क़यामते सुग़रा

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क़यामते सुग़रा कैटिगिरी: इमाम मेहदी (अ)

क़यामते सुग़रा

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

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क़यामते सुग़रा

क़यामते सुग़रा

हिंदी

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

भविष्य में आने वाले लक्षणः

इन लक्षणों का स्मरण रखना अति आवश्यक है

1. शोएब इब्ने सालेह का निष्क्रमणः

यह महानुभाव अन्तिम काल में समरकन्द से उठेंगे और अत्यंत ही विशेष घटना , इनसे प्रकट होंगी। हदीसों के अध्ययन से विदित होता है कि यह वास्तव में सेनालायक है या तो सैय्यद हतनी की सेना के या फिर हज़रत हुज्जत की सेना आपके नियंत्रण में होगी अधिक सम्भावना यह है कि आप सैय्यद हसनी की सेना के सेनानायक होंगे।

टिप्पणीः

हमारी जानकारी के अनुसार अब तक इस नाम के किसी महानुभव ने निष्क्रमण नहीं किया।

2. औफ़ का निष्क्रमणः

यह मुसलमान व्यक्ति कोयत द्वीप से दमिश्क़ तक लोगों को अपने दृष्टिकोण पर आमंत्रित करते हुऐ और परिवर्तन लाते हुऐ पहुँजेंगे और वही पर उनकी हत्या कर दी जायेगी।

3. यमानी का निष्क्रमणः

यमन से एक अज्ञात व अप्रसिद्ध व्यक्ति विद्रोह करेगा जो यमन तथा उसके आस-पास मं आतंक का कारण होगा (कुछ का विचार है यह हो चुका तथा कुछ का कहना है कि निकट ऐसा होगा)

4. पश्चिमी मिस्त्र में निष्क्रमणः

पश्चिमी क्षेत्र का कोई व्यक्ति निष्क्रमण करके मिस्त्र आयेगा। वह शाम के आस-पास उसके निकटवर्ती क्षेत्र पर अधिकार प्राप्त करेगा।

टिप्पणीः यहाँ पश्चिम से यूरोप वालों का बोध नहीं बल्कि मिस्त्र के पश्चिमी क्षेत्र अबजज़ायर व मराकश इत्यादि हैं। सम्भवः इस क्षेत्र का कोई व्यक्ति मिस्त्र पहुँच कर इन्कलाब पैदा करेगा और फिर शाम के निकट प्रभुत्व स्थापित करेगा। मराकश व लीबिया के सम्बन्ध मिस्त्र पर प्रभावशील होंगे।

5. नफ्से ज़किया की हत्याः

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ 0) का कथह है कि रसूल के परिवारजनों मे से एक व्यक्ति की हताया होगी जो पवित्र आत्मा वाला होगा और उसकी काबे के निकट रुकन व मुक़ाम के निकट सऊदी अरब में हत्या की जायेगी उनका नाम मोहम्मद बिन हतन ज़किया होगा तथा आपने चह भी बताया कि नफ्से ज़किया की हत्या और इमाम मेहदी के प्रकट होने में 15 दिन से अधिक की दूरी नहीं है यह नफ्से ज़किया वास्तव में हज़रत इमाम मेहदी (अ 0) के प्रमुख सहाबियों में से एक महान पुरुष होंगे।

6. बनी अब्बास का मतभेदः

बनी अब्बास का जो वंश अन्तिम काल में शेष रहेगा या सत्तारुढ़ होगी उनमें परस्पर मतभेद हो जायेगा। यह पूर्व में हो चुका है तथा अब भी सम्भव है।

7. मस्जिदे कूफ़ा के पीछे सैय्यद सालेह की हत्याः

यह पवित्र आत्मा सैय्यद जिनका नाम नफ़्से ज़किया बताया गया है अन्य सतातर सत्तर सजाजनों साथ मस्जिदे कूफ़ा के पीछे क़त्ल किये जायेंगे यह घटना भी इमाम के प्रकटन से समीप होगी कुछ लोगों ने इससे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के क़त्ल किये जाने का अर्थ लिया है क्योंकि करबला कूफ़े के पश्चिम में है परन्तु वास्तविकता यह है कि सुफ़यानी के कूफ़े में आ जाने के पश्चात यह घटना घटेगी तथा उस समय जो हत्या होगी उसमें इन सज्जन की हत्या भी होगी।

