अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

इतिहासिक कथाऐ

हदीसे ग़दीर

हदीसे ग़दीर

यानी पैगम्बर (स.) ने अली (अ.) से फ़रमाया कि ऐ अली उठो कि मैनें तमको अपने बाद इमाम व हादी की शक्ल में मुंतखब कर लिया है।

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ग़दीरे खुम में पैगम्बर का खुत्बा

ग़दीरे खुम में पैगम्बर का खुत्बा हाँ ऐ लोगो वह वक़्त क़रीब है कि मैं दावते हक़ को लब्बैक कहूँ और तुम्हारे दरमियान से चला जाऊँ। तुम भी जवाब दे हो और मै भी जवाब दे हूँ”

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8 शव्वाल, जन्नतुल बक़ी और वहाबियत के अत्याचार।

 8 शव्वाल, जन्नतुल बक़ी और वहाबियत के अत्याचार।   फिर मदीने में पैग़म्बर की पवित्र क़ब्र को तोप का निशाना बनाया लेकिन मुसलमानों के आक्रोश को देख कर वह ऐसा नही कर पाए।

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इस्लाम के बाक़ी रहने में इमाम हुसैन अ.ह के आंदोलन की भूमिका।

इस्लाम के बाक़ी रहने में इमाम हुसैन अ.ह के आंदोलन की भूमिका।  हज़रत इमाम हुसैन अ. ने अपने रिश्तेदारों और साथियों के साथ इस्लाम को क़यामत तक के लिये अमर बना देने के लिए महान बलिदान दिया है। इस रास्ते में इमाम किसी क़ुरबानी से भी पीछे नहीं हटे, यहां तक ​​कि छः महीने के दूध पीते बच्चे को भी इस्लाम के लिए क़ुरबान कर

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कर्बला में ज़िंदा बच जाने वाले लोग।

कर्बला में ज़िंदा बच जाने वाले लोग। इनके कर्बला में मौजूद होने और कर्बला की घटना के बाद ज़िन्दा रहने की रिवायत कुछ किताबों में ज़िक्र हुई है।

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कर्बला के बहत्तर शहीदों के नाम व मुखतसर तआरुफ़

कर्बला के बहत्तर शहीदों के नाम व मुखतसर तआरुफ़

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फ़िदक से संबन्धित अनसुलझे सवाल

फ़िदक से संबन्धित अनसुलझे सवाल अगर कोई चीज़ आपके हाथ में हो और कोई दूसरा उसको छीन ले तो अदालत में उस चीज़ को अपनी सम्पत्ति साबित करने के लिए गवाही छीनने वाले से मांगी जाएगी या आपसे?

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ख़लीफ़ा के फ़िदक छीनने का लक्ष्य व मक़सद

ख़लीफ़ा के फ़िदक छीनने का लक्ष्य व मक़सद वह इस काम के ज़रिये से चाहते थे कि अहले बैत अलैहिमुस सलाम की माली व आर्थिक स्थिति को कमज़ोर कर दें और हक़ के लिये उठने वाली आवाज़ को हज़रत फ़ातेमा (अलैहस सलाम) के घर से बुलंद होती थी,

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बक़्रईद, उस महान क़ुरबानी की याद

बक़्रईद, उस महान क़ुरबानी की याद सूरे साफ्फात की १००वीं आयत में आया है कि इब्राहीम ने ईश्वर से एक भले बेटे की विनती की थी और ईश्वर ने भी वर्षों की प्रतीक्षा के बाद इब्राहीम को इस्माईल प्रदान किया”

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फ़िदक, ख़लीफ़ाओं की विरोधाभास बातें

फ़िदक, ख़लीफ़ाओं की विरोधाभास बातें हज़रते ज़हरा ने उसको वापस पाने के लिए सबसे पहले पैग़ाम भेजा कि फ़िदक मेरा है मुझे वापस कर दो।

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रतनसेन तीन हिजरी का हिन्दुस्तानी मुसलमान

