गया। जनाबे मूसा के लिए यह एक बड़ा सख़्त और इम्तेहानी मसला था कि एक तबक़ में आप की ज़ीन्दगी थी और दूसरे में आप की मौत और इन दोनों के दरमियान फ़िरऔन तलवार लिये जल्लाद की तरंह खड़ा था। अगर मूसा तिफलाना समझ को बरू ऐ कार ला कर लालो जवाहिर से भरे तबक़ की तरफ़ हाथ बढ़ा देते तो यक़नन क़त्ल कर दिये जाते लिहाज़ा उन्होंने इस अक़्ले सलील की बिना पर मिनजानिबिल्लाह रसूलों और पैगम्बरों को अता होती है। लालो जौहर की चमक दमक छोड़ कर अन्गारों का इन्तेख़ाब किया। आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़े और एक दहेक्ता हुआ अंगारा उठाया और मुंह में रख लिया फिर एक बार चीख़ मार कर रो भी दिए। ज़ाहिर है आप का मुंह भी जला होगा और हाथ भी। लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि आप क़त्ल से बच गये। और फ़िरऔन का क़तिलाना इरादा हवा में उड़ गया।

तब्लीग़ की इब्तेदा

तारीख़ों की छानबीन से यह बात वाज़ेह हो जाती है। कि हज़रते मूसा ने अपनी तब्लीग़ का आग़ाज़ अपने ही घर से शुरू किया। चुनान्चे जब सोलह बरस के हुए और आप ने अपने वालदैन के घर आने जाने में फिरऔन की तरफ से उन पर की पाबन्दी न रही तो उन्होंने सबसे पहले अपने ही खान्दान के अफराद को तौहीद का दर्स देना शुरू किया। रफ़ता रफ़ता यह सिलसिला और आगे बढ़ा और यहां तक पहंचा कि बनी इस्राईल की दीगर मुक़तदिर हसतियां भी आपके दर से मुसतफीज़ होने लगीं। फ़िरऔन चूंकि अपनी ख़ुदायी का दावेदार था। इसलिए इब्तेदा से ही आप उसके मुख़लिफ थे और इस मुख़ालेफत में दरेपरदा आसिया ज़ने फ़िरऔन , हिज़क़ील और हारून भी आपेक हमख़याल और सहीम व शरीफ़ थे। जो फिरऔन के ख़ौफ़ की वजह से हालते तक़य्या में अपनी जिन्दगियां गुज़ार रहे थे। मूसा के इन ख़यालात से फ़िरऔन भी बेखबर था। मगर जबयह ख़बरें आम हुईं और कुछ ख़ुशआमदी लोगों ने उससे कहा कि जिसे आपने पाला है और वली अहद बनाया है वहीं आप का मुख़ालिफ़ है।

आप की खुदायी की नफ़ी करता और आप के ख़िलाफ लोगों को हमवार करता है। तो एक दिन फ़िरऔन ने मूसा को तलब किया और उनसे कहा कि मैं तुम्हारे मुताल्लिक़ वह बातें लोगों की ज़बान से सुन रहा हूं जिन पर मुझे यक़ीन नहीं आता। यह बताओं कि क्या तुम मेरी ख़ुदायी पर ईमान नहीं रखते।

मूसा ने जवाब दिया आप ख़ुद ग़ौर फरमायें कि जब आप आम इन्सानों की तरंह मजबूर व बेबस पैदा हुए है दूसरों के मरहूने मिन्नत आपकी यह ज़िन्दगी है तो फिर आप ख़ुदायी का दावा किस बुनियाद पर करते हैं। दरहक़ीक़त खुदा तो वह है जिसने न सिर्फ आपको बल्कि तमाम आलमीन को ख़ल्क़ किया जो हर जगह मौजूद है। मगर दिखायी नहीं देता जो ना बेबस है न मजबूर न वह किसी पर जुल्म करता है न किसी जालिम को पसन्द करता है।

आपका यह जाहो हशम यह एख़तेदार यह इज्ज़त यह हुकूमत और यह महल और यह दौलतो सरवत सब उसी ख़ुदा की बख़सी हुई दौलत है तो फिर यह सरकशी , यह तकब्बुर और यह गुरूर क्यों। मैं आपको उसी खुदाए बरहक़ का वास्ता देता हूं कि अपने गुनाहों की तौबा कीजिये और अपने को ख़ुदा कहलवाना छोड़ दीजिये। मूसा की यह गुफ़तुगू सुनकर फिरऔन दम बखुरदा रह गया। उसके होश हवास जाते रहे। और वह कुछ देर ख़ामोश रहा फिर बोला अगर तुम्हारी जगह और कोई मुझसे यह कलाम करता तो मैं इस वक़्त इसकी गर्दन उड़ा देता। क्योंकि मैंने तुम्हें औलाद की तरंह पाला है लिहाज़ा इतनी मोहलत देता हूं और अपनी ज़बान बन्द रखों और इस्लाह कर लो। वरना तुम्हें इसी जगंह क़त्ल कर डालूंगा। जहां तुम्हारी फरियाद का सुनने वाला कोई न होगा। इसके बाद मूसा के पास ख़ामोशी के अलावा कोई चाराए कार न था।

लिहाज़ा आप चुप हो गये। क्योंकि अभी आप फिरऔन की हुकूमत और ताक़त से टकराने के क़ाबिल न थे। इसके अलावा आपने यह फैसला भी कर लिया कि अपने दीन व ईमान की सलामती के लिए फिलहाल इस शहर को छोड़ ही देना ज़्यादा मुनासिब होगा। चुनान्चे आप मौक़े की तलाश में रहने लगे और जब मौक़ा हाथ आया तो एक दिन खच्चर पर सवार होकर निकल पड़े।

क़िब्ती की मौत

शहर से बाहर निकल कर जनाबे मूसा ने कुछ फासला तय किया था कि इत्तेफाक़न रास्ता भूल गये और चलते चलते रात की तारीकी में एक ऐसी जगंह पहुंचे जहां दो आदमी अपने अपने ख़ुदाओं के बारे में झग़ड़ा कर रहे थे। इनमें एक इस्राईली था इसका कहना था कि खुदा वह है जो तमाम कायनात का ख़ालिक है। दूसरा शख़्स क़िब्ती था जो इस बात पर बाज़िद था कि फ़िरऔन ख़ुदा है। मूसा भी ठहर कर यह तमाशा देखने लगे। यहां तक कि दोनों के दरमियान मार पीट शुरू हो गयी। क़िब्ती अपने इस्राइली हरीफ पर भारी पड़ रहा था। चुनान्चे इस पर ग़लबा हासिल करने के लिए इस्राईली शख़्स ने मूसा से मद्द मांगी आपने उसकी हिमायत में क़िब्ती के सीने पर एक घूंसा जड़ दिया जिसकी ताब न लाक वह चक्कर खाकर गिरा और मर गया।

दूसरे दिन आपने देखा कि वही इस्राईली एक दूसरे क़िब्ती से झगड़ा कर रहा और आप से फिर इमदाद का तालिब है आप ने दोनों को छुड़ाने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि क़िब्ती कहने लगा कि “ ऐ मूसा जिस तरंह तुमनें एक आदमी को मार डाला है उसी तरंह आज मुझे भी मार डालना चाहते हो। क्या तुम्हारा नज़रिया है कि दुनिया में मुसलेह बन कर रहने के बजाये सरकश बन कर रहो। अभी यह गुफगुतू हो ही रही ती कि मूसा ने देखा कि एक तरफ से हिज़क़ील भागते हुए चले आ रहे हैं। और जब वह करीब पहुंचे तो उन्होनें मूसा से कहा कि क़िब्ती की मौत की ख़बर फिरऔन को हो गयी है। और उसने शहर के तमाम बड़े आदमियों से मशविरे के बाद तुम्हें क़त्ल कर देने का फैसला कर लिया है। नीज़ उसके गुमाशते तुम्हारी तलाश में सरगर्म अमल हो चुके हैं। लिहाज़ा जिस कद्र जल्द हो सके तुम यहां से निकल भागों।

मूसा का मद्दीन में दाख़िला और शादी

हिज़कील के ज़रिये यह इत्तेला फराहम होते ही हज़रते मूसा अ 0 मद्दीन की तरफ तेज़ी से रवाना हो गये। क्योकि यह शहर फिरऔन की हुकूमत से बाहर था। दौराने सफर दीगर सउबतों के अलावा आपने आठ दिन तक मुसलसल फांक़े किये और दरख़तों के पत्तों को अपनी जिन्दगी का वसीला क़रार दिया। किताबों मे मरकूम हैं कि फाकों से आप की यह हालत हो गयी थी की बदन का सारा गोश्त घुल कर खत्म हो गया था। सिर्फ हड्डिया रह गयी थी। और खाल इस क़दर पतली हो गयी थी कि ऊपर से पत्तियों की सब्ज़ी ज़ाहिर होती थी। ग़र्ज़ कि आठवें दिन आप मद्दीन के एक कुएं पर पहुचे जो शहर से बाहर था।

