सामाजिकता

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सामाजिकता लेखक:
: मौलाना सैय्यद एजाज़ हुसैन मूसावी
कैटिगिरी: परिवार व समाज

सामाजिकता

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

लेखक: उस्ताद हुसैन अंसारीयान
: मौलाना सैय्यद एजाज़ हुसैन मूसावी
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सामाजिकता

सामाजिकता

लेखक:
हिंदी

यह किताब अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क की तरफ से संशोधित की गई है।.

सामाजिकता

उस्ताद हुसैन अंसारीयान (दामत बरकातुहु)

अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम

किताब: सामाजिकता

लेखन: उस्ताद हुसैन अंसारीयान (दामत बरकातुहु)

अनुवादन: सैयद एजाज़ हुसैन मूसवी

संशोधन: सैयद क़मर ग़ाज़ी ज़ैदी

सैयद ताजदार हुसैन ज़ैदी

विषयसूची

सामाजिकता 1

विषयसूची 3

प्रस्तावना (लेखक) 13

प्रस्तावना (अनुवादक) 17

इस्लाम सम्पूर्ण और अविनाशी विधान 19

ईश्वर को केवल इस्लाम धर्म स्वीकार्य है 23

इस्लाम सारे संसार का धर्म है 24

सामाजिकता इस्लाम की दृष्टि में 25

सामाजिकता का महत्व 26

सामाजिकता सृष्टि के नियम के अनुरूप है 26

सृष्टि का मेलजोल एवं मैत्री 28

पक्षियों के पंख और मनुष्य का जीवन 29

पानी और ताप 30

वायु और वर्षा 31

कुकुरमुत्ता और जलबक 33

घास और जानवर 34

इंसानी शरीर 38

सामाजिकता की आवश्यकता 38

इस्लाम में सामाजिकता 40

सामाजिकता के दो पहलू 41

प्रभावित होना और प्रभावित करना 45

सही प्रभाव स्वीकार करने का उदाहरण 49

मार्गदर्शन के लिये साथ रहना 53

नैशापूर में लेखक के साथ घटने वाली आश्चर्य जनक घटना 56

प्रेमी पर प्रेम पात्र का प्रभाव 64

पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके अहलेबैत (अ) से प्रभावित होना 67