रतनसेन तीन हिजरी का हिन्दुस्तानी मुसलमान तारीखदानो ने हिन्दुस्तान मे इस्लाम की आमद हज्जाज बिन युसुफ के नौजवान कमांडर मौहम्मद बिन क़ासिम से मंसूब की है और ये ऐसी ज़हनीयत का नतीजा है कि जो इस्लाम को तलवार के फलता फूलता मानती है यहाँ भी यही जाहिर किया गया है कि मौहम्मद बिन कासिम ने हिन्दुस्तान पर हमला किया जिसके नतीजे मे हिन्दुस्तान मे इस्लाम की शूरूआत हुई।

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इमाम हुसैन (अ.स) की शहादत मे हज़रत उमर का किरदार

इमाम हुसैन (अ.स) की शहादत मे हज़रत उमर का किरदार लेकिन नही मालूम की इतनी सख्तीयो के बावजूद माविया के साथ कैसी सांठ-गांठ थी कि इसकी खयानतो और बिदअतो के मुक़ाबले मे उमर ने कभी कुछ नही कहा।

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खिलाफत के लिऐ उमर का छः लोगो की कमेटी बनाना

खिलाफत के लिऐ उमर का छः लोगो की कमेटी बनाना

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मुबाहेला

मुबाहेला  पैग़म्बरे इस्लाम ने अनन्य ईश्वर की बंदगी का निमंत्रण दिया किंतु प्रतिनिधिमंडल के लोगों ने तीन पूज्यों की बात पर आग्रह किया।

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पढ़ा लिखा गधा

पढ़ा लिखा गधा बोहलोल बाज़ार से गुज़र रहा था के एक शख़्स ने दामन पकड़ लिया- बोहलोल ने उसकी तरफ़ देखा- "क्या बात है भाई- मुझे क्यों रोका है"-  ? वह परेशानी से बोला- "जनाब शेख़ बोहलोल ख़ुदा के लिये मेरी मद्द किजिये- वरना मैं बे मौत मारा जाऊँगा"-

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भाप की कीमत

भाप की कीमत किसी ने हारून से कहाः बहलोल कल बग़दाद के बड़े बाजार में एक फकीर नानबाई की दुकान के सामने से गुज़र रहा था- उसने तरह- तरह के खाने चुल्हो पर चढ़ा रखे थे- ज़िससे भाँप निकल रही थी- उन खानो की ख़ुश्बू उन खानो की लज़्जत का पता दे रही थी और इर्द- गिर्द गुज़रने वालो को अपनी तरफ मुतावज्जेह कर रही थी

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मुस्लिम कूफ़े में

मुस्लिम कूफ़े में पाँचवी शव्वाल को ब-रवायते तबरी व इब्ने असीर हज़रत मुस्लिम (अ.स) कूफ़े में दाख़िल हुए और अपने बचपन के दोस्त मुख़्तार के घर को जाए- अम्न क़रार दिया क्योंकि तमाम अहले कूफ़ा मुख़्तार की बे इन्तेहा इज़्ज़त करते थे मुख़्तार आपकी तशरीफ़ आवरी से बे इन्तेहां ख़ुश हुए और बड़ी इज़्ज़त व एहतेराम से पेश आये।

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नजफे हिन्द जोगीपुरा

नजफे हिन्द जोगीपुरा 1657 सितम्बर के महीने में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ  बीमार पड़ा तो ये मशहूर हो गया की शाहजहाँ का इन्तेकाल हो गया | बादशाहत इस से कमज़ोर होने लगी लेकिन उनका बेटा औरंगजेब तो सियासत में तेज़ था  उसने अपने बड़े भाई जो शाहजहाँ का वारिस था उसे एक साल के अंदर ही इस दौड़ से अलग कर दिया और  शाहजहाँ को किले में ही क़ैद कर लिया और बादशाह बन बैठा|

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हदीसे ग़दीर की दलादत

हदीसे ग़दीर की दलादत

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