वहां एक दरखत के नीचे लेट गये और कुछ देर आराम के बाद उठे तो आपने देखा कि कुएं के गिर्द एक भीड़ जमा है यह भीड चरवाहों की थी जो अपने अपने जानवरों को पानी पिला रहे थे। मगर इन्के पीछे दो लड़कियां भी खड़ी थी जिनके चेहरों से आशकार था कि वह किसी शरीफ और मोहज़्ज़ब घराने से तअल्लुक़ रखती है। जनाबे मुसा हमर्ददी के ख्याल से इन लड़कियों के पास गये और पुछा कि तुम क्यों खड़ी हो। उन्होने जवाब दिया कि जब सब चरवाहे अपने जानवरों को पानी पिला लेंगे तो हम भी अपनी बकरीयों को पिलायेंगे। इस भीड़ में हमारे लिये यह काम मुश्किल है।

चुनांचे जनाबे मूसा ने कुंए से पानी निकाला और उनकी बकरियों को सेराब कर के अपनी जगह पर आ कर बैठ गये। इस वक़्त आप पर भूख का सख्त तरीन ग़ल्बा था इसलिए आपने जानिबे आसमान देखा और फरमाया परवरदिगार तू मेरे लिये इस वक्त जिस नेअमत को मुनासिब समझ भेज दे। मैं इसका सख्त हाजत मंद हुँ। अभी आप की दुआ न तमात थी। कि इन लड़कियों में से एक लडकी पलट कर आप के पास वापस आयी और कहा कि मेरे साथ चलिए। आप को मेरे वालिद ने तलब किया है। ताकि वह बकरियों को पानी पिलाने की उजरत आपको अदा करे।मूसा ने पुछा कि उनका नाम व नसब क्या है। उस लडकी ने कहा शुएब नाम है और हज़रते इब्राहीम की नस्ल से ताअल्लूक रखते हैं। यह सुन कर हज़रते मूसा उनके पास तशरीफ लाये और फिर ग़ुफ्तगू के दौरान अपना सारा हाल बयान फरमाया। शुएब ने फरमाया कि अब तुम कुछ अन्देशा न करो ज़ालिमों से तुम्हे नजात मिल चुकी है। फिर आपने इन बकरियों को पानी पिलाने के एवज़ मे कुछ देना चाहा मगर मूसा ने यह कह कर इनकार कर दिया कि मैं दुनिया के एवज़ में अपनी आखेरत नही बेचता जनाबे मूसा की यह दयानत दारी देखकर हज़रते शुएब की साहबज़ादी बोली बाबा जान आप इन्हे अपने यहां मुलाज़िम क्यों नही रख लेते। क्योकि सबसे बेहतर वह है कि जो अपने इरादों का पुख्ता और ईमानदार हो और इनमें यह दोनों बाते मौजूद है।

अपनी बेटी की इस तजवीज़ पर जनाबे शुएब ख़ामोश हुए और बड़ी देर कुछ सोंचते रहे और जब वह चली गयी तो आपने मूसा को मुखातिब कर के फरमाया मेरे ख्याल में मुलाज़ेमत तुम्हारे शयाने शान नहीं है। मैं यह चाहता हुं कि पनी एक लडकी का निकाह तुम्हारे साथ इस मेहर के एवज़ मे कर दुं। कि तुम आठ साल तक मेरे घर में रहों और मेरी बकरियों की देखभाल करों और अगर इस मुद्दत से ज्यादा यानी दस साल तक तुम्ने अपना काम अन्जाम दिया तो यह तुम्हारा मजीद एहसान होगा। वरना तुम्हे एखतियार होगा और इन्शाअल्लाह तुम मुझे नेकोकारों में पाओगे। मूसा ने कहा मुझे आपका हुक्म मन्ज़ुर है। मगर इसकी नोअय्यत सिर्फ मेरे और आपके माबैन सिर्फ मुआहेदे की होगी। और इसके बाद किसी जब्र या ज्यादती का हक़ आपको नही होगा। ग़र्ज़ कि इस मोआहदे की बुनियाद पर आपका निकाह जनाबे शुएब की छोटी बेटी सफूरा से हो गया। और वहीं रहने सहने भी लगे।

असाऐ मूसा

कहा जाता है कि यह वह असा था कि जिसे हज़रते आदम अपने साथ जन्नत से लाये थे। और हज़रते इब्राहीम के बाद सिलसिला दर सिलसिला यह हज़रते शुएब तक पहुंचा था। इसकी खुसूसियत यह थी कि इसके एक तरफ़ दो शाखा था। जो हमेशा सर सब्जो शादाब रहता था। और अंधेरे में रोशनी का काम देता था। यह असा जब दुश्मन पर हमलाआवर होता था तो एक मुहीब और ख़ौफ़नाक अजदहा बन जाता था। इसकी ज़र्ब से पहाड़ टुकड़े -टुकड़े हो जाता था और दरियाओँ का पानी ख़ुश्क हो जाता था। यह नाक़ा बनकर सवारी के काम भी आता था। और जिस जगह गाड़ दिया जाता था हरे भरे मेवेदार दरख़त की शक्ल इख़तेयार कर लेता था। एक दिन हज़रते मूसा ने जनाबे शुएब से कहा कि जब आपने बकरियां चराने का काम मेरे सुपुर्द किया है तो कोई लाठी भी दीजिए जो दरिन्दों जंगली जानवरों को दफा करने के काम में आये।

जनाबे शुएब ने अपनी बेटी से फरमाया फुंला असा उठा लाओ। और वह गयीं और एक असा लेकर वापस आयीं आपने फरमाया यह नहीं दूसरा असा लाओ वह बोली कि मैं क्या करूं बाबजान मैं जब दूसरा असा उठाने का क़स्द करती हूं तो यह असा ख़ुद ब ख़ुद उठ कर मेरे हाथ में आ जाता है। तो आपने फरमाया कि तो फिर इसी को दे दो। मालूम होता है कि मरज़िये इलाही यही है। और मूसा ही इस असा के मुसतहक़ है।

हज़रते मूसा की मराजेअत

हज़रते मूसा को मद्दीन मे रहते जब दस साल गुज़र गये और मुहेदा की मद्दत भी तमाम हो गयी तो एक दिन आपने जनाबे शुएब से अपनी वापसी की ख़्वाहिस ज़ाहिर की उन्होंने पूछा कि क्या सफ़ूरा को भी अपने साथ ले जाना चहते हो। आपने कहा हां इसके बाद जनाबे शुएब ने इन्तिज़ाम किया और मुख़तलिफ़ साज़ों सामान के अलावा एक कनीज़ एक गुलाम कुछ बकरियां और कुछ ज़र नक़द देकर आपको रूख़सत किया। मूसा मद्दीन से बैतुल मुक़द्दस की तरफ़ रवाना हुए और जब काफी सफर तय हो गया तो रास्ते में अचानक सफ़ूरा के पेट में दर्द पैदा हुआ क्योंकि वह हामेला थीं। रात अंधेरी थी कुछ नज़र भी नहीं आता था। इसलिए मूसा थोड़ी दूर चलकर एक मक़ाम पर ठहर गये ज़रा देर के बाद आपने देखा कि एक तरफ कुछ फ़ासले पर आग रौशन है और शोले भड़क रहे हैं। ख़याल पैदा हुआ कि शायद यहां कोई आबादी है।

लिहाज़ा आपने सफ़ूरा से कहा कि मैं चाहता हूं कि तुम्हारे लिए थोड़ी सी आग ले आऊं और लोगों से रास्ता भी मालूम कर लूं। फिर आपने कनीज़ को सफूरा के बारे में चन्द ताकीदें की और उस रूख़ पर रवाना हो गये जिधर आग जल रही थी। काफी राह पैमाई व जद्दो जेहद के बाद जब आप करीब पहंचे तो एक सरसब्ज़ो शदाब दरख़त है जो चारों तरफ से आग से घिरा हुआ है मगर भड़कते हुए शोलों का इस पर कोई असर नहीं है। चुनान्चे जब आप इस दरख़त की तरफ आगे बढे तो वह पीछे खिसकने लगा यह करिशमा देखकर आप जब ख़ौफ से पीछे हटे तो वह आपकी तरफ आगे बढ़ने लगा। यहां तक कि आपके दिल में एक मुकम्मल दहशत पैदा हो गयी। और आप वहां से भागने लगे तो इसी दरख़त से आवाज़ आयी कि ऐ मूसा भागों नहीं तुम्हारा खुदा तुमसे कलाम करना चाहता है।

यह सुनकर मूसा ने अपने दिल को क़वी किया और ठहर कर फ़रमाया इसकी क्या दलील है कि यह आवाज़ मेरे खुदा ही की है। जवाब मिला कि अगर दलील चाहते हो तो तुम्हारे हाथ में जो असा है उसे ज़मीन पर डाल दो। तो आपने असा ज़मीन पर डाल दिया जो देखते ही देखते एक होलनाक अजदहा बन गया। उसकी लम्बाई दरख़ते खुरमै के बराबर थी और इसके मुंह से शोले निकलने लगे यह हाल देखर मूसा इस क़द्र ख़ौफ़ जदा हो गए कि थरथराने लगे। फिर आवाज़ आयी कि ऐ मूसा डरो नहीं अब इस असे को उठा लो मूसा की हिम्मत जवाब दे चुकी थी। मगर अपना दिल मज़बूत करके उन्होंने अजदहे की दुम पर पांव रखा और इसे उठाना चाहा तो फिर वह असा बन गया। मूसा अभी आलमे हैरत में थे कि फिर आवाज़ आयी के ऐ मूसा तुम इस वक़्त वादिये मुक़द्दस में हो जिसका नाम तूर है। लिहाज़ा इसके तक़द्दुस का एहतेराम करो और अपनी नालैने उतार कर अपना दाहिना हाथ अपने गरेबान में डालो आपने गरेबान में डाला और जब बाहर निकाला तो वह इस क़द्र मुनव्वर था कि इसी शुआएं दूर दूर तक फैल गयीं। फिर थोड़ी देर बाद वह शुआएं तो ख़त्म हो गयी मगर मूसा की हतेली में सफेदी का वह निशान रह गया जिससे रोसनी निकल रही थी।