वफ़ादार दोस्त 70

इमामे सादिक़ (अ) का पड़ोसी 73

सच्ची दोस्ती का महत्व 75

अच्छाई को पहचानने की कसौटी 76

रोग निवारण नुस्ख़ा 78

दोस्ती के कारण 79

दोस्ती में पहचान प्रतिभा की आवश्यकता 83

सामाजिकता और महाप्रलय 85

सामाजिक वास्तविकता से कटने का परिणाम 87

पवित्र एवं अपवित्र साथी 89

महान दायित्व 89

दोस्त रूपी दुश्मन की निशानियां 93

उक़बा बिन अबी मुईत की खेदजनक कथा 95

ग़लत संगत आत्मा के लिये दर्दनाक सज़ा 99

दिल व दिमाग़ पर होने वाले अत्याचार की दुहाई 101

आयतों व हदीसों की चेतावनी 104

भटके हुए लोगों से सामाजिकता का मना होना 111

नादान लोगों की संगत व दोस्ती से बचना 114

ग़लत लोगों की संगत 116

अच्छा और पवित्र साथी 118

सबसे बड़ी नेकी 120

अच्छे लोगों के साथ दोस्ती का महत्व 120

अच्छा साथी , माहिर बाग़बान 124

सही दोस्ती के साथ दुनिया और आख़ेरत का सौभाग्य 127

हज़रत अली (अ) की दृष्टि में पवित्र मित्र 129

नबियों का साथ 130

अध्यात्म की बुनियाद पर चयन 130

फ़िरऔन की पत्नी आसिया 133

हबीबे नज्जार (बढ़ई) 137

अमीरुल मोमिनीन (अ) की नबियों के साथ सामाजिकता 138

इमाम हुसैन (अ) नबियों की सिफ़तों का आईना 141

पवित्र क़ुरआन का साथ 144

दुनिया और आख़ेरत की भलाई से लाभ उठाना 145

वास्तविक सभ्यता और झूठी संस्कृति 153

आज की सभ्यता 155

इंसान अल्लाह के संदेश (वही) का भूखा 163

पवित्र क़ुरआन का मार्ग दर्शन 164

सोच विचार पर उभारना 167

पवित्र क़ुरआन का इतिहास लेखन 168

पवित्र क़ुरआन में अच्छे लोग 170

ज़ालिमों को सज़ा और नेकों को पुन्य 173

पवित्र क़ुरआन में महाप्रलय 175

पवित्र क़ुरआन के पाले हुए 178

अहले बैत अलैहिमुस सलाम के साथ सामाजिकता 182

बेहतरीन दोस्त 182

अहले बैत अलैहिमुस सलाम के साथ दोस्ती व सामाजिकता के लक्षण 187

अंधकारमय मौत से निजात 187

कश्ति ए निजात के ज़रिये निजात 189

इंसानियत के कमाल तक पहुचना 192

दो सच्चे व वास्तविक मित्र 197

हज़रत इमाम अली अलैहिस सलाम और निर्धन व्यक्ति 202

हज़रत इमाम अली रज़ा अलैहिस सलाम की कृपा 204

ज़ुहैर बिन क़ैन बजली 206

बहादुरी की मेराज 208

इंसानी और ईश्वरीय मित्र की बुलंदी 211

इश्क़ की राह में पाकदामनी 212

अच्छाईयों से इश्क़ की महानता 215

ज़ालिमों को मुंहतोड़ जवाब 220

जन्नती आचरण और जन्नती घराना 225

पैग़म्बरे अकरम (स) उवैसे क़रनी का अध्यात्मिक जुड़ाव 229

तैमूर लंग का नसीहत लेना 232

अमीर अब्दुल्लाह ख़लजिस्तानी 233

पवित्र जीवन का परिलेख 235

सच्चे दोस्त के बारे में सुन्दर मिसाल 239

पहाड़ की बुलंदी पर झरना 244

बुद्धिमान लुक़मान और अदुभुत सामाजिक 249

मुक़द्दसे अरदबेली से अध्यात्मिक जुड़ाव 251

वहीदे बहबहानी से अध्यात्मिक जुड़ाव 253

दोस्ती और सामजिकता के अधिकार 255

सामाजिकता पर इमाम सादिक़ अलैहिस सलाम का दृष्टिकोण 258

सामाजिकता (मुआशेरत) ख़राब होने का कारण 265

धोखा व फ़रेब 265

चुग़लखोरी 266

ग़ीबत 268

आरोप और इल्ज़ाम लगाना 270

मुनाफ़ेक़त 271

बदला और इन्तेक़ाम 272

उलझना और झगड़ना 274

दर्दों की दवा 275

बुतून (पेट) का हराम से ख़ाली होना 275

खाने में भूख और संतुलन का ध्यान रखना 281

आधी रात को तहज्जुद और इबादत 283

