अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

तरकीबे नमाज़

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अक़ामत के बाद सीधा खड़ा हो क़िब्ला की तरफ़ मुंह करके और इस तरह नियत करें नमाज़ पढ़ता हूँ मैं (जैसे) सुबह की दो रकअत वाजिब क़ुर्बतन इलल्लाह इसके साथ ही तकबीर कहें यानी अल्लाहु अकबर ब आवाज़ बलन्द कहें ,इसके बाद हम्द बिस्मिल्लाह के साथ पढ़ें।


बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है।


अलहम्दो लिल्लाहे रब्बिल आलमीन ,अर रहमानिर रहीम ,मालिके यौमिद्दीन ,ईय्याका नअबोदो व इय्याका नसताईन ,एहदिनस्सिरातल मुस्तक़ीम ,सिरातल्लज़ीना अन अमता अलैहिम ग़ैरिल मग़ज़ूबे अलैहिम वलज़्ज़ल्लीन ।


(तर्जुमा : सब तारीफ़े अल्लाह के लिये जो तमाम आलमों का पालने वाले है जो बङा रहम करने वाला है ,क़यामत के दिन का मालिक है। हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझसे ही मदद चाहते हैं। हम को सीधी राह पर बाक़ी रख उन लोगों की राह पर जिनपर अपनी नेमतें नाज़िल फ़रमाई ,न उन लोगों की राह जिन पर तूने अपना ग़ज़ब नाज़ील किया और न गुमराहों की।)
बाद अलहम्द के जो सूरा चाहे पढ़े इख़्तेयार है।


बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम


शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है।
इन्ना अनज़लनाहो फ़ी लैलतिल क़द्र वमा अदरका मा लैलतुल क़द्र लैलतुल क़द्रे ख़ैरूम मिन अलफ़े शहर ,तनज़्ज़लुल मलाएकतो वर रूहो फ़ीहा बेइज़्ने रब्बेहिम मिन कुल्ले अमरिन सलामुन हियाहत्ता मतलाईल फ़ज्र ।
(तर्जुमा- ब तहक़ीक़ हमने क़ुर्आन को शबे क़द्र में नाज़ील किया ,और तू नहीं जानता कि शबे क़द्र कैसी शब है ,शबे बेहतर है हज़ारो महीनों से। अपने परवरदिगार के हुक्म से इस शब में मलायेका और रूह नाज़िल होते हैं ,यह शब आबीदों के लिये हर अमल बाअसे सलामती है यहा तक की तुलूए सुबह हो।)


फिर अल्लाहु अकबर कह कर रूकूउ में जाये और तीन मर्तबा सुबहाना रब्बेयल अज़ीमे व बेहमदेह कहे।


(यानी तस्बीह करता हूँ मैं अपने उस परवरदिगार बुज़ुर्ग की और हम्द उसकी।) फिर सिधा खङे हो और समे अल्लाहोलेमन हमेदह कहे (ख़ुदा वन्दे आलम उसका कलाम सुनता है जो उसकी हम्द करता है) फिर अल्लाहो अकबर कह कर सजदे में जायें और तीन मर्तबा कहें सुब्हाना रब्बेयल आला व बेहमदेह (तस्बीह करता हूँ अपने परवरदिगार की जो सबसे ज़्यादा बुज़ुर्ग है और हम्द उसकी) बाद इसके सर उठायें और अल्लाहो अकबर कह कर बैठें और एक मर्तबा असतग़ फ़ेरूल्लाहा रब्बी व अतूबो इलैह कहें (बख़्शीश चाहता हूँ अपने परवरदिगार से अपने गुनाहों की) फिर अल्लाहो अकबर कहें और दोबारा सजदें में जायें और तीन बार कहें सुब्हाना रब्बेयल आला व बेहमदेह और सजदे से सर उठायें और अल्लाहो अकबर कहें और बैठे ,बाद उसके बेहोलिल्लाहे व क़व्वतेही अक़ूमो व अक़ुद (यानी उसी अल्लाह की क़ुव्वत और मदद से खङा होता हूँ और बैठता हूँ) कह के सीधा खङा हो। रकअत अव्वल तमाम हुई।


 दूसरी रकअत


 मिस्ल रकअत अव्वल बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कह कर सूरा हम्द पढ़ें। इसके बाद सुरा क़ुल होवल्लाहो अहद ,पढ़े।