यही निशान यदे बैज़ा कहलाया। दरख़त से फिर आवाज़ आयी कि ऐ मूसा हमने तुम्हें पैग़म्बरी के साथ फिलहाल असा और यदे बैज़ा के मोजिज़ै दिये हैं। जो तुम्हारे लिए काफी है। अब तुम बेख़ौफ व ख़तर फ़िरऔन के दरबार में जाओ और कारे तबलीग़ अन्जाम दो इस पर मूसा ने कहा कि पालने वाले मेरे भाई हारून की ज़बान फसीतर है। लिहाज़ा तू इन्हे मेरा वज़ीर और मद्दगार बना दे ताकि वह कारे तबलीग़ में मेरा हाथ बटाऐ और मेरी नबूवत की तसदीक़ भी करें। हुक्म हुआ कि तुम फ़िक्र न करो हम तुम्हारे भाई को वज़ीर भी बनायेंगे और तुम्हें सलतनत व हुकूमत भी अता करेगे। हज़रते मूसा आग लेने गये थे और पैग़म्बरी लेकर अपनी बीवी सफूरा के पास वापस आये। सफूरा के पास आये तो उन्होंने देखा कि वह एक खूबसूरत नवाज़ाएदा बच्चा गोद में लिये बैठी हैं।

फिर जनाबे मूसा ने सफूरा से सारा वाक़या बयान किया। इन्हें तसल्ली दी और कहा कि मेरे लिये ख़ुदा का हुक्म है कि मैं फिरऔन के दरबार में तब्लीग़ की ग़रज़ से जाऊं लिहाज़ा ऐसी सूरत में मुनासिब होगा कि तुम यहीं से अपने बाप के घर वापस चली जाओ ताकि वहां सुकून और आलाम से रह सको मैं तुम्हारी ख़बर गीरी के लिए आता रहूंगा। और जब हालात साजगार हो जायेंगे तो मैं कुद तुम्हें अपने पास बुला लूंगा।

सफूंरा ने आपकी इस बात से इत्तेफ़ाक किया चुनान्चे आपने इसी मक़ाम से इन्हें गुलाम व कनीज़ के हमराह में जुमला साज़ो सामान के मद्दीन की तरफ रवाना किया. और खुद मिस्र के लिए रवाना हो गये। और फिर सफूरा उस वक्त तक अपने बाप के पास मद्दीन में रहीं जब तक कि फिरऔन दरियाएं नील में ग़्रक न हो गया।

कलीमउल्लाह

हज़रते मूसा से चूंकि ख़ुदा ने कलाम किया था। इसलिए आपका लक़ब कलीमउल्लाह हुआ। यहुदियों और क़ब्तियों का शुमार आप ही की उम्मत में होता है। आप पर तौरेत नाज़ील हुई थी। (जिसका ज़िक्र आगे होगा) जो यहूदियों की मज़हबी किताब है। और आज तक वह लोग इसी को खुदा की किताब समझते हैं और हज़रते मूसा ही को अपना पैग़म्बर मानते हैं। नीज़ हज़रते ईसा और हज़रते रसूले खूदा स 0 व 0 नबूवत के मुन्किर हैं।

हामान और क़ारून

यह फ़िरऔन का मोतमिद वज़ीर था औ इसकी ख़ुदायी पर ईमान रखता था। मूसा से इसका अदावत व दुश्मनी शोहरए आफाक़ है। फिरऔन के हुक्म से एक पहाड़ पर इसने एक बुलन्द व बाला महल तैयार किया था। जिसकी ऊंचाई आसमान से बातें करती थी। कहा जाता है कि इस महल की तामीर में मजदूरों के अलावा 50 हज़ार मेअमारों ने हिस्सा लिया और कई साल में जब वह बन कर तैयार हुआ तो फ़िरऔन इसकी छत पर गया ताकि वह मूसा के खुदा को देख सके इसका ख़याल था कि आसमान इसकी छतसे बहुत नज़दीक होगा। मगर जब वह हवां पहंचा तो इसे आसमान वहां से इतना ही दूर मालूम हाआ कि जितना कि ज़मीन से था। वह बहुत नादिम हुआ और शर्म सारी व ग़ैज़ की हालत में उसने मूसा के ख़ुदा को पुकारना और ललकारना शुरू किया। जब जवाब न मिला तो इसने एक तीर आसमान की तरफ फेंका।

ख़दा की क़ुदरत की वह जब तीर वापस होकर गिरा तो वह खून आलूदा था। जिसे देखकर वह ख़ुशी से उछलने कुदने लगा और कहने लगा कि मैंने मूसा के ख़ुदा को हलाक कर दिया। इस वाक़ये के दूसरे ही दिन ज़लज़ले के एक झटके ने इस महल को मिसमार कर दिया। और इसके गिरनै से हज़ारों लोग मर गये।

क़ारून

यह हज़रते मूसा का चचाज़ाद या ख़ालाज़ाद भाई था। इल्में कीमिया से वाक़िफ़ था इसलिए इसने इतनी दौलत जमा कर ली थी कि उसके खज़ानों की कुंजियां घोड़ों और खच्चरों पर बार की जाती थीं। यह हीरे जवाहेरात से मुरस्सा सुर्ख और सौख़ रंग के लिबास पहनता था। सफैंद घोड़े पर सवारी करता था। और जब अपने क़स्र से निकलता था तो चार हज़ार सवार इसके अक़ब में तीन सौ गुलाम इसके दाहीनी तरफ ज़ेवरात व पुरतकल्लुफ लिबास से आरास्ता तीन सौ ख़ूबसूरत कनीज़ें बायीं तरफ चलती थीं। यह इन्तेहाई मग़रूर व बख़ील था इसकी तबाही और बरबादी की वजह यह बयान की जाती है कि क़िब्तियों की तबाही के बाद जब जनाबे मूसा ने हुकूमत जनाबे हारून के सिपुर्द कर दी और जब कोई कुरबानी करता तो इसका जानवर भी हारून के हाथ ज़ीबह होता था। जिसे ग़ैबी आग आकर उठा ले जाती थी।

इस पर क़ारून को हसद पैदा हुआ। और गुस्ताख़ाना मूसा से कहने का हुक्म ता वैसा ही मैंने किया उस वक्त से वह मूसा का सख़्त दुश्मन हो गया। पने इसससे तौबा करने को कहा तो इसने आपका मज़ाक उड़ाया। जब ज़कात का हुक्म हुआ तो इसने कहा कि मैं नहीं दूंगा। हत्ता कि एक दीनार देने पर बी राज़ी न हुआ। और कहा कि मूसा हमें फक़ीर बनान चाहता है। एक दिन एक बदकार औरत को अशरफ़ियां देकर इसने इससे कहा कि मजमए आम में मूसा पर तोहमत लगाये चुनान्चे दुसरे दिन जब वाज़ में हज़रते मूसा ज़िना की मज़म्मत कर रहे ते तो उसने कहा कि आप को बी लोग ऐसा ही जानते हैं। पिर इस औरत को उसने गवाहा में पेश करना चाहा। मगर ख़ुदा की सान की इसको ख़ौफ़ पैदा हुआ और इसने सच्चा वाकेया बयान कर दिया। और क़ारून की सरबेमोहर वह दोनों थैलियां दिखायीं। आख़िरकार वह मजमए आम में ज़लील हुआ। इसकी इस हरकत पर जनाबे मूसा को जलाल आया चुनान्चै आपने बद्दुआ की ख़ुदा का हुक्म हुआ कि ऐ मूसा मैं ज़मीन को तुम्हारे इख़्तेयार में देता हूं। क़ारून के ले जो मनासिब समझो वह करो।

आपने फरमाया ऐ जंमीन इसे निगल जा क़ारूम मैं घरोबार और ख़जानों के घुटनों तक ज़मीन में धंस गया। तो उसने मान चाही तो आपने ज़मीन को पिर निगलने का हुक्म दिया तो वह कमप तक धंस गया। तीसरी बार जब हुक्म दिया तो वह अपनी दौलत समेत ज़मीन के अन्दर धंस गया कि सफ-ए-हस्ती से उसका नाम व निशान मिट गया।

दरबारी मारके आराई

दस साल क़बल हज़रते मूसा अपने वतन व घर से ख़ाली हाथ निसले थे। मगर जब वापस आये तो पैग़म्बरी की एक अज़ीम दौलत आके साथ थी। घर में दाख़िल होते ही आपनै अपने वालदैन को अपने तमाम हालात और वाक़ेयात से आगाह किया और मद्दीन में हज़रते शुएब से मुलाक़ात और नीज़ अपनी शादी के बारे में बी तफसील से बताया। इसके बाद आपने दो दिन आराम किया और तीसरे दिन अपने भाई हारून को साथ लेकर फ़िरऔन व हामान की हिदायत को रवाना हुए।

