अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

रसूले अकरम(स)

पैग़म्बर (स) की सीरत के जलते चराग़

पैग़म्बर (स) की सीरत के जलते चराग़

मैं उसको पसन्द नहीं करता कि जिस इंसान को मौत आ जाऐ और वह रसूल (स.) की सीरत पर अमल न

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मैराजे पैग़म्बर

मैराजे पैग़म्बर शिया और सुन्नी दोनो की अहादीसे मुतावातिरा मे आया है की रसूले अकरम स.अ.व.व. की मैराज जिस्मानी थी न कि रुहानी।

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पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ:व:व) का जीवन परिचय

  पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ:व:व) का जीवन परिचय हज़रत पैगम्बर बचपन से ही दूसरे बच्चों से भिन्न थे। उनकी आयु के अन्य बच्चे गदें रहते, उनकी आँखों मे गन्दगी भरी रहती तथा बाल उलझे रहते थे। परन्तु पैगम्बर बचपन मे ही व्यस्कों की भाँति अपने को स्वच्छ रखते थे।

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पैग़म्बर का स्वर्गवास

पैग़म्बर का स्वर्गवास हुज़ूर रसूल करीम (स.अ.) ने बतारीख़ 28 सफ़र 11 हिजरी योमे दोशम्बा ब वक्ते दो पहर खि़लअते हयात उतार दिया।

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हिजरत

हिजरत आर्थिक प्रतिबन्धो से छुटने के बाद पैगम्बर ने फिर से इस्लाम प्रचार आरम्भ कर दिया।

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रसूले इस्लाम स. का परिचय

रसूले इस्लाम स. का परिचय  दो बार सीरिया का ऐतिहासिक सफ़र किया है; एक बार बारह साल की उम्र में और एक बार

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रसूले अकरम के आखरी जुमले

रसूले अकरम के आखरी जुमले  पूरे मदीने को अफ़रा तफ़री और घबराहट का महौल घेरे हुए था, पैग़म्बर (स) के साथी आँसुओं भरी आँखों, दुखी दिलों और परेशानी के साथ पैग़म्बर (स) के घर के आस पास जमा थे, ताकि किसी प्रकार पैग़म्बर (स) के स्वास्थ के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें, हर थोड़ी देर के बाद घर से कुछ सूचनाएं आ रही थीं, जो पैग़म्बर (स) के बिगड़ते स्वास्थ को बयान कर रही थीं, और सबको बता रहीं थी कि पैग़म्बर (स) के पवित्र जीवन के कुछ पल ही इस संसार में बाक़ी रह गए हैं। .

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हदीसे रसूल (स.) और परवरिश

हदीसे रसूल (स.) और परवरिश ऐ अली! ख़ुदा लानत करे उन माँ-बाप पर जो अपने बच्चे की ऐसी बुरी परवरिश करें कि जिस की वजह से आक करने की नौबत आ पहुँचे।"  

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जंगे ओहद

 जंगे ओहद जंगे बद्र का बदला लेने के लिये अबू सुफ़ियान ने तीन हज़ार ( 3000) की फ़ौज से मदीने पर चढ़ाई की.......

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जंगे ख़न्दक़

जंगे ख़न्दक़ 5 हिजरी में वाक़े हुई। इसकी तफ़सील के मुताल्लिक़ अरबाबे तवारीख़ लिखते हैं कि मदीने से निकाले हुए बनी नुज़ैर के यहूदी जो ख़ैबर में ....

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जंगे ख़ैबर

जंगे ख़ैबर ख़ैबर मदीनए मुनव्वरा से तक़रीबन 50 मील के फ़ासले पर यहूदियों की बस्ती थी। इसके बाशिन्दे यूंही इस्लाम के ऊरूज व इक़बाल से जल भुन रहे थे..........

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बेअसते रसूले इस्लाम

बेअसते रसूले इस्लाम कि दोशम्बे को रसूले ख़ुदा (स अ व व) मबऊसे रिसालत हुए हैं

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सुलैह हुदैबिया

सुलैह हुदैबिया आं हज़रत (स अ व व ) हज के इरादे से मक्के की तरफ़ चले , कु़रैश को ख़बर हुई तो जाने से रोका, हज़रत एक कुएं पर जिसका हुदैबिया नाम था रूक गए

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पैग़म्बरे इस्लाम के ख़ानदानी हालात

 पैग़म्बरे इस्लाम के  ख़ानदानी हालात पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स अ व व ) हज़रत इब्राहीम (स अ व व ) की नस्ल से थे ..............................

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जंगे बद्र

 जंगे बद्र मदीने में ख़बर पहुँची कि क़ुरैश बड़ी आमादगी के साथ मदीने पर हमला करने वाले हैं और सुन्ने में आया कि अबू सुफ़ियान .........

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स्वच्छता

स्वच्छता हाथी दाँत का बना कंघा सुरमेदानी कैंची आईना व मिस्वाक उनके यात्रा के सामान मे सम्मिलित रहते

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पैग़म्बरे इस्लाम की बेसत

पैग़म्बरे इस्लाम की बेसत जब हज़रत ख़दीजा ने घर का द्वार खोला तो उन्हें पैग़म्बरे इस्लाम की काली व तेज भरी आखों में विशेष चमक दिखायी दी।

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रसूले इस्लाम स. की ज़िन्दगी से कुछ पाठ (1)

रसूले इस्लाम स. की ज़िन्दगी से कुछ पाठ (1) उनका एक काम शिक्षा देना भी था लेकिन एक काम उससे बड़ा, कठिन और प्रभाव शाली है, वह है अपने अमल से दूसरों को सही रास्ता दिखाना, ख़ुद मैदान में उतरना,

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आज यह आवश्यक है की आदरनीय पैगम्बर मुहम्मद साहिब के सही किरदार को पेश किया जाए.

आज यह आवश्यक है की आदरनीय पैगम्बर मुहम्मद साहिब के सही किरदार को पेश किया जाए. जब आपकी आयु 25 वर्ष की हुई तो अरब की एक धनी व्यापारी महिला जिनका नाम खदीजा था उन्होने पैगम्बर के सम्मुख विवाह का प्रस्ताव रखा

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वसीयत लिखने का हुक्म

वसीयत लिखने का हुक्म जब पैग़म्बरे अकरम (स) ने देख लिया कि लोगों को लश्करे ओसामा के साथ मदीने से बाहर भेजने की तदबीर नाकाम हो गई तो आपने तय किया कि

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