अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

इमामे मोहम्मद तक़ी(अ)
हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की शहादत

हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की शहादत

 इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेहि व सल्लम के वंश से थे और उन्होंने अपनी छोटी सी आयु में ज्ञान और परिज्ञान के मूल्यवान ख़ज़ाने छोड़े हैं।

इमामे मोहम्मद तक़ी(अ)
इमाम तक़ी अ.स. का एक मुनाज़ेरा

इमाम तक़ी अ.स. का एक मुनाज़ेरा

इस बात पर तमाम अब्बासी मामून पर ऐतेराज़ करने लगे और कहने लगे कि अब जबकि अ़ली इब्ने मूसा रिज़ा अ.स. इस दुनिया से चले गये और खि़लाफ़त दुबारा हमारी तरफ़ लौटी है तो तू चाहता है कि फिर से खि़लाफ़त को अ़ली की औलाद को दे दे हम किसी भी हाल में यह शादी नहीं होने देगें।

इमामे रिज़ा(अ)
हज़रत इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत

हज़रत इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम भी दूसरे इमामों की भांति अत्याचारी शासकों की कड़ी निगरानी में थे। अधिकांश लोग इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का महत्व नहीं समझते थे।

नमाज़
सज्दाऐ सहव का तरीक़ा

सज्दाऐ सहव का तरीक़ा

 सलामे नमाज़ के बाद इंसान फ़ौरन सज्दा ए सहव की नीयत करे एहतियाते लाज़िम की बिना पर पेशानी किसी ऐसी चीज़ पर रख दे जिस पर सज्दा करना सहीह हो और ..

ग़ैरे मासूमीन
हज़रत फ़ातिमा मासूमा की ज़िंदगी पर एक निगाह।

हज़रत फ़ातिमा मासूमा की ज़िंदगी पर एक निगाह।

वह लोग फिर इमाम के घर हाज़िर हुए लेकिन इमाम अभी तक सफ़र से वापिस नहीं आए थे, उन्होंने आप से अपने सवालों को यह कर वापिस मांगा कि अगली बार जब हम लोग आएंगे तब इमाम से पूछ लेंगे, लेकिन जब उन्होंने अपने सवालों की ओर देखा तो सभी सवालों के जवाब लिखे हुए पाए, वह सभी ख़ुशी ख़ुशी मदीने से वापस निकल ही रहे थे कि अचानक रास्ते में इमाम से मुलाक़ात हो गई, उन्होंने इमाम से पूरा माजरा बताया और सवालों के जवाब दिखाए, इमाम ने 3 बार फ़रमाया उस पर उसके बाप क़ुर्बान जाएं।  

विभिन्न
नाखून कतरने की फजीलत

नाखून कतरने की फजीलत

नाखून कतरने से बहुत बड़े अमराज़ खत्म होते है और रोज़ी फऱाख़ होती है।

आमाल
माहे ज़ीक़ाद के इतवार के दिन की नमाज़

माहे ज़ीक़ाद के इतवार के दिन की नमाज़

जो शख्स भी इस नमाज़ को बज़ा लाऐगा उसकी तौबा कुबुल और गुनाह बख्शे जाऐंगे और क़यामत के दिन उसके लेनदार उस से राज़ी होंगे.......................

विभिन्न
अहलेबैत (अलैहिमुस्सलाम) से तवस्सुल

अहलेबैत (अलैहिमुस्सलाम) से तवस्सुल

जिस प्रकार ख़ुदा के पैग़म्बर समस्याओं और परेशानियों में ख़ुदा के सामने अहलेबैत (अ) को अपना माध्यम बनाते थे और उनके नाम का वास्ता देकर पुकारते थे, उसी प्रकार हमको भी अपनी मुश्किलों और कठिनाइयों (कि जिस में हमारी सबसे बड़ी मुश्किल इमामे ज़माना (अ) की ग़ैबत है) मे इन मासूमों को ख़ुदा को वास्ता देकर पुकारें।

विभिन्न
“अलयहूद”

“अलयहूद”

वाय हो उन लोगो पर जो अपने हाथो से किताब लिख कर यह कहते हैं कि ये ख़ुदा कि तरफ से है,ताकि इसे थोडे दाम मे बेच दें। इनके लिए इस तहरीर पर अज़ाब है और इसकी कमाई पर भी।

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