सभ्य और योग्य लोगों के साथ उठना बैठना। 290

जुदाई तौबा के स्वीकार होने का कारण 294

सामाजिकता के बेहतरीन नमूने 299

ख़ुदा के लिये सब्र करना 299

इंसानीयत की मेराज 300

प्रगति और कमाल तक पहुचने के लिये इल्म हासिल करना 304

मिरज़ा जवाद मलेकी एक संपूर्ण अंतरयामी और भक्ती में लीन विद्धान 308

इरफ़ान व अध्यात्म की बुलंदियों को तय करने वाले आयतुल्लाह काज़ी 311

आत्मा की महानता व स्वतंत्रता 315

बेमिसाल ज़ोहद व तक़वा 320

मुल्ला अब्बास के पत्रों से तर्बरुक हासिल करना 324

अच्छाईयों और नेकियों का आगमन 326

नूर का जलवा 327

बेदीनी के तूफ़ान में धर्म की रक्षा 330

बेहतरीन शिक्षक और माँ 336

शिक्षक का महान दायित्व 338

दोस्ती की ज़रुरत 338

बेहतरीन शिक्षक इंसानी जीवन के बेहतरीन बाग़बान 340

पौधे और बीज के गुणों की पूर्ण जानकारी होना। 340

उन्नति व प्रगति के लिये रास्ते को समतल बनाना। 341

उन्नति व प्रगति के लिये ज़रुरी मदद 341

बढ़ते पौधों की लगातार देखभाल 342

शिक्षक और इंसानी जीवन की पाँच श्रेणियां 347

शिक्षक और इंसानी जीवन की पाँच श्रेणियां 349

पहला पड़ाव (खेलकूद) 352

बचपन के खेल 352

बच्चों को स्वतंत्र छोड़ देना 354

सीख लेने योग्य घटना 355

दूसरा पड़ाव , मनोरंजन 357

फ़ुर्सत के समय 358

बुद्धि , बुरे स्वभाव की संरक्षक 359

विचारों की गुमराही 361

झिंझोड़ देने वाली कथा 364

तीसरा भाग: ज़ीनत (सजना संवरना) 365

जवानों की शिक्षा व प्रशिक्षण 366

अदृश्य ख़तरा 368

शिष्टाचार सिखाना 369

कलयुग में प्रशिक्षण 370

प्रशिक्षण का दौर 371

औलाद का अधिकार 372

मां बाप की लापरवाही पर बच्चों की ज़िम्मेदारी 373

वैभव (सजना संवरना) जैसी बीमारी का इलाज 374

चौथा पड़ाव , घमंड व बड़ाई 375

शक्ति एवं प्रभाव बढ़ाने की बीमारी का इलाज 375

उचित अभिमान व सत्कार 377

पाचवां पड़ाव माल की अधिकता 378

प्रस्तावना (लेखक)

आर्कषित होना और आकर्षित करना , प्रभावित होना और प्रभावित करना ऐसी वास्तविकता है जो इस संसार के लगभग सभी प्राणी वर्ग में पाई जाती है।

अगर ऐसा नही होता तो दुनिया में हर चीज़ जोड़ा नही होती और इसके कारण संसार में जो बेहतरीन प्रभाव पाये जाते हैं या जितनी बड़ी और जिस पैमाने पर प्रगतियां हो रही है संभवत वह न होतीं।

सूरज अपनी ताक़त के ज़रिये ज़मीन पर प्रभाव डालता है। ज़मीन सूरज की किरनों के प्रभाव से गर्मी प्राप्त करके और दूसरी अन्य चीज़ों की सहायता से विभिन्न प्रकार पेड़ , पौधे , अनाज , घास , फूल , खनिज और क़ीमती पदार्थ पैदा करती है।

अगर मिट्टी के कणों में प्रभावित करने की शक्ती न होती तो बहुत सी चीज़ों का कोई प्रभाव नही होता। जैसे खान पान आहार , दवायें , विभिन्न प्रकार के कपड़े , पानी , हवा , सर्दी और गर्मी में भिन्न भिन्न प्रकार के प्रभाव पाये जाते हैं जिन्हे ज़िन्दा जीव स्वीकार करते हैं और उन प्रभाव को अपने वुजूद से जोड़ा बनाते हैं और इसी तरह से प्रगति व उन्नती करके अपना जीवन व्यतीत करते रहते हैं।

संसार के समस्त प्राणियों में मनुष्य के अंदर सबसे ज़्यादा प्रभावित होने और प्रभावित करने की क्षमता पाई जाती है। यहां तक कि इंसान अपने इस जीवन के बाद की दुनिया की सफ़लता व असफ़लता भी इसी चीज़ के ज़रिये से अर्जित करता है।