दूसरी तरफ़ फ़िरऔन को हज़रते मूसा की तरफ़ लाहक़ था। इसलिए उसने दस बरस के वक़्फ़े में अपनी हिफ़ाज़त के खुसूसी इन्तज़ामात किये थे। और अपने पुराने महल को सात हिस्सों में तक़सीम करके हर हिस्से को एक हनी क़िला बना दिया था। इब्तेदायी और बैरूनी दोनों हिस्सों के दिरमियान जो आमदो रफ़त का रास्ता था। इब्तेदायी और बैरूनी दोनों हिस्सों के दरमियान जो आमदो पफ़त का रास्ता था। इसे दोनों तरफ़ दहकते हे शेरों और गुर्राते हुए खूंख्वार भेडियों के एक तूलानी आमाजगाह ती। जिसे चारों तरफ से लोहों के मज़बूत कटहरो से घेर दिया गया था। ताकि हंगामी हालात में इन दरिंदों से काम लिया जा सके।

वसती हिस्से में दरबार था जिसके दरमियान में फ़िरऔन और इसके वज़रा व मुहाफ़िज़ों के इल अस्सी हाथ ऊंची एक नशिस्तगाह बनायी गयी थी फिरऔन को अपने मुख़बिरों के ज़िरिये जब यह मालूम हुआ कि मूसा अपने बी हारून के हमराह इसके महल की तरफ रवाना हो चुके हैं। तो इसने महल का सद्र दरवाज़ा बन्द करवा दिया और शेरों और भेड़यों को आज़ाद करा दिया ताकि वह लोग जैसे ही महल में दाख़िल हो यह दरिदे इनका काम तमाम कर दें।

ग़र्ज कि जनाबे मूसा और हारून जैसे ही बैरूनी गेट पर पहुंचे तो इसे बन्द पाया और कहने के बावजूद जब फ़िरऔन के सिपाहिय़ों ने इसे खोलने से इन्कार कर दिया तो आपने इस पर अपना असा मारा। असा का पड़ना था कि दोनों पर खुल गयटे और आप बैख़ौफ़ो ख़तर इसके अन्दर दाख़िल हो गये। जब दरिंदों ने आपको देखा तो हमलाआवर होने के बजाये उन्होंने आप के कदमों में अपना सर झुका दिया और वह भी पके पीछे-पीछे दुम हिलाते हुए फ़िरऔन की तरफ चल पड़े आपने दूसरे दरवाज़े को भी असे की मद्द से खोला।

यहां तक कि आप ने सातवां दरवाज़ा खोला तो फ़िरऔन हमान और अपने दीगर साथियों के साथ आपके सामने खड़ा था। इसने जह यह हाल देखा कि मेरे दरिंदों ही मूसा के साथ हैं और वह ही मेरी तरफ खूंखार नज़रों से गूर रहे हैं तो वह डर के मारे भागने लगा। जनाबे मीसा ने फ़रमाया कि ब 6गता क्यों है मेरी मरज़ी के बग़ैर तेरे यह दरिंदे तुझसे कोई ताअरूर्ज़ नहीं करेंगे। फ़िरऔन ने कहा मैं जीते जी अपनै पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहता लिहाज़ा तुम पहले इन दरिन्दों को यहां से दफ़ा करो फिर मेरे क़रीब आओ। मीसा नै अपने से से इन्हें इशारा किया और वह दरिंदे जब चले गये तो फ़िरऔन ने पूछा ऐ मैका अब तुम यहां क्यों आये हो और तुम्हारा मक़सद क्या है। आपने फरमाया खुदा ने मुझे नबूवत पर फाएज़ करके तुम लोगों की हिदायत पर मामूर किया है।

फिरऔन ने कहा तुम्हारे ख़ुदा को तुम्हारे सिवा और की न मिला था। मूसा ने कहा अगर वह मेरे सिवाए किसी और को नबी बनाता तो तेरी तबाही और बरबादी का सबब कौन बनता। यह सुनकर फिरऔन को नुजूमियों की पेशिंगोई याद आ गयी और वह बदहवस हो गया। इसके आड़े तिरछे लहजे में नरमी पैदा हुई। इसने कहा-ऐ मूसा , तुम्हें पाला है तुम्हारी तरबियत की है क्या इसका सिला यही है कि तुम कुफ़राने नेअमत करो।

मूसा ने कहा मेरे कुदा का हुक्म है कि मैं तुम्हारे सर से फिरऔनियत के बूत को रफा करूं और तुम्हे राहे रास्त पर लाऊं। फिरऔन ने कहा अगर मेरे सिवा कोई दूसरा खुदा है तो इसकी निशावियां हमें बताओ और सुबूत दो। मूसा ने अपना असा ज़मीन पर डाल दिया जब यह एक हैबतनाक अजदहा बन गया। उसके मुंमह से झाग और शोले निकलने लगे। यह करिशमा देखकर फिरऔन का दम खुश्क हो गया। और वह इस क़द्र खौफ़ज़दा हुआ और कहने लगा कि ऐ मूसा तुम्हें इस दूध का वास्ता जो तुमने मेरे गर में पिया है इसको हटाओ। वरना मुझे निगल जायेगा। आपने असा उठा लिया और पिर अपने गरेबान में हाथ डाल कर बाहर निकाला यो यदैबैज़ा की तजल्ली से इसकी आंखें चकाचौंध हो गयीं। और इस क़द्र मरऊब हुआ कि ईमान लाने के बारे में बड़ी संजीदगी से ग़ौर करने लगा। और कुझ जब ना था कि वह ईमान ले आता। मगर पास ही हामान खड़ा था इसने कहा कि यह सब जादू है और तू इतना बड़ा नादान है कि अपनी ख़ुदाई छोड़ कर एक बन्दे पर ईमान लाने को सोंच रहा है।

फिरऔन ने कहा कि अगर तेरे नज़दीक यह जादू है तो अपने जादूगरों के ज़रिये से मूसा सै मुक़ाबला कर। चुनान्चे हामान के सरबराही में मशहीर व मुमताज़ जादूगरों की एक जमाअत का इन्तेख़ाल अमल में आया। और मुकाबले की तारीख़ मुक़र्र करके सारे शहर में इसका एलान कर दिया गया। मोअय्यन तारीख़ जब आयी तो सारा शहर उमंढ़ पड़ा और फिरऔन का दरबरा तमाशाईयों से खचा खच भर गया। करतब दिकाने से पहले जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा कि अगर हम मूसा ग़ालिब आ गये तो हमें क्या इनाम मिलेगा।

फिरऔन ने कहा कि मैं हूकूमत में शरीक कर लूंगा। पर याद रखो कि अगर तुम हारे और मूसा तुम पर ग़ालिब आये तो मैं ईमान कुबुल कर लूंगा और मेरे साथ तुम लोगों को बी ईमान लाना होगा। उन लोगों ने यह शर्त मान ली और फ़िरऔन की तरफ से हामान ने इन्हें मुक़ाबले की हरी झंड़ी दे दी। जादूगरों ने मूसा से पूछा कि इब्तेदा हम करेंगे या तुम करोगें। मूसी ने कहा कि मुझे जादू नहीं आता लिहाज़ा इब्तेदा तुम करो। में सिर्फ दफ़ा करूंगा। ग़र्ज़ कि इब्तेदा यूं हुई कि जादूगरें ने कुछ रस्सियां और कुछ लाठियां मूसा की तरफ फ़ेकी जो सांप बनकर इनकी तरफ बढ़ने लगीं। मूसा को खयाल पैदा हुआ कि अगर मैं अपना असा छोड़ता हूं ते लोग मुझे बी इनकी तरंह जादूगर न समझ बैठें और मेरी तरफ से गुमराह और बदज़न न हो जायें। कि इतने में वही आयी कि ऐ मूसा घबराओ नहीं अपना असा ज़मीन पर डालो मैं तुम्हें इन पर ग़ालिब करूंगा।

चुनान्चे मूसा ने अपना असा ज़मीन पर डाला जिसने अजदहे की शक्ल इख़तेयार करके जादूगरों की रस्सिया और लाठियों को निगल लिया। फिर क्या था जादूगरों में भगदड़ मच गयी और उसके साथ तमाशायी भी भागे नतीजा यह हुआ कि कितने लोग कुचल कर मर गयेछ। कितने लोगों ने खड़े खडे पेशब कर दिया और कितनों के पाखान निकल गया। जिसकी वजह से उनके लिबास नजिस हो गये। तारीख़ बताती है कि इस मोजिज़नुमी और मारकाआराई के बाद तक़रीबन 60 हज़ार अफ़राद मूसा पर ईमान लाये। एगर फ़िरऔन अपने क़ौल से मुकर गया। और जो लोग ईमान ला चुके थे। उनकी गिरफतारियां उसने शुरू कर दीं। उन्हें सख्त से सख़्त सज़ायें देने लगा। यहां तक कि जब नका जीना दूभर हो गया तो उन लोगों ने फ़िरयाद व ज़ारी की और मूसा से इम्दाद के तालिब हुए मूसा का परवरदिगार फिरऔन के मज़ालिम से बेख़बर नहीं था। लिहाज़ा इसकी तरफ से अज़ाब की इब्तेदा हुई। कि अचानक एक ऐसा सैलाब आया कि जिस की तुग़यानी ने पूरे शहर को अपने लपेट में ले लिया।

