जनाबे फिज़्ज़ा

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जनाबे फिज़्ज़ा लेखक:
कैटिगिरी: मुसलमान बुध्दिजीवी

जनाबे फिज़्ज़ा

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

लेखक: जनाब राहत हुसेैन नासरी
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जनाबे फिज़्ज़ा

जनाबे फिज़्ज़ा

लेखक:
हिंदी

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

जनाबेफ़िज़्ज़ा

(संग्रहकर्ताः राहत हुसैन नासिरी)

(रूपान्तरणकर्ताः हैदर महदी (एम0 ए0)

अलहसनैन इस्लामी नैटवर्क

इन्तेसाब (समर्पण)

मैं अपनी इस संक्षिप्त धार्मिक सेवा को अपनी प्रीतम स्वर्गीय भावज, पत्नी, आदरणीय भाई मुस्तफ़ा अली खाँ साहब के नाम समर्पित करता हूँ। जिन्होंने सही मानों में जनाबे फ़िज़्ज़ा का सम्पूर्ण अनुसरण करते हुए मोहब्बते अहलेबैते अतहार (अ.स) में अपनी पूरी आयु लगा दी और आख़िरे वक़्त तक ज़िक्रे हुसैन मज़लूम (अ.स) का वज़ीफ़ा क़ायम रखा और जिनके दाग़े जुदाई ने दिल में वह ज़ख़्म डाला है जो मरते समय तक भर नहीं सकता और इस दीनी तहदिये का सवाब उनकी आत्मा को बख़्शता हूँ और मौला ए कायनात (अ.स) की ख़िदमत में दस्त बस्ता अर्ज़ करता हूँ कि इस मुख़्तसर दीनी ख़िदमत को शरफ़े क़ुबूलियत अता फ़रमायें और परवरदिगार से दुआ है कि इसका सवाब स्वर्गवासिनी की आत्मा को प्रदान करता रहे। आमीन

अहक़रूल एबाद (तुच्छ)

राहत हुसैन नासिरी

प्रकाशक प्रस्तुत

अहलेबैते अतहार (अ.स) विशेषकर सैय्येदतुन निसाइल आलामीन हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ.स) और हसनैन (अ.स) की सेविका के सौभाग्य से गौरान्वित होने वाली आदरणीय स्त्री जनाबे फ़िज़्ज़ा का चरित्र हालात और घटनाओं की रौशनी में यह संक्षिप्त पुस्तिका पाकिस्तानी सात्यकार जनाब "राहत हुसैन नासिरी" के क़लमी प्रयतनों का सफ़ल और उत्तम परिणाम है, जिसका उर्दू संस्करण हमारे इदारे से पहले ही प्रकाशित हो चुका है और अब हिन्दी वर्ग के निरन्तर आग्रह और लगातार तक़ाज़ो के अर्न्तगत हमारा इदारा इस पुस्तिका का हिन्दी अनुवाद भी प्रकाशित करने का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है जिसे "हैदर महदी" सल्लामहू ने अंजाम दिया है।

इस पुस्तिका का उपादेयता यह है कि इसमें जनाबे फ़िज़्ज़ा क बारगाहे रिसालत में आगमन क़ुबूले इस्लाम हुलिया ए मुबारक रसूल (स0 अ0) की प्रीयतम पुत्री की सेवा का सौभाग्य, आराधना एवं पूजा अर्चना, ज़ोहद व तक़वा, दुआ व करामात कीमियासाज़ी (सोना बनाने की विधा) और फ़ातिमा ज़हरा (अ.स) के देहांत से कर्बला, कूफ़ा और शाम की मंज़िल तक जान लेवा और धैर्य एवं सहनशीलता का संक्षिप्त प्रतिबिंब इस अंदाज़ से प्रस्तुत किया गया है कि पाठकगण को वाक्य और लेख कला में तृष्णा का अनुभव नहीं होता।

हमें आशा है कि हिन्दी दां (हिन्दी नोइंग ग्रुप) भी जनाबे फ़िज़्ज़ा के चरित्र एंव आचरण व हालात से परिचित होंगे।

ईश्वर इस प्रस्तुति को स्वीकारने का सौभाग्य प्रदान करें।

अहकरूल एबाद – (तुच्छ)

सै0 अली अब्बास तबातबाई