यह इंसान जिस में पाये जाने वाले सकारात्मक प्रभाव , प्रशिक्षण , मार्गदर्शन और ज्ञान की वास्तविकताएं , जो वह अपने प्रभाव से दूसरों तक पहुचाता है और उन्हे प्रभावित करता है। निसंदेह वह इस महान समाज सेवा के माध्यम से अपनी दुनिया व परलोक में मिलने वाले पुरस्कार को सुरक्षित कर लेता है और जो इंसान भी ऐसे स्रोत से मिलने वाले प्रभाव को स्वीकार करता है और ऐसे प्रशिक्षण , मार्गदर्शन और ज्ञान की वास्तविकताओं से ख़ुद का संवारता है तो बेशक वह अपनी दुनिया व परलोक की ख़ुश क़िस्मती को प्राप्त कर लेता है।

सामाजिकता , मित्रता , दोस्ती व संगत एक ऐसी हक़ीक़त है जो प्रभाव डालने और प्रभाव स्वीकार करने के मामले में बहुत महत्वपूर्ण और शक्तीशाली है , इतनी ज़्यादा कि इंसान के जीवन में शायद ही कोई दूसरी चीज़ इतना ज़्यादा आकर्षण रखती होगी।

सामाजिकता व संगत का मामला अगर सही और सकारात्मक तरीक़े से सारी शर्तों और क़ानून की रिआयत के साथ अंजाम दिया जाये तो बेशक वह दुनिया व परलोक की सच्ची और हमेशा की ख़ुश क़िस्मती का कारण बन सकता है और इसी तरह से अगर इसे ग़लत और नकारात्मक तरीक़े और क़ानून और नियमों की अनदेखी करते हुए अंजाम दिया जाये तो वह इंसान की हमेशा की परेशानी का सबब हो सकता है।

इंसान जो अपने तमाम वुजूद के साथ दूसरों से मुहब्बत व हम नशीनी व दोस्ती का लुत्फ़ उठाता है , अगर वह अच्छे और सकारात्मक , योग्य , नेक , ख़ूबियों वाले , इज़्ज़तदार , समझदार , अच्छी सोच , सूझबूझ वाले और जानकार लोगों के साथ इन विशेषताओं की बुनियाद पर दोस्ती व सामाजिकता के बंधन में बंधेगा और उनके सकारात्मक प्रभाव को स्वीकार करेगा तो वह भी उनकी तरह या संभवत उन से भी बेहतर हो सकता है। ठीक इसी तरह से कि अगर वह नकारात्मक छवि वाले , बुरे , ख़राब , बुरी आदत के मालिक , असभ्य , जाहिल और अनपढ़ लोगों के साथ मित्रता व संगत को अपनायेगा और उसके नकारात्मक प्रभाव को स्वीकार करेगा तो उन ही के जैसा या संभवत उनसे भी बुरा व पस्त हो सकता है।

इस्लाम धर्म ने दोस्ती व हम नशीनी , संगत व सामाजिकता के इंसान की ज़िन्दगी में शदीद प्रभाव डालने व प्रभाव स्वीकार करने को ध्यान में रखते हुए , इस के लिये पवित्र क़ुरआन और हदीसों में एक अलग विशेष अध्याय का गठन किया है और उस में इस के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों की तरफ़ इशारा किया है और समाज और मुआशरे को सकारात्मक व अच्छी सामाजिकता की तरफ़ मार्गदर्शन किया है और बुरी और नकारात्मक सामाजिकता से मना किया है। सही सामाजिकता व पवित्र लोगों की संगत व दोस्ती को दुनिया व आख़िरत की अच्छाई का सबब बयान किया है और ग़लत सामाजिकता व ग़लत संगत , अपवित्र , असभ्य , हैवान सिफ़त मित्रों की मित्रता व सामाजिकता को दुनिया व आख़ेरत की ख़राबी का कारण बताया है।