8. महान आत्मा सैय्यद की मक्के में हत्याः

नफ़्से ज़किया के अतरिक्त एक अन्या सज्जन पुरुष मक्के में क़त्ल किये जायेंगे यह हाशमप वंश के सरदार होंगे।

9. मस्जिदे कूफ़ा की दीवार का नष्ट होनाः

कूफ़े का रकजभवन नष्ट हो जायेगा उसके साथ मस्जिदे कुफ़ा की दीवार भी ध्वस्त होगी यह पहले भी हो जुका है मगर दाबारा मरम्मत हूई है अतः भविष्य में भी इसकी सम्भावना है।

10. राम के द्वीप में ओला वृष्टिः

रोम द्वपप के क्षेत्र में आकाश से मुर्गी के अन्डे के समान ओलों की वर्षा होगी जिससे उक्त क्षेत्र के निवासी आश्चर्यचकित होंगे (अनेकों बार ऐसा हुआ है)

11. विचित्र दुमदार सिताराः

पूर्व की दिशा मे आकाश पर ऐसा तारा उदर होगा जिसका प्रकाश चन्द्रमा के समान होगा। यह तारा पुच्छल होगा और धीरे-धीरे इसकी दुम सिकुडना आरम्भ होगी फिर यह लुप्त हो जायेगा (पुच्छल तारे बहुधा उदित होते हैं परन्तु जैसे प्रकाश की बात पर विचार योग्य है)

12. पृथ्वी व आकाश के मध्य अग्नि ही अग्निः

आकाश व पृथ्वी के मध्य आग इस प्रकार प्रज्वालितहै जायेगी कि लोग उसे देखकर कित रह जायेगे यह आग 3 या 7 दिन तक प्रज्वलित रहेगी। यह आग उत्पन्न करने वाले पदार्थों का प्रयोग हो।

13. आकाश में लालीः

उपरोक्त से मिलता जुलता दूसरा लक्षण है आकाश के चारों और तीव्र लाली का दिखाई पड़ना और उसका आकाश पर यू व्याप्त होना जैसे कि सम्पूर्ण आकाश पर छा जायेगी।

14. आग ही आग

विश्व में साधारणतयः तथा विशेष रूप से पूर्व मध्य में ऐसी आग प्रकट होगी जिसको देख कर समस्त स्त्री पुरुष भयभीत हो जायेंगें तथा अपने पापों से लज्जित होकर काँपने लगेंगे।

15. अरबों का निरंकुश होनाः

समस्त अरब देश की दशा यह हो जायेगी कि बिना किसी ध्यये के और सोच विचार के जो चाहेंगे करेंगे इनका कोई पूछना वाला नहो (जैसा कि आजकल हो रहा है)

16. ईरान में साम्राज्यवाद का समापनः

ईरान के राजाओं का वैभव और शक्त पतन शीघ्र हो तथा साम्राज्यवाल ही समाप्त हो जाये (बल्कि कोई अन्य शासन तन्त्र सत्ता में आ जाये)

17. मिस्त्र के अमीर की हत्याः

मिस्त्र का अमीर जो बडी शक्ति एंव वैभव प्राप्त कर चुका होगा की हत्या कर दी जायेगी।

टिप्पणीः

यहाँ सुल्तान या मुल्क का शब्द प्रयुक्त न करके अमीर का शब्द प्रयुक्त किया गया है तात्पर्य यह है कि अन्तिम समय में राजतंत्र न होकर मिस्त्र में प्रजातंत्र या अन्य किसी प्रकार अमीरी का पद प्राप्त किया जायेगा तथा फिर वह अमीर क़त्ल किया जायेगा।

18. शाम में झंडों का एकत्रीकरणः

शाम में दो झन्डे मिस्त्र की ओर से एंव एक खुरासान की और से आयेगा और तीनों झंडों के स्वामी शाम का शासन प्राप्त करना चाहेंगे इसी कारण इनके मध्य परस्पर युद्ध व रक्तचाप होगा फलस्वरुप शाम का अधिक क्षेत्र नष्ट हो जायेगा।