फिरऔनियों (किबतियों) के मकानात ढेर हो गये। हज़ारों जाने चली गयीं। और जो लोग बाक़ी बचे वह शहर छोड़कर जंगलों और मैदानों की तरफ भाग खड़े हुए। मगर यह क़ुदरते इलाही थी कि बनी इस्राइल के घरों में पानी का एक क़तरा भी दाख़िल न हुआ। मुख़तसर यह कि चालीस दिन तक सैलान का पानी फिरऔन की फिऱऔनियत को रिहा किया और न ही इनके जुल्म व तशद्दुद में की कमी वाक़े हुई। तो ख़ुदा ने इनकी क़ौम पर टिड्डियों को मुसल्लत किया जिसकगा नतीजा यह हुआ कि इनके तमाम ज़रातें तबाह हो गयीं।

दरख़्तों और बागों का सफ़ाया हो गया। और जब कुछ न बचा तो टिड्डियों ने इसके मकानों के दरवाजों और खिडकियों पर धावा बोला। और इनकी लकड़ियों को खाना शुरू किया। जब इनका भी ख़ात्मा हो गया तो खुदा की इस अजीब व ग़री ब मख़लूक़ ने किबतियों के कपड़ों और लिबासों का सफाया किया। यहां तक कि पूरी कौम को बरहेना कर दिया। फिर उनके जिस्मों से लिपट गयीं और उन्हें सर वग़ैरह के बालों से बी महरूम कर दिया। य़ह हाल देखकर फ़िरऔन ने मूसा से मन्नत और समाजित की और उसने कहा कि – ऐ मूसा तू अपने खुदा से कहकर इस बला से हमें निजात दिलादो तो हम तुम्हारी क़ौम (बनी इस्राइल) के तीस हज़ाल क़दियों को रिहा कर देंगे। और खुद भी तकुम परईमान लायेंगे। मूसा ने रहम ख़ाकर दूआ की और खुदा की कुदरते कामेला नै टिड्डिययों का अज़ाब फ़िरऔनियों के सर से टाल दिया। लेकिन मतलबप निकल जाने के बाद। फ़िरऔन अपने दावे से फिर से मुकर गया। तीसरी मरतबा ख़ुदा ने मूसा से फ़रमाया कि दवम अपना सा ज़मीन पर मारो असा का मारना था कि ज़मीन एक जगह से शक हुई और इसके अंदर से जुओं का एक समुंदर उमंड पड़ा जो निहायत सुरअत व तेजी के बजाये हवा में उड़ती थीं। और जिस क़िबती पर हमलाआवर होती थीं उसका खून चूस लेती थीं जिस्म पर बड़े- 2 आवले पड़ जाते थे। इसका सर गंजा हो जाता था। और भवें व पलकें साफ हो जाती थीं। इनकी कसरत का यह हाल था कि अगर वह की चीज़ खाने के कस्द करते तो इसमें भी बेशुमार जुऐ चलती फिरती नज़र आती और पानी पीते तो उनका प्याला जूओं से भर जाता था। इस अनोखे अज़ाब से तंग आकर पूरी क़ौम मौत के दहाने पर पहुंच गयी। तो पिरऔन ने फिर जनाबे मूसा का सहारा लिया और उन्हें यक़ीन दियाला कि इस मरतबा हम लोग जरूर ईमान लायेंगे औरत कैदियों को भी आज़ाद कर देगे।

मगर शर्त यह है कि हमें इस अज़ाब से छुटकारा दे दो। चुनान्चे मूसा ने पिर दुआ फरमायी और जैसे ही फिरऔन को इस अज़ाब से छुटकारा मिला वह पिर अपने वायते से मुकर गया। बहर हाल फिरऔन की कुदाई का इक़रार करने वाली यह बदनसीब क़ौम तरंह तरंह के अज़ाब का शिकार होती रही। यहां तक कि उनकी खेतियां बरबाद हो गयीं , बाग़ात तबाह हो गयी। उनकी दौलत संगरेज़ों में तब्दील हो गयी। इनकी औरतें और औलादैं ताऊन वगैरा में मुब्तेला होकर मर गयीं। और वह राहे रास्त पर न आयीं। बहुत कम लोग से थे जो फिरऔन से मुनहरिफ होकर मूसा के हमनवां बन सके।

यही वह ज़माना था कि जनाबे हिज़क़ील मोमिने आले फिरऔन तक़य्ये को खैरबाद कहा और खुल कर जनाबे मूसा पर अपने ईमान का एलान किया जिसके नतीजे में फिरऔन ने उन्हें व उनके अहलो अयाल करो एक तन्दूर के अन्दर ज़िन्दा जलवा दिया। यही वह ज़माना था कि इसने अपनी ज़ौजा आसिया बिन्ते मज़हिमा को मूसा पर ईमान लानै के जुर्म में जलती ही ज़मीन पर बरहैना लिटा कर उनके हाथों और पैरों में लोहे की मेख़ें ठुकवा दीं। जिसकी वजह से वह मोमिना दुनिया से चल बसी। यही वह ज़माना था जब बहुक्में खुदा बनी इस्राइल मिस्र

छोड़कर हज़रते मूसा की क़यादत में शाम की तरफ रवाना हुए।

फिरऔन की ग़रक़ाबी

बाज़ रवायतों से मालूम होता है कि मुसलसल अज़ाब की वजह से फ़िरऔन जब बहुत ज्यादा तंग व परोशान हा तो उसने बनीइस्राइल को कैंद से रिहा कर दिया था। इसके बाद ख़ुदा की तरफ़ से मूसा को यह हुक्म हा कि तुम रातों रात बनी इस्राइल को लेकर शाम की तरफ रवाना हो जाओं। चुनान्चे आप रवाना हे और सवेरा होते होते दिरयाये नील के किनारे पहुंचे।

दुसरी तरफ जब फ़िरऔन को यह ख़बर मालूम ही कि मूसा बनी इस्राइल को लेकर मिस्र से कहीं और जा रहे हैं तो इसने दस लाख और एक रवायत के मुताबिक़ एक लाख साठ हज़ार का लखकर लेकर उनका पीछा किया ताकि रास्ते ही में वह तमाम लोगों को मौत के घाट उतार दे। गर्ज़ कि जब फ़िरौन और उसका लशकर क़रीब पहुंचा और बनी इस्राइल ने देखा तो वह बहुत ज़्यादा ख़ौफ़ज़दा और परेशान हे। चुंकि उनके सामने मौजें मारता हुआ वसी दरिया था जिसमें डूब जाने का ख़तरा था। पुश्त पर फ़िरऔन का लशकर जिससै क़त्ल हो जाने का अंदेशा था। यानि इनके आगे भी मौत थी और पीछे बी इस हालत में बहुत से लोग मूसा से बदज़न हुए और कहने लगे ऐ मूसा आज तुम्हारी वजह से हम लोग मारे गये। मूसा ने फरमाया कि घबराओ नहीं हमारा ख़ुदा हमारी मदद जरूर करेगा। इतने में वही हुई कि ऐ मूसा तुम अपना असा दरिया पर मारो तो तुम्हारे वास्ते रास्ते खुल जायेंगे।

चुनान्चे असा के मारते ही दरियाये नील के बारह रास्ते इस तरंह पैदा हुए कि इन रास्तों के दोनों तरफ पानी बुलंद होकर दीवार की तरंह ठहर गया। और जनाबे मूसा की क़यादत में बनीइस्राइल तेज़ी से इस पार से उस पार पहुंच गये। इतने में फिरऔन बी मय लशकर के वहां पहुंच गया। और उसने दरिया में खड़ा होकर अपने लशकरियों को आवाज़ देने लगा खुदा का करिशमा देखिये कि जब बनी इस्राइल का आख़िरी शख़्स दरिया के उस पार गया और फिरऔन की फ़ौज का आख़िरी शख़्स दरिया में दाखिल हो चुका तो पानी की सतह तेज़ी से बराबर और हमवार हो गयी। और फ़िरऔन मय लशकर के ग़र्क़ हो गया।

कुरआन कहता है कि फ़िरऔन जब बने लगा तो उसने कहा कि जिस ख़ुदा पर बनी इस्राइल ईमान लाये हैं उस पर मैं भी ईमान लाता हूं बेशक उसके सिवा की माजूद नहीं हैं। और मैं (भी) उसके फरमा बरदार बन्दों में से (कुरआने मजीद सुरए यूनुस आयात 60-62)।

फिरऔन इससे क़ब्ल भी हज़रते मूसा से मान लाने के बारे में मुताअद्दि बार वादा ख़िलाफी कर चुका था और चूंकि वह तमाम उमर् नाफरमानियां और सरकशी करता रहा। इसलिए उसे आखिरी अज़ाब के मौक़े पर ख़ुदा की तरफ़ से कोई छूट नहीं मिली और डूबते वक़्त जब वह आख़िरी हिचकियां लेने लगा तो इरशादे बारी हुआ-

