अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

इमामे हुसैन(अ)

जनाबे ज़ैनब का भाई की लाश पर रोना

जनाबे ज़ैनब  का भाई की लाश पर रोना

 या मौहम्मद ऐ जददे बुर्जुगवार आप पर आसमान के फरिशते दरुद भेजते है और ये आप हुसैन है कि जो रेत पर अपने खून मे ग़लता है। इसके आज़ा एक दुसरे से जुदा हो चुके है और ये तेरी बेटियाँ है जो क़ैदी बनी हुई है।

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रौज़ ए इमाम हुसैन (अ) की अज़मत

रौज़ ए इमाम हुसैन (अ) की अज़मत

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असबाबे जावेदानी ए आशूरा

असबाबे जावेदानी ए आशूरा

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इमामे हुसैन (अ)

इमामे हुसैन (अ) जन्म सन् चार (4) हिजरी क़मरी में शाबान मास की तीसरी (3) तिथि को पवित्र शहर मदीनेमें हुआ था।

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यज़ीद के विरूद्ध हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का क़याम व उसके उद्देश्य

यज़ीद के विरूद्ध हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का क़याम व उसके उद्देश्य जब शासकीय यातनाओं से तंग आकर हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम मदीना छोड़ने पर मजबूर हो गये तो उन्होने अपने क़ियाम के उद्देश्यों को इस प्रकार स्पष्ट किया। “ मैं अपने व्यक्तित्व को चमकाने या सुखमयी जीवन यापन करने या उपद्रव फैलाने के लिए क़ियाम नहीं कर रहा हूँ। बल्कि मैं केवल अपने नाना..............

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इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत के आदाब

 इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत के आदाब कर्बला में दाख़िल होते समय दिल में ग़म और आंखों में आंसू ही इमाम हुसैन अ.स. के हरम में जाने की अनुमति है, अगर ज़ाएर में यह हालत पाई गई तो समझो उसे अनुमति मिल गई, और अगर यह हालत नहीं पैदा हुई तो उसे अंदर जाने से रुक जाना चाहिए, शायद अल्लाह की ख़ास नज़र उस पर हो जाए और उसके अंदर यह हालत पैदा हो जाए।  

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इमाम हुसैन अ.स. का ग़म और अहले सुन्नत

 इमाम हुसैन अ.स. का ग़म और अहले सुन्नत सूरए यूसुफ़ में अल्लाह हज़रत याक़ूब अ.स. के बारे में फ़रमाता है कि वह हमेशा हज़रत यूसुफ़ के बिछड़ने पर रोते रहते थे यहां तक कि आप हज़रत यूसुफ़ के लिए इतना रोए कि आपकी आंखों की रौशनी चली गई। अहले सुन्नत के बड़े आलिम जलालुद्दीन सियूती अपनी मशहूर तफ़सीर दुर्रुल मनसूर में लिखते हैं कि हज़रत याक़ूब अ.स. ने अपने बेटे हज़रत यूसुफ़ अ.स. के बिछड़ने के ग़म में 80 साल आंसू बहाए और उनकी आंखों की रौशनी चली गई।  

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इमाम हुसैन के बा वफ़ा असहाब

इमाम हुसैन के बा वफ़ा असहाब मैंने अपने असहाब से आलम और बेहतर किसी के असहाब को नही पाया।

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इमाम हुसैन(अ)का आन्दोलन

इमाम हुसैन(अ)का आन्दोलन इस घटना से इमाम हुसैन बहुत दुखी हुए और उन्होंने रोते हुए कहा, हे हबीब, ईश्वर तुम्हे विभूतियां प्रदान करे। तुम बहुत विशेषताओं के स्वामी थे। ईश्वर तुम पर कृपा करे।  

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मारेफत के साथ ज़ियारते इमाम हुसैन (अ.स.) का सवाब

मारेफत के साथ ज़ियारते इमाम हुसैन (अ.स.) का सवाब जो शख्स भी इमाम हुसैन (अ.स.) के हक़ की मारेफत रखते हुऐ उनकी कब्र पर आऐगा तो अल्लाह तआला उसके तमाम अगले और पिछले गुनाह ...

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हज़रत इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम की ज़ियारत का सवाब

हज़रत इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम की ज़ियारत का सवाब  इमाम की ज़ियारत हर उस मोमिन पर वाजिब है जिसने अल्लाह की तरफ़ से इमामत को स्वीकार किया है।

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शहादत इमाम हुसैन मानव इतिहास की बहुत बड़ी त्रासदी

 शहादत इमाम हुसैन मानव इतिहास की बहुत बड़ी त्रासदी इस महीने के विचार से बुनियादी स्तर पर जुड़ी हैं: लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के मदीना हिजरत और रसूलुल्लाह के दूसरे नवासे हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहू अन्हू की कर्बला में शहादत।

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इमाम हुसैन बुद्धीजीवीयो के मत से

इमाम हुसैन बुद्धीजीवीयो के मत से  मैंने हुसैन से सीखा की मज़लूमियत में किस तरह जीत हासिल की जा सकती है! इस्लाम की बढ़ोतरी तलवार पर निर्भर नहीं करती बल्कि हुसैन के बलिदान का एक नतीजा है जो एक महान संत थे!

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इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की जनाबे मोहम्मद हनफ़िया को वसीयत

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की जनाबे मोहम्मद हनफ़िया को वसीयत निःसंदेह हुसैन बिन अली गवादी देता है कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई और ख़ुदा नहीं है वह अकेला है जिसका कोई शरीक नहीं है, और निःसंदेह मोहम्मद (स) उसके बंदे और रसूल हैं, जो सच के साथ सच (ख़ुदा) की तरफ़ से आए हैं। और निःसंदेह स्वर्ग और नर्क हक़ है, और क़यामत आने वाली है और उसमें कोई संदेह नहीं है, और यह कि ख़ुदा उन सभी को जो क़ब्रों में हैं दोबारा उठाएंगा।  

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असहाबे हुसैनी

असहाबे हुसैनी

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इमाम हुसैन (अस) : संक्षिप्त परिचय

इमाम हुसैन (अस) : संक्षिप्त परिचय   पिछले 1400 वर्षों के दौरान, साहित्य की एक अभूतपूर्व राशि  दुनिया की लगभग हर भाषा में इमाम हुसैन (अस) , पर लिखी गयी है, जिसमे  मुख्य रूप से इमाम हुसैन (अस) के सन 61हिजरी में कर्बला में अवर्णनीय बलिदान का विशेष अस्थान और सम्मान है

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इमाम हुसैन(अ)का अंतिम निर्णय

इमाम हुसैन(अ)का अंतिम निर्णय मैंने लोगों को भलाई की ओर बुलाने व बुराई से रोकने तथा अपने नाना व पिता अली की शैली अपनाने का संकल्प लिया है।

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