अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

विभिन्न

मैथून का उचित समय

मैथून का उचित समय

इसी तरह की बात इमाम जाफर सादिक़ (अ.स.) ने इरशाद फरमाया कि मर्द को उस मकान मे जिसमे कोई बच्चा हो अपनी औरत या कनीज़ से मैथून नही करना चाहिऐ वरना वह बच्चा बलात्कारी होगा।

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तबर्रा कितना सहीह कितना ग़लत?

तबर्रा कितना सहीह कितना ग़लत? जब लानत मलामत और अपमानित करने का द्वार खुलता है, तो उसका उत्तर भी मिलता है, अगर आप किसी के विश्वासों और आस्थाओं का मज़ाक़ उड़ाएंगे तो वह भी आपके साथ वैसा ही करेगा, क्या यह सहीह है कि हमारी नासमझी या हमारे ग़लत कार्यों के कारण अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की तौहीन और अनका अपमान किया जाए? 

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नाखून कतरने की फजीलत

नाखून कतरने की फजीलत नाखून कतरने से बहुत बड़े अमराज़ खत्म होते है और रोज़ी फऱाख़ होती है।

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इस्लाम में महेर की हैसियत

इस्लाम में महेर की हैसियत महेर वो रक़म है जो किसी लड़की का  होने वाला शौहर लड़की तो तोहफे के तौर पे दिया करता है लेकिन यह रक़म लड़की तय किया करती है  इस महेर को न तो वापस लिया जा सकता है और ना ही माफ़ करने के लिए लड़की पे दबाव डाला जा सकता है । इस रक़म के निकाह के पहले अदा किया जाना चाहिए या फिर लड़की जैसी शर्त रखे उसके अनुसार अदा किया जाना चाहिए।  

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बच्चा नासमझ क्यों पैदा होता है

बच्चा नासमझ क्यों पैदा होता है अगर बच्चा अक़्लमंद और समझदार पैदा होता तो जब खुद को देखता कि कोई उसे गोद में उठाए हुऐ है, उसको दूध पिलाया जाता है, उसे ज़बरदस्ती कपड़ों में लपेटा जाता है,उसे झूले में लिटाया जाता है तो उसे कितनी झंझलाहट और ज़िल्लत महसूस होती।

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वो कपड़े जिनका पहनना हराम है

वो कपड़े जिनका पहनना हराम है टोपी और जेब वग़ैरह (यानी वह लिबास जो शर्मगाह छुपाने के लिये इस्तेमाल नही होता) भी हरीर (रेशमी) कपड़े का न हो और ऐहतियात यह चाहती है कि अजज़ा ए लिबास जैसे सन्जाफ़ (झालर, गोट) और मग़ज़ी (कोर पतली गोट) भी