यह किताब जो आपके सामने है , इसमें मैंने अल्लाह की मदद और उसकी तौफ़ीक़ से सामाजिकता व सामाजिक व्यवहार के बारे में बहसों और बातों पर इस्लाम धर्म के दृष्टिकोण को पवित्र क़ुरआन और हदीस के अनुसार लिखा है , जहां तक संभव हुआ मैंने इस मौज़ू के तमाम पहलुओं व वास्तविकताओं पर ध्यान देने की कोशिश की है और मौज़ू और शीर्षक को देखते हुए इसकी ज़रुरत , आवश्यकता , महत्व व सकारात्मक प्रभाव के अनुसार अथवा बहस की समानता व मुनासिबत से और बहुत सी दूसरी बातों की शामिल किया गया है।

फ़क़ीर हुसैन अंसारीयान

15.04.1383 (हिजरी शम्सी)

प्रस्तावना (अनुवादक)

इस वक़्त क़ौम और ख़ास तौर पर जवानों की जो हालत है वह किसी साहिबे नज़र से पोशीदा नही है। इस ज़वाल और पिछड़ेपन के असबाब बहुत से हैं जहां एक तरफ़ तालीमो तरबीयत की तरफ़ ग़फ़लत और कमी इस का एक सबब है वहीं क़ौम ख़ास कर जवानों की मज़हबी व दीनी , ज़ेहनी व फिक्री नश व नुमा के लिये हमारे पास अच्छे लिटरेचर का न होना है।

अरबी , फ़ारसी और उर्दू में किसी हद तक इस कमी का इतना एहसास नही होता मगर इस वक़्त जवानों की उर्दू ज़बान व अदब से दूरी ने अहले नज़र हज़रात के लिये ज़ियादा मुश्किलें पैदा कर दी हैं। लिहाज़ा ज़रुरत इस बात की है कि इस कमी को महसूस करते हुए हम सब मिल कर क़दम बढ़ाये। कहीं ऐसा न हो कि हमारी यह ग़फ़लत हमारे जवानों और नस्लों को मज़हबी अफ़कार से दूरी का सबब फ़राहम कर दे।

इस बात के पेशे नज़र ज़रुरत है इस बात कि ज़ियादा से ज़ियादा किताबों का अरबी व फ़ारसी व उर्दू से हिन्दी में तर्जुमा करके हिन्दी के ज़ख़ीरे को बढ़ाया जाये , ता कि हमारे हिन्दी पढ़ने वाले क़ारी पीछे न रह जायें।

ज़ेरे नज़र किताब उसी सिलसिले की एक कड़ी है जिस में सादे व आसान व आम फ़हम ज़बान में मतलब को अदा करने की कोशिश की गई है।

मौज़ू के ऐतेबार से यह किताब हिन्दी के इस्लामी ज़ख़ीरे में यक़ीनन इज़ाफ़ा है।

उम्मीद है क़ारेईन इससे कमा हक़्क़हू फ़ायदा उठायेगें और समाज की एक फ़र्द की हैसियत से एक अच्छे समाज की बुनियाद रखने की राह में अपनी कोशिश से दरेग़ नही करेगें।

और आख़िर में गुज़ारिश है कि क़ारेईने केराम इस किताब की कमियों और ग़लतियों की तरफ़ रहनुमाई करेगें ता कि आईन्दा उनका इज़ाला किया जा सके।

ख़ुदावंदे आलम हमारी इस नाचीज़ सी ख़िदमत को क़बूल फ़रमाएं और हम सबको दीनी ख़िदमात की तौफ़ीक़ अता फ़रमाएं।

वस सलाम

सैयद एजाज़ हुसैन मूसवी

(हौज़ ए इल्मिय ए क़ुम)