हम आज तेरी रुह के साथ कोई रियायत नहीं करेंगे। अलबत्ता तेरे जिस्म को दरिया में तह नशीन होने से बचायेंगें ताकि तू अपने बाद आने वालों के ले इबरत का नमूना बन सके।

मज़कूरा आयतों से यह भी वाज़ेह होता है कि अगर की शख़्स तमाम उम्र खुदा और सके नबी की नाफ़रमानियों और ईज़ा रसानियों का मुरतकिब होता रहे। और फिर वह वक़्ते आख़िर तौबा करे या मजबूरन अपने ईमान का मुज़ाहेरा करके फ़रमाबरदार बन्दों की फेहरिस्त में शमिल होना से क़ब्ल या उसके बाद बहालते मजबूरी या बरबिनाये मसलहत मुसलमान हुए और रसूले अकरम स 0 अ 0 पर ईमान लाये। मगर आले रसूल के साथ हमेशां दुश्मनी से पेश आये।

बहरहाल तारीख़ से पता चलता है कि फ़िरऔन का लशकर दरिया में इस तरंह डूबा कि उनकी लाशें भी न उभर सकीं। मगर फ़िरऔन की लाख दरिया के मग़रिबी किनारे पर जिसे जबले फ़िरऔन कहा जाता है। तैरती हुई बरामद की गयी। इस मक़ाम पर गर्म पानी का एक चस्मा भी है। जिसे वहां के मक़ामी लोग हम्मामे फ़िरऔन के नाम से जानते हैं। 1907 में माहेरीने आसारे क़दीमा को फिरऔन की मम्मी दस्तेयाब हुई थी। जो आज भी काहेरा के अजाएब ख़ाने में रखी हुई है। कुरआन की हक़ानियत का एलान कर रही है।

बनी इस्राइल और मन्नो व सलवा

दरियाये नीलं को उबूर करने के बाद बनीइस्राइल (जिनकी तादाद 6 हज़ार थी) हज़रते मूसा के साथ एक बे आब व गेयाह मैदान में जब केयाम पज़ीर हुए तो ख़ालिके कायनात ने इनके ले एक अब्र का टुकड़ा भेजा जो दिन की धूप में इन पर साया करता था और रात में इससे तुरन्जबीन बरसती थी। और जिसे दिन में यह लोग खाते थे फिर शाम के वक़्त बइजाज़े इलाही भुने हुए तीतर और बटेरा हवा के ज़रिये आ जाते ते। जो रात के वक़्त ग़िज़ा का काम देते ते इसी को क़ुरआने मजीद में मन्नो व सलवा कहा गया है। पानी के लिये हज़रते मूसा ने एक पत्थर पर अपना असा मारा था जिससे आबे शीरी के बारह चश्में जारी हुए इसी को यह लोग पीते थे। जब कुछ अरसा गुज़र गया तो एक दिन इस्राइलियों ने मूसा से कहा कि एक तरंह की ग़िज़ा खाते खाते हमारा दिल भर गया है।

लिहाज़ा तुम अपने खुदा से कहो कि वह हमारे लिये कुछ साग व सब्ज़ी ,सब्ज़ी ,सब्ज़ी ,सब्जी लहसुन प्याज़ करेले कक़ड़ी दाल रोटी का इन्तेजाम भी करे। मूसा ने फ़रमाया कि अगर तुम लोग कुदा की नेअमतों को ठुकरा कर अदना चीज़ों के ख़्वाहिश मंद हो तो हमारे साथ फिलिश्तीन चल कर क़ौमे अमालेक़ा से ल़डो जिसके ले परवरदिगार ने हुक्म दिया है कि वहां तुम्हारी मतलूबा चीजें तुम्हें मिल जायेंगी। यह सुन कर इन लोगों ने कहा कि क़ौमें अमालेक़ा बड़ी जंगजूं ,जंगजूं खूंखार ज़ालिम व जाबिर क़ौम है। इससे लड़ने के लिए हमारे पास हिम्मत व ताक़त नहीं है।

जनाबे मूसा ने इन्हें समझाया बुझाया और हमवार करने की बड़ी कोशिश कीं मगर इन्होंने कहा कि तुम ख़ुद लड़ो हम यहीं रहेंगे और जब तुम इस क़ौम पर फतह और क़ाबू हासिल कर लोगे तो हम भी आ जायेंगे। यूशा बिन नून और कालिब बिन यूहेन्ना भी जनाबे मूसा के हम राह थे। इन लोगों ने बहुत कुछ समझाया और हर तरहं की तसल्लियां दीं मगर इन नमक हराम क़ौम ने यह कहकर साफ इन्कार कर दिया कि हम हरगिज़ हरगिज़ इस शहर में दाख़िल नहीं होगे जब तक बनी अमालेक़ा के अफ़राद वहां मौजूद हैं। आख़िरकार इनकी सरकशी और हट धरमी से तंग कर जनाबे मूसा ने खूदा की बारगाह में यह दुआ की कि परवरदिगार हमें इन सरकशों से अलहदा कर दे।

इसके बाद हज़रत , मूसा ने अपने भाई हारून यूश बिन नून कालिब बिन युहेन्ना और कुछ उन इस्राइलियोंम को जो आपके हमनवां थे साथ लिया। और फ़िलिस्तीन की तरफ जाने का इरादा कर लिया। इस्राइलियों ने जब यह देखा तो आपस में यह कहने लगे कि अगर मूसा हमारे दरमियान से चले तो हम पर ख़ुदा का अज़ाब नाज़ल हो जायेगा। चुनान्चे सब एस जगह इकट्ठा हुए और हज़रते मूसा के पास आये इन्होंने तौबा की और अपनी सरकशी की माफी मांगी मगर फिर भी इनके साथ जाने पर रज़ामंद न हे तो परवरदिगार ने जनाबे मूसा से फ़रमाया ऐ मूसा इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो।

यह चालीस साल तक इसी बियाबान में सरगर्दा रहेंगे और किसी शहर में दाखिल न हो सकेंगे। ग़र्ज़ कि जनाबे मूसा ने वहां से जाने के बाद यह लोग रोज़आना शब को पना सामान बांधकर रवाना होते और सारी राद राह पैमायी के बाद सुबह के वक्त इसी मक़ाम पर फिर आ जाते जहां से चले थे। इसी तरंह चालीस बरस गुज़र गये। इनमें जो बच्चे ते वह जवान हो गये जो जवान थे वह बूढ़े हो गये जो बूढ़े थे वह मह गये।

बाबे हत्ता की हक़ीक़त

चालीस साल बाद हुक्में इलाही की बिना पर हज़रते मूसा ने अपने भाई और यूसा बिन नून को इन्हीं जंगल से शहर में लाने के लिए रवाना किया चूंकि जंगल में रहते रहते यह लोग बहुत ज़्यादा परेशान हो चुके थे। इसले फ़ौरन तैयार हो गये। और हारून व यूशा के हमराह शहर की तरफ चल पड़े रास्ते में इन्हें आरीहा नामी एक फ़सील बन्द आबादी से गुजरना था जिसकी मग़रिबी दरवाज़ा बाबे हत्ता यानी बख़शिश का दरवाज़ा कहलाता है।

इसके बारे में जनाबे हारून ने बनी इस्राईल हो यह हिदायत कर दी थी कि जब वह वहां पहुंचे तो वह अदब वह एहतेराम से इस दरवाज़े को बोसा दें। इसके बाद अपनी ज़बान से हत्ता हत्ता कहते हे क़दम आगे बढ़ायें। इस अमल से परवरदिगार इनके गुनाहों को बख़श देगा। मगर यह लोग जब वहां पहुंचे तो उनका मज़ाख़ उडाया और हत्ता हत्ता कहने के बजायटे तमसख़ुराना मजाक में हन्ता हन्ता यानी गन्दूम गन्दुम की सदायें बल्न्द करने लगे। मक़सद यह ता कि हम मन्नो व सलवा खाते खाते तंग आ चुके हैं लिहाज़ा अब हमें गेहूं की रोटियां चाहिए। इस इसतेहज़ा की सज़ा इन्हें यह मिली कि कुदा ने इनकी पूरी क़ौम पर ताउन को मुसल्लत कर दिया जिसने चौबीस हजार इस्राइलियों को मौत के घाट उतार दिया। हज़रते

अमीरूल मोमेनीन अली इब्ने अबी तालीब अ 0 का क़ौल है कि उम्मते मुसलमा में मेरी मिसाल सफीनए नूह बाबे हित्ता की सी है। यानी जिस तरंह बाबे हत्ता बनी इस्राइल के गुनाहों की बखशिश का दरवाज़ा था। उसी तरंह मेरे अहलेबैत मुसलमानों के लिए बख़शिश और निजात का ज़रिया हैं।

औज बिन औक़

औज बिन औक़ को दुनिया का पहला अजूबा कहा जाये तो ग़लत न होगा। इस जीबुल खिलकत इन्सान का क़द तीन हज़ारह तीन सौ ती स गज़ था और एक रवायत के मुताबिक़ तीन लाख तीन हज़ाह सौ गज़ लम्बा था। इनके हाथ की उन्गलियां तीस-तीस गज़ की थीं। यह समन्दर की तह से मछलियांम पकड़ता था। बरसात के दिनों में बादलों से पानी चूस कर पीता था। कहा जाता है कि तूफाने नूह। का पानी जो पहाड़ों की बलंदियों से भी चार सौ गज़ उंचा था। सिर्फ इसकी पिंडली तक पानी पहंचा था।