 
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है।


क़ुल होवल्लाहो अहद ,अल्ला हुस्समद ,लम यलिद वलम यूलद ,वलम यकुल्लाहू कोफ़ोवन अहद ।
(तर्जुमा- कहदो ऐ रसूल अल्लाह एक है और वह बेनियाज़ है। कोई उससे पैदा नहीं हुआ और न वह किसी से पैदा हुआ और न कोई उसका मिस्ल है।) इसके बाद दोनो हाथों को मुंह के बराबर उठायें और यह दुआ-ए-क़ुनूत पढ़े।


रब्बनग़फ़िरली वले वालेदय्या व लिलमोमिनीना ,यौमा यक़ूमुल हिसाब अल्लाहुम्मग़फ़िरलना वरहमना व आफ़ेना व अफ़ोअन्ना फ़िद्दुनिया वल आख़ेरह इन्नाका अला कुल्ले शैइन क़दीर।


(तर्जुमा- ऐ हमारे पालने वाले क़यामत के दिन हमको और हमारे वालदैन और तमाम मोमिनों को बख़्श दें।


परवरदिगार हमारी और तमाम मोमिनों की बख़्शीश कर और दुनिया और आख़ेरत में आफ़ियत अता फ़रमा ब तहक़ीक़ की तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।)


इसके बाद दुरूद पढ़ कर मिस्ल रकअत अव्वल के रूकूउ और दोनों सजदे बजा लाये ,जब सजदे से सर उठाये अल्लाहो अकबर कह कर दो ज़ानू बैठे और तशहुद पढ़ें।


अशहदो अल्लाइलाहा इल्लल्लाह वहदहूलाशरीका लहू व अशहदो अन्ना मुहम्मदन अबदोहू व रसूलोह।


(तर्जुमा- गवाही देता हूँ कि कोई ख़ुदा सिवाये अल्लाह के नहीं है ख़ुदा एक है और इसका कोई शरीक नहीं और गवाही देता हूँ की मोहम्मद मुस्तफ़ा (स 0अ 0)इसके बन्दे और रसूल हैं।) इसके बाद दुरूद पढ़ें ,अगर नमाज़ दो रकअत है तो यूँ सलाम पढ़ें।


अस्सालो अलैका अय्योहन्नबीयो व रहमतुल्लाहे व बराकातूह ,अस्सलामो अलैना व अला एबादिल्लाहिस्सालिहीन ,अस्सालामो अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बरादातूह।


(तर्जुमा- ऐ पैग़म्बरे ख़ुदा आप पर सलाम हो और अल्लाह की रहमतें और बरकतें हो सलाम हो हम पर और ख़ुदा के नेक बन्दों पर और सलाम हो सब पर और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकत।)


अगर नमाज़ सह (तीन) रकअती हो या चार रकअती तो सलाम न पढ़ें ,और तशहुद पढ़ कर उठ खङा हो और फ़क़्त सूरा हम्द या जो सूरा याद हो पढ़े और रूकूउ और दोनों सजदे मिस्ल साबिक़ बजा लाये अगर नमाज़ सह रकअती है तो बाद तीसरी रकअत के और अगर चार रकअती है तो बाद चौथी रकअत के तशहुद और सलाम पढ़ कर नमाज़ तमाम करे फिर तीन मर्तबा अल्लाहो अकबर हाथों को कानो तक लेजा कर कहें।


इसके बाद दुरूद और तसबीह जनाबे सय्यदा (स 0अ 0) 34मर्तबा अल्लाहो अकबर और 33मर्तबा अलहम्दो लिल्लाह और 33मर्तबा सुब्हानल्लाह पढ़े। इस के बाद दुआयें और क़ुरआन मजीद और जोशनीन वग़ैरा पढ़ें और बावास्ता पंजतन पाक (अ 0)और बाराह इमाम (अ 0)बरादरान मोमिन ज़िन्दा और मुर्दा के लिये दुआ-ए-ख़ैर करें और अपनी हाजतें ख़ुदा से तलब करे और बाद इसके ज़ेयारत इमाम हुसैन (अ 0)रोज़-ए-अक़दस की तरफ़ इशारा करके पढ़ें।

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Adeel:Rizvi
2016-12-19 21:15:20
Jazakallah
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