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सहीफ़ए सज्जादिया का परिचय

सहीफ़ए सज्जादिया का परिचय

सहीफ़ए सज्जादिया जिसे, उख़्तुल क़ुरआन यानी क़ुरआने मजीद की बहन कहा जाता है इमाम ज़ैनुल आबेदीन अ. की वह दुआएं हैं जो आपने अपनी पूरी ज़िन्दगी ख़ास तौर से कर्बला के बाद पैंतीस साल तक के ज़माने की हैं। इस महान किताब के बारे में आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनाई की ज़बानी कुछ बातें उदाहरण के लिये पेश करते हैं।

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इरादे की दृढ़ता

इरादे की दृढ़ता

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दुआ कैसे की जाए

दुआ कैसे की जाए तुम लोग मुझसे दुआ मांगों में तुम्हारी दुआ को स्वीकार करने वाला हूँ

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इंसान की आज़ादी

इंसान की आज़ादी हुस्न व क़ुब्हे अक़ली को क़बूल करना और इंसान की अक़्ल को ख़ुद मुख़्तार मानना बहुत से हक़ाइक़,उसूले दीन व शरीअत,नबूवते अम्बिया व आसमानी किताबों के क़बूल के लिए ज़रूरी है

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अरफ़ा, दुआ और इबादत का दिन

अरफ़ा, दुआ और इबादत का दिन अरफ़े के दिन विशेष उपासना एवं इबादत का उल्लेख किया गया है, रोज़ा रखना, ग़ुस्ल करना अर्थात विशेष स्नान करना,

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दुआ और उसकी शर्तें

दुआ और उसकी शर्तें ख़ुदा को पुकारना है तो उस तरीक़े से पुकारो जो उसने बताया है, और यही वह स्थान है जब हमको अहलेबैत (अ.) की दुआओं का महत्व समझ में आता है कि

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बुराइयों से मुक़ाबला

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पाँच नेक सिफ़तें

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राह के आख़री माना

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ग़लतियों का इज़ाला

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तजुर्बे

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एकता मुसलमानों की प्रगति रेखा

एकता मुसलमानों की प्रगति रेखा

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दोस्त और दोस्ती की अहमियत

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नज़र अंदाज़ करना

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हिदायत व रहनुमाई

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सलाह व मशवरा

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नज़्म व ज़ब्त

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कस्बे रोज़ी

कस्बे रोज़ी

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