क़ौमे अमालेक़ा से जंग के दौरान हज़रते मूसा ने बनी इस्राइल के बारह क़बीलों में से हर क़बीले के एक शख़्स को उसका सरदार मुकरई करके यह ताकीद की थी कि हर क़बीला अपने सरदार के साध क़ौमे अमालेक़ा की तलाश में मुशतलिफ सिमतों की तरफ रवाना हो। और जहां इनसे मुठभेड़ हो जंग कर लें।

चुनांनचे इसी तलाश व तजस्सुस के दरमियान एक क़बीले से औज बिन औक़ का सामना हो गया इसने तमाम क़बीले के लोगों को अपने दामन में रखकर कमर से बांध लिया और अपनी मां (औक़) के पास लाकर डाल दिया और कहने लगा कि यह हमसे जंग करने आये थे। इनकी मां ने कहा कि इन्हें छोड़ दो ताकि यह लोग अबने शहर मैं जाकर हमारा हाल बयान करें। और यह सुनकर दूसरे लोग ख़ौफ़ खायें। और जब यह लोग पलट कर हज़रते मूसा के पास आये तो उन्होंने सारा माजरा बयान किया जनाबे मूसा ने उन्हें जंग की तरग़ीब दी और ख़ुद भी एक लखकर लेकर औज की तलाश में रवाना हुए।

औज ने जनाबे मूसा और उनके लशकर को दोखा तो पहाड़ का एक बहुत बड़ा तोदा था तो वह अपने सर पर उठा लिया ताकि वह एक साथ पूरे लशकर को तबाह करदें।मनगर कुदा की कुदरते कामेलला ने इस तोदा के दरमियानी हिस्से में एक छेद कर दिया जिसकी वजह से वह ज की गर्दन का तौक़ बन गया। और लाख कोशिश के बावजूद उसकी गर्दन से निकल न सका। यह कैफ़ियत देखकर जनाबे मूसा आगे बढ़े और तेजी से उछल कर इसके टखने पर एक ऐसा असा मारा कि वह गिर पड़ा इसका गिरना था कि बनी इस्राइल इस पर टूट पड़े और अपनी तलवारों से इसके टुकड़े कर दिये एक रवायत में है कि तीन हज़ार साल तक इसके पांव की हड्डी दरियाये नील पर पूल का काम देती रही (वअल्लाहो आलम)।

तौरेत का नुजूल

जब हज़रते मूसा की उम्र 80 साल की हुई तो परवरदिगार का हुक्म हुआ कि ऐ मूसा तुम अपनी क़ौम् से अलग होकर एक माह के लै कोहे तूर पर ख़लवत इख़तेयार करो तो हम तुम्हें ऐसी किताब देंगे जो तुम्हारे बाद बी तुम्हारी क़ौम की हिदायत करती रहे। चुनान्चे आपने अपने भाई हारून को अपना नायब बनाकर तूर पर तशरीफ ले गये।

मरज़िये इलाही से मोईना मुद्दत कुछ बढ़ गयी और एक माह के बजाये चालीस दिन हो गये तो वह बनी इस्राइल यह समझे कि मूसा हमें छोड़ कर कहीं भाग गये हैं। उन्होंने हारून की इताअत छोड़ दी और सामरी के बहकाने से एक बछड़े का मुजस्सेमा बनाकर उसकी परस्तिश करने लगे जनाबे हारून ने इन्हें लाथ समझाया और मना किया मगर इन लोगों ने एक न मानी जब हज़रते मूसा पलट कर आये तो अपनी क़ौम की यह हालत देखकर बेहद रंजीदा मलूल और नाराज़ हुए। बिल आखिर खुदा के हुक्म से आपने यह सज़ा तजवीज़ फरमायी कि वह सब मिलकर बाहम एक दूसरे को क़त्ल कर दें।

ग़र्ज़ बनी इस्राइल मजबूर हुए इन्होंनै गुस्ल किये कफन पहने सहरा में गये और वहां दो जानू बैठकर अपनी ख़म कर दीं। बारह हज़ार आदमी जो साबित क़दम थे वह बरहैना तलवारें लिए इनके सरोकं पर आ धमके इसके बाद एक सियाह घटा छा गयी ताकि तारीकी की वजह से अपनों और बेगानों का पता न चल सके। और रहम न आये गर्ज़ दोपहर से शाम तक क़त्लेआम होता रहा। और हज़ार इस्राइली मौत के मुंह में चले गये। तब बाक़ी लोगों की ख़ता माफ हुई इसके बाद जनाबे मूसा ने इनसे तौरैत पर अमल पैरा होने को कहा तो वह किताब की ज़ख़ामत को देखकर घबराये और कहनै लगे कि हमसे इसका बोज तो उठ नहीं सकता है इतने अहकाम की तामील क्योंकर मुमकिन है। खुदा ने इनकी 45 तम्बी के ले कोहेतूर का निस्फ़ हिस्सा इनके सरों पर मोअल्लक़ कर दिया कि मानते हो तो मानो वरना कुचल दिये जाओगे। तब जबरन व क़हरन उन्होंने तौरैत को तस्लीम किया और इस पर अमल का वादा किया।

गाये का क़िस्सा

हज़रते मूसा के ज़माने में एक औरत बहुत ही खूबसूरत और हसीन थी इसके पास आफ़ील नामी एक शख़्स ने जो बड़ा नेक व मालदार था। शादी का पैग़ाम भेदा आफ़ील के चचाज़ाद भाई ने बी पैग़माम दिया। इस औरत ने आफ़ील के पैग़ाम को मन्जूर कर लिया और शादी हो गयी।रश्द व हसद में फ़ील के भाई नै एक शब को सको कत्ल कर ला और इसकी लाश दूसरे मोहल्लै मैं एक मस्जिद के दरवाज़े पर डाल दी और फिर खुद भी सुबह इसके क़ेसास का दावेदार हुआ। बनी इस्राइल में इस वाक़ये को लेकर सख़्त हंगामा बरपा हो गया। और हर क़बीला दूसरे क़बीले को क़त्ल का ज़िम्मेदार और मुजरिम क़रार देने लगा।

खुदा का हुक्म है कि तुम एक गाये ज़बहा करके इसके गोस्त का टुकड़ा इसकी लाश पर मारो। मक़तूल खुद ही ज़िन्दा होकर अपने क़ातिल का पता बतायेगा। पहले तो बनी इस्राइल ने गाये ही के बारे में कट हुज्जितिया कीं इसके बाद ख़रीदारी के मामले में भी अपनी हेमाक़तो और शरारतों से बाज़ न आये आख़िरकार एक मरदे मोमिन को जो आले मौहम्मद पर दुरुद भेजता रहता था और अपने वालदैन का फरमा बरदार था। खुदा ने इन अहमकों के हाथ से एक गाये की क़ीमत दिलवायी कि शहर भर के बनी इस्राइल मुफ़लिस व मोहताज हो गये इन्हें इतना सोना देना पड़ा कि जितना की इस गाये कि खाल में समा सका। ग़र्ज कि वह गाय ज़बहा की गयी और इसके गोस्त का एक टुकड़ा मक़तूल की लाश पर मारा गया। गोश का मारना था कि वह मय्यत उठ बैठी और उसने अपने चचाज़ाद भाई को अपना क़ातिल बता दिया। और पिर इसको परवरदिगार की तरफ़ से काफी तूलै उम्र अता हुई। इस वक़्त से तमामि दुनिया में गाय का ज़बीहा राएज हुआ।

बैतुलमुक़द्दस की बुनियाद

जनाबे मूसा फूतुहात की मंजिलों से गुज़र कर जब अरज़े मुकद्दस पर वारिद हुए तो वहां उन्होंने चहार दीवारी बुलन्द करके एक मस्जिद की बुनियाद डाली जो बैतुल मुकद्दस के नाम से मशहूर है। इसमें नमाज़े जमात होती थी। तौरैतद रखी जाती थी। और ताबूतै सकीना व दीगर तबरर्रुकात भी इस मस्जिद में रहते थे।हज़रते मूसा ने सका इन्तेज़ाम अपने भाई के जिम्मे किया था। जो इनके बाद इनके दो बेटों शब्बर और शब्बीर के हवाले रहा। फिर इनकी औलादें इनकी मुतावल्ली हुईं। हज़रते हारुन अपनी आख़री सांस तक जनाबे मूसा के बेहतरीन नाएब व जानशीन रहे। चुनान्चे इसी बिना पर पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया है कि ऐ अली तुम्हें मेरी तरफ़ से वही मंज़ीलत हासिल है जो हारुन को मूसा की तरफ़ से हासिल थी। बस फर्ख़ सिर्फ़ इतना है कि मेरे बाद कोई पैग़म्बर न होगा।

यहूदियों की मुशरेकाना व जाहिलाना सरिश्त

यहूद के माने हरकत देने के हैं और चूंकि यहूद तौरैत पढ़ने वक़्त हिला करते थे। इस वजह से यहूदी कहलाये। दूसरा सबब यह भी होता है कि यहूद बिन याकूब की औलाद होकने की बजह से यहूदी कहे जाते थे। कुरआनी सराहतों से यह अमर् आशकर है कि बनी इस्रीइल (यहूदियों) पर मिसलसल इनायतें होती रहीं। इनकी रहबरी और रहनुमायी के लिऐ पैग़म्बरों का सिलसिला जारी रहा।

