अमर शौर्यगाथा

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अमर शौर्यगाथा कैटिगिरी: इमाम हुसैन (अ)

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अमर शौर्यगाथा

अमर शौर्यगाथा

हिंदी

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

अमर शौर्यगाथा

अलहसनैन इस्लामी नैटवर्क

इमाम हुसैन की ज़रीह

सन साठ हिजरी क़मरी है। कुछ ही दिन पहले अपने पिता मुआविया की मुत्यु के बाद यज़ीद विस्तृत सीमाओं वाले इस्लामी जगत की बागडोर पर क़ब्ज़ा जमा चुका है।

वह शराब के नशे में धुत है और ठहाके लगा रहा है किंतु उसकी आंखों से भय व चिन्ता के भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उ

से याद आ रहा है कि उसके पिता मुआविया ने उसे चार व्यक्तियों की ओर से सचेत रहने को कहा था।

मुआविया ने यह भी कहा था कि तीन व्यक्तियों को धोखे ,धौंस-धमकी या फिर उच्च पद की लालच देकर मार्ग से हटाया जा सकता है परंतु पैग़म्बरे इस्लाम के नाती और

अली अलैहिस्सलाम के पुत्र हुसैन के साथ यह सब नहीं किया जा सकता क्योंकि उनका पालन-पोषण पैग़म्बरे इस्लाम की छत्रछाया में हुआ है।

वे महान चरित्र और श्रेष्ठ प्रवृत्ति के लिए सर्वप्रसिद्ध हैं।