19. पश्चिमी आरोहियों का दमिश्क़ में प्रवेशः

दमिश़्क के पश्चिम की ओर से आये आरोहीगण (सवारों) दमिश्क़ व अरब द्वीप में प्रवेश करेगें एंव वहाँ अपना प्रभुत्व स्थापित करेंगे (यहाँ दमिश्क़ से पश्चिमी क्षेत्र से तुर्की का अभिप्राय है इससे सम्भवता पश्चिम वालों का बोध है)

20. खुरासान से काले झन्डों का स्पंदन (गति)

ख़ुरासन से कुछ आरोही काले झण्डे लेकर निकल आयेंगे और उनके द्वारा विशेष घटनाँए घटित होंगी। (सम्भव है इसमें सैय्यद हसनी के सैने के झण्डों का सोकेत हो जिनके विषय में हम पूर्व में लिख चुके हैं)

21. शत्ते फ़रात में नई नहरः

फ़रात नदी से नयी नहर निकाली जाये जो बहती हुई कूफ़ा की गलियो तक आ जाये उस समय पुनः कूफ़ा बस कर विस्तृत हो जाय (यह लक्षण धीरे-धीरे पूरा हो रहा है)

22. साठ झूठे नबीः

साठ झूठे दुराचारी पापी व्यक्ति नबी होने का दावा करेंगे उनमें से अधिकतर अपने जादै द्वारा अन्धविश्वासियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेंगे (अब तक की खोज के अनुसार 58 व्यक्ति दावा कर चुके हैं)

23. बारह झूठे सैय्यदः

ऐसे बारह सैय्यद जो अपने को हज़रत अबूतालितब (अ 0) के वंशज हों झूठा इमामत उत्तराधिकारी प्रतिनिधित्व व सेय्यदीयत का वाद (दावा) करें (इनमें से भी अधिकतर हो चुके है। कुछ शेष हैं कराची में एक साहब है जो स्वंच को अबूतालिब रज़ा लुक़मान कहते हैं)

24. महानुभाव पुरुष आग की लपटों मेः

बनी अब्बास का कोई महान पुरुष जलौला और ख़ानेकीन के मध्य जलाया जायेगा (संभव है ये संकेत अब्दुस्सलाम आरिफ़ की तरफ़ हो जो वायुमान की दुर्घटना में इसी स्थान पर जलकर हताहत हुऐ थे।

25. दजला नदी पर एक नया पुलः

बगदाद में मुहल्ला करख़ की और दजला नदी पर नये पुल निर्माण हो।

टिप्पणीः

यह पुल आभी कुछ वर्ष पूर्व पूर्ण हुआ है सम्भव है कोई अन्य पुल भी बनाया जाये।

26. बगदाद का पतनः

प्रथम दिन बग़दाद में तीव्र भूकम्प आये जिससे बड़ी जनसंख्या समाप्त हो जाये और इस घटना से समस्त ईराक़ निवासी व्याकुल हो जाये तथा दोपहर को कालप आँधी यलहै हगे (नयी नयी यातनाओं का प्रर्दशन) संम्भद है ऐसा पूर्व में हो चुका हो एंव अब भी इसका विश्वास है।

27. बसरा का डूब जानाः

कोई एक समूह पहले बसरे में धरती में धंस जाये तत्पश्चात नदी में ऐसी बाढ़ आये कि बसरा डूब जाये (नहजुल बलाग़ा में हज़रत अली ने विस्तार पूर्वक मसरे को डूबने को बताया है)

28. ताऊन महामारी का रूप धार लेः

साधारणतया सारे संसार में ताईम महामारी के रूप में फैल जाये और विनाश कर दै इससे अत्यधिक मृत्यु होगी और इस प्रकार भी एक बड़ी जनसंख्या ताईन की भेट चढ़ जाये (इसकी अब भी संभावना है)।

29. टिड्डियों की अधिकताः

संसार में टिड्डियाँ इस अधिकता से प्रकट हो कि इससे पूर्व कभी न देखी गयी हो।

30. ईरान में युद्धः-

साधारण समस्त संसार में रक्तपात व हत्या का बाज़ार गर्म हो जाये और दुनिया भर में आतंक उत्पन्न हो जाये विशेष रुप से (अजम) ईरान के दो समूहों मे इस प्रकार का युद्ध आरम्भ हो कि लगभग अस्सी हज़ार व्यक्ति हताहत हों।

31. मनुष्य रुप भ्रष्ट होकर बंदर व सुअर हो जायेः

संसार के कुछ क्षेत्रों में कुछ समूह तथा व्यक्ति बंदर एंव सूअर के आकार में रुपभ्रष्ट कर दिये जायें।

32. सूर्य के निकट मनुष्य का हाथ (मुख्य)

सूर्य के निकट संसार वालों को एक हाथ दिखाई पडेगा जो अधिक समय तक उसी प्रकार विद्यमान रहेगा जिसे देखकर दुनिया वाले आश्चर्य चकित हो जायें किन्तु उसका कारण न समझ सकें (ये भी प्रकट होने के अति निकट का लक्षण है)।

33. 24 दिन तक निरंतर जलवृष्टिः

प्रवृत्ति के विपरित निरंतर जलवृष्टि इस प्रकार हो कि जमादि उस्सानी मास की 16 वीं तिथि से प्रारम्भ होकर रजम मास की 10 वीं तिथि तक जारी रहे। ऐसी वर्षा हो कि इससे पूर्व संसार वालों ने कभी न देखी हो (कुछ कथनों से ज्ञात होता है कि यह समय भी प्रकट होने के लक्षणों में से है)

34. मुर्दों का जिंदा होनाः

कुछ ऐसे व्यक्ति जिनकी मृत्यु हो चुकी है। पुनः जीवित किये जायें (ये भी प्रकट होने के निकट तथा प्रकट होने पर होगा कुछ पुस्तकों में जीवित होने वालों के नाम दर्शायें गये हैं।)

35. मस्जिदों की स्वर्णकारी तथा कुरान का सुनहरे तारों से लिखा जानाः

मस्जिदों में सुनहरा काम किया जाये तथा स्वर्णकारी से उन्हें शोभायमान किया जाये और कुरान को सुनहरे तारों से लिखवाया जाये (जैसा कि आजकल हो रहा है)।

36. तीन क्षेत्र धरती में धंस जायेः

संसार के तीन क्षेत्र इस क्रम से जनसंख्या सहित धरती में धंस जाये कि पहले पूर्वी भाग़ फिर पश्चिमी भाग और फिर अरब द्वीप में।

37. नास्तिक का अधिपत्यः

समस्त संसार में विशेष रुप से मुसलमानों में नास्तिकता फैल जाये और समस्त इसलामी देशों में विश्वास सभ्यता – संस्कृति समाजिकता के अधार पर नास्तिकता का अनुकरण होने लगे और मुसलमान अपनी आवश्यकता हैतु नास्तिकों एंव विरोधियों पर आश्रित हो जाये। और ऐसे देशों की मित्रता पर गर्व व्यक्त करें जो ईश्वर को नकारने वाले हों (क्या आजकब ऐसा नहीं हो रहा है)

38. इसलाम धर्म जर्जर हो जायेगा

इसलाम धर्म ईतना दुर्बल व जर्जर हो जाये कि मात्र इसलाम का नाम ही शेष रह जाये और इसलामी रितियाँ समाप्त हो जायें। नास्तिकता और इसलाम परस्पर इस प्रकार से एक में घुल-मिल जायें कि नास्तिको एंव मुसलमानों में अन्तर कठिन हो जाये लोग तीव्रता से विश्वास बदलने लगें।

39. बनी हाशिम का बालक शासकः

हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने एक कविता में इस लक्षण की और संकेत करते हुए कहा है कि संसार से बनी हाशिम का शासन समाप्त हो जायेगा और अंत में एक ऐसे बालक पर उसका समापन होगा जो स्वंय अनुभवहीन दूसरों की राय , दया व कृपा पर जीवन बिताने वाला होगा उसके बाद फिर कोई राज्य बनी हाशिम का संसार में शेष न रहेंगा। (इस समय सम्पूर्ण संसार में उरदुन के राज्य के अतिरिक्त अन्य किसी स्थान पर बनी हाशिम का शासन शेष नहीं है) हाँ सम्भव है वर्तमान शाह के बाद जो सम्राट हो उसमें ये गुण पूरे उतरें भगवान ही जाने। कविता की कल पंक्तियाँ आगे लिखी जायेगी।

40. शताब्दी के अंतिम तीस वर्ष

जिस शताब्दी की समाप्ति पर हज़रत मेहदी प्रकट होंगे अर्थात अंतिम तीस ( 30) वर्ष सत्तर ( 70) से सौ ( 100) अद्भुत होंगे उन तीस वर्षों के मध्य संसार में अनुठी परिस्थितियाँ विद्यमान होंगी जिनको भगवान के अतरिक्त कोई नहीं जानता।

टिप्पणीः

यदि वर्तमान शताब्दी के 1370 से हम आज तक देखें तो विचार व चिंतन के उपरान्त चकित हो जायें कि संसार इतने समय में क्या से क्या हो गया और और अभी इस शताब्दी के कुछ वर्ष शेष हैं जिसमें न जाने क्या-क्या हो जायेगा।

41. तुर्कों का द्वीप में उतरना (मुख्य)

हदीसों में शब्द तुर्क स्वतंत्र प्रयोग हुआ है तथा शब्द जज़ीरा भी स्वतंत्र प्रयोग हुआ है किन्तु हदीसों के अध्ययन के क्रम एंव अवलोकन से ज्ञात होता है कि शब्द तुर्क से रुस वालों का बोध है और शब्द जज़ीरा से अरब द्वीप का तात्पर्य है। मैं पुस्तक के अंत में प्रमाण स्वरुप कुछ हदीसों का उल्लेख करुँगा परन्तु ये लक्षण अत्यंत मुख्य है। तात्पर्य ये है कि रुस वाले अरब देश में प्रवेश करेंगे चूंकि कथह में नुजूल का शब्द प्रयोग हुआ है अतः इसका अर्थ ज़ोर ज़बरदस्ती के भी है एंव मूल मित्रता के आधार पर भी हो सकती है और इन तुर्कों का क्षेत्र में उतरना वास्तव में आतंक व अत्याचार के प्रारम्भ होने का लक्षण है कुछ हदीसों में इन तुर्कों की विशेषतायें भी उल्लेखित हैं (यह लक्षण इस समय पूर्ण रुप से प्रकट हो रहा है) आज कब रुस अपना प्रभाव बढ़ाता जा रहा है और अरम बिल्कुल उसकी शरण में आता जा रहा है विस्तार बाल में प्रस्तुत होगा वास्तव में वह काल प्रारम्भ हो चुका है जिसकी सूचना दी जा चुकी है और इससे पूर्व यह क्रम कभी पूर्ण नहीं हुआ अतः आवश्यक है कि अब दुनिया वाले सचेत हो जायें क्योंकि लक्षणों का श्रीगणेश हो चुका है और वह आतंक काल निकट हो चुका है जिससे अरब का कोई घर सुरक्षित न रहेगा।

42. रोम वालों का रमला में उतरना

(मुख्यतः मुख) या (अंग्रेजों का फिलिस्तीन में आ जाना) रोम वालों से अर्थ अंग्रेज़ है अर्थात सैर-ए-रोम के प्रारम्भ और हदीसों की व्याख्या से विदित है कि रोम वालों से अंग्रेजों का बोध है तथा रमला फिलिस्तीन के क्षेत्र में है अतः इस लक्षण से स्पष्ट हो रहा है कि जिस प्रकार पूर्न लक्षण में ये बताया गया है कि अरब द्वीप में रुस वाले घुस जायेंगे और वास्तव में इल दोनों शक्तियों के इस क्षेत्र में आ जाने से विपत्तियों और उपद्रवका आरम्भ होगा (ये लक्षण इस समय बिल्कुल स्पष्ट है यही आतंकवाद प्रारम्भ होने की सूचना है इसके बाद जो कुछ होगा उसकी सूचनायें अनेकों हदीसों में उपलब्ध है)

43. सम्मानित महापुरुष का डूबनाः

बनी अब्बास का कोई महापुरुष दजला नदी में बग़दाद के किनारे मुहल्ला कर्ख़ की और जहाँ आजकल नया पुल बना है डूब जायेगा (ये लक्षण अभी पूर्ण नहीं हुआ)

44. जाबिया मुहल्ले का धरती में धंस जानाः

शाम क्षेत्र में दमिश्क के निकट एक देहात जिसका नाम जाबिया बताया गया है , जमीन में धंस जायेगा।

टिप्पणीः पुराने भूगोल में इस स्थान का पता चलता है और इस समय तक दमिश्क़ में जाबिया द्वार उपलब्ध है जो उस देहात की दिशा बतातात है।

45. सावा नदी में पानीः

ईरान में कुम नगर के निकट साबा नदी में पुनः पानी का दिखाई पड़ना (ये नदी हुजूर के जन्म के समय शुष्क हो गयी थी) पुनः इसमें पानी उत्पन्न हो रहा है मासुमये कुम के दर्शन करने वाले लोग इस की पुष्टि करेंगे।

46. स्त्रियों एंव बालकों का शासनः

संसार के बहुधा स्थानों में स्त्रियों व बालक जो ज्ञान की दृष्टि से कम सूझ बूझ वाले हैं शासक हो जायेंगे जैसा कि आजकल हो रहा है।

47. प्रशासन में परिवर्तनः

प्रशासक स्वतंत्र न होंगे बल्कि जनतंत्र के आधार पर राज्य स्थापित होंगे और साम्राज्यवाद शनैःशनै सम्पूर्ण संसार से समाप्त हो जायेगा।

48.लम्बवत आकार मे आग

तीन दिन तक प्रथ्वी व आकाश के मध्य लालीमा दिखाई देगी जो संसार के लोगो के लिऐ आश्चर्य का कारण हो विशेषताः पूर्व मध्य के लिऐ।

49. सउदी अरब व अन्य अरब देश

क्षेत्रों के मध्य एक ऐसी जाति उत्पन्न हो जाये जो भगवान को नकारे (सम्भवतः इससे तात्पर्य रुस व चीन वाले हैं) रुस वाले प्रवेश कर चुके हैं (इराक़ आदि साक्ष्य)

50. चीन वालों का अरब में प्रवेशः

बिल्कुल अंत में अरब द्वीप में चीनियों का प्रवेश है तथा उनका प्रवेश महायुद्ध व विनाश की पृष्ठभूमि है उनके प्रवेश के उपरान्त इस प्रकार से नरसंहार होगा जो व्याख्या से परे है (विस्तार का मूल लेखों में वर्णन होगा)।

51. आज़रबाईजान से उपद्रव आरम्भ होनाः

आज़रबाईजान और आरमीनिया से एक उपद्रव आरम्भ होगा तथा उसका कोलाहल व निनाद , वहाँ से लाल पर्वत की ओर बढेगा जहाँ बड़ी घटना घटित होगी जो इतनी भयानक होगी कि बच्चे भय से बूढ़े हो जायेंगे , बूढ़े मृत्यु के समीप हो जायेंगे फिर ये उपद्रव मधय ईराक़ तथा वहाँ से कूफ़े तक पहुँच जायेगा जहाँ घोर युद्ध होगा) नजफ अशरफ के निकट तीव्र युद्ध होगा जिसे सोचकर दिल घबराता है। रै नगर अर्थात तेहरान के निकट भी घोर युद्ध होगा।

52. संतान की हत्याः

माता पिता अनेकों प्रकार के भय के फलस्वरुप स्वंय अपनी संतानों की हत्या करने लगेंगे या संतानोतपत्ति में बाधक होंगे इसके अतिरिक्त अन्य लक्षण मूल अरबी लेख में है जो सब मुख्य और विचारणीय हैं। सम्भव है मनन व चिंताकर्ताओं के ह्रदय उनके अध्ययन से उनकी सार्थकता से प्रेरित हो जायें फलस्वरुप अपने आचरण व व्यवहार में सुधारोपरान्त वह हज़रत हुज्जत के सहायकों में सम्मिलित हो सकें।