ख़ुदा ने इन्हें अपनी नेअमतों से ख़ूब ख़ूब नवाजा बड़ी बड़ी हुकूमतें भी अता कीं। मगर यह बदबख़त क़ौम न कभी मुत्तहिद रही और न इसने दिल से खुदाए वहदहु लाशरीक की वहदानियत का इक़रार किया कभी इसे क़ारून ने गुमराह किया सामरी ने और कभी शैतान ने बहकाया।

इस क़ौम पर ख़ुदा के एहसानात और इन एहसानात के बदले में इनका मुखरेकाना और जाहेलाना रवैया इस वक़्त वाज़ेह हो सकेगा जब हम इनके वाक़ेयात का मुताला करें जिससे कि कुरआने मजीद का बहुत बड़ा हिस्साभरा पड़ा है। यह एक हक़ीक़त है कि यह क़ौम अपनी मुशरेकाना सरगरमियों और बदआमालियों की वजह से बार बार ख़ुदा के एतापब व अजड़ाब का सबब बनती रहीं। मगर इनकी सरिश्त में कोई तब्दीली वाक़े न हुई। जिसका अन्जाम यह हुआ कि परवरदिगार ने इन्हें क़यामत तक के लिये ज़िल्लत और रूसवायी से हम किनार कर दिया। जैसा कि कुरआन में है कि –

हम क़यामत तक तुम पर ऐसे हाकिमों को मुक़र्रर करते रहेंगे जो तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें और जलील व रुसवा करेंगे। (कुरए एराफ़ आयात)। खुदा की तरफ से यह एलान किसी फ़रदे वाहिद के लिए नहीं बल्कि पूरी क़ौम यहूद के ले है। और तारीख़ भी गवाह कि कभी इन्हें बख़ते नस ने तबह व बरबाद मुल्क बदर किया कबी ईसाईयों ने ताराज यह क़ौम ज़लील व सुसवा होती रहेगी। मौजूदा सदी में भी यह क़ौम जर्मनी के नाज़ियों के क़हर व ग़ज़ब का शिकार हो चुकी है। जिन्होंने इनके क़त्लेआम के बाद इन्हें मुल्क बदर कर दिया था और यह अपनी जान बचाने की ग़रज़ सके दूसरे मुमालिक में मुन्तशिर हो गयी थी। मगर बरतानिया और अमरीका ने इनकी एक अलग रियासत बनाकर इस नाक़िस क़ौम को फिर मुसलमानों पर मुसल्लत कर दिया। और यह क़ौम फिर एक बार ख़ुदायी क़हरो ग़ज़ब का निशाना बनने के लिऐ मुसलमानों के ख़िलाफ़ फ़ितना परदाजियों और महाज़आराईयों के साथ शैतानियत के रास्तों पर गामज़न है।

इस क़ौम पर ख़ुदा के एहसानात और इन एहसानात के बदल में इनका मुशरेकाना और जाहेलाना रवैया इस वक़्त वाज़ेह हो सकेगा जब हम इनके वाक़येता का मुतालेआ करें जिससे किकुरआने मजीद का बहुत बड़ा हिस्सा भरा पड़ा है। यह एक हक़ीक़त है कि यह क़ौम अपनी मुशरेकाना सरगरमियों और बदआमालियों की वजह से बार बार ख़ुदा के एताब व अज़ाब का सबब बनतीरहीं। मगर इनकी सरिश्त में कोई तब्दीली वाक़े न हुई। जिसका अन्जाम यह हुआ कि परवरदिगार ने इन्हें क़यामत तक के लिये जिल्लत और रूसवायी से हम किनार कर दिया। जैसा कि कुरआन मैं है कि-

हम क़यामत तक तुम पर ऐसे हाकिमों को मुक़र्रर करते रहेंगे जो तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें देंगे और ज़लील व रुसवा करेंगे। (कूरए एराफ़ आयात)। खुदा की तरफ से यह एलान किसी फ़रते वाहिद के लिऐ नहीं बल्कि पूरी क़ौम यहूद के लिऐ है। और तारीख़ भी गवाह है कि कभी इन्हें बख़ते नस्र ने तबह व बरबाद , मुल्क बदर किया कभी ईसाईयों ने ताराज किया और कभी मुसलमानों ने ज़लील व रुसवा किया और क़यामत तक यह क़ौम ज़लील व रुसवा होती रहेगी।

मौजूदा सदी में भीयह क़ौम जर्मनी के नाज़ियों के क़हर व ग़ज़ब का शिकार हो चुकी है। जिन्होंने इनके क़त्तलेआम के बाद इन्हें मुल्क बदर कर दिया था और यह अपनी जान बचाने की ग़रज़ सेदूसरे मुमालिक में मुन्तशिर हो गयी थी। मगर बरतानिया और अमरीका ने इनकी एक अलग रियासत बनाकर इस नाक़िस कौम को पिर मुसलमानों पर मुसल्लत कर दिया। और यह क़ौम फिर एक बार ख़दायी क़हरो ग़ज़ब का निशाना बनने के लिए मुसलमानों के ख़िलाफ़ फ़तना परदाज़ियों और महाज़ आराईयों के साथ शैतानियत के रास्तों पर गामज़न है।

जनाबे हारून की रेहलत

अल्लामा मजलिसी तहरीर फ़रमाते है कि जब जनाबे हारून की रेहलत का ज़माना क़रीब आया तो हज़रते मूसा एक दिन इन्हैं कोहेतूर की तरफ लेकर रवाना हुए। रास्ते में इन्हें आलीशान क़सर् मिला जिसकै दरवाज़ें घर एक खुशमुमां दरख़त था और इसमें एक पोशाक टंगी हुई थी जनाबे हारून से हज़रते मूसा ने फ़रमाया इसे पहन लीजिए।

चुनान्चे उन्होंने पहन लिया इसके बाद मूसा इन्हें लेकर इस क़स्र में दाख़िल हे तो देखा कि वहां एक तख़्त है जिस पर बेशक़ीमत मसनद पड़ी हुई और पूरा मकान मुशको अम्बर की खूशबू से मोअत्तर है। आपने हारून से फरमाया कि इस तख़त पर लेट जाइये। वह लेट गये और मलकुल मौत ने इनकी रूह क़ब्ज़ कर ली। और इसके बाद न वह दरख़त रहा न क़स्र रहा , न तख़्त रहा और न जनाबे हारुन रहे। ख़ुदा वन्दे आलम ने सबको आसमान पर उठा लिया।

वफ़ाते मूसा अ 0

अल्लामा मजलिसी फ़रमाते हैं कि मलकुल मौत जब मूसा के पास इनकी रुह क़ब्ज करने आये तो आपने इनसे पूछा ऐ मलकुल मौत क्यों आये हो कहा रुह क़ब्ज करने की ग़रज़ से हाज़िर हुआ हूं। फरमाया की किस जगह से रुह क़बज़ करोगे। कहा मुहं की तरफ से। आपने फरमाया कि इस मूंह से तो मैं आपने खुदा के साथ सलाम करता हूं। फरमाया पैरों से चलकर खुदासे बातें करने के लिए जाता हूं। कहा कानों से। फरमाया कि कानों से खुदा की आवाज सुनता हूं। कहा अच्छा तो फिर आंखों से रुह क़ब्ज़ कर लूं। फरमाया मैं आंखों से खुदा की रहमतों का नज़ारा करता रहता हूं। इसके बाद मलकुल मौत को खुदा का हुक्म हा कि वापस आ जाओ। और फरमाया कि मूसा जब अपनी मौत की ख्वाहिस करें तो इनके पास जाना।

चुनान्चे मलकुल मौत वापस गये और हज़रते मूसा ज़िन्दा रहे। यहां तक कि आपने जनाबे हारून के बाद जनाबे यूशा बिन नून को अपना जानसीन मुक़र्रर किया। फिर कुछ अरसे बाद एक दिन अपनी क़ौम से छिप कर एकऐसे मक़ाम पर गये जहां एक शख्स क़ब्र खोद रहा था। आपने भी कब्र की तैयारी में उनकी मद्द की और जब क़ब्र तैयार हो गयी तो इसमें लेट गये। आपका क़ब्र में लेटने था कि खुदावन्दे आलम नें आपनी नज़रों के सामने से तमाम हिजाबाद हटा दिये और इन तरजात को ज़ाहिर कर दिया जो इनके लिऐ उसने बेहिश्त में मुक़र्रर फ़रमाये थे। मूसा ने फरमाया परवरदिगार मुझे अपने पास बुलाले।

चुनान्चे मलकुल मौत को हुक्म हुआ फिर आप की रूह क़ब्ज़ कर ली गयी। इस शख़्स ने क़ब्र बन्द करदी और मूसा इसी क़ब्र में दपन हो गये। वह शख़्स दरहक़ीक़त एक फ़रिशता था। जो खुदा की तरफ से इस काम पर मामूर हुआ था। यही वजह है कि अहले किताब को मूसा की क़ब्र का निशान तक नहीं मालूम। वक़्ते वफ़ात आपकी उम्र 130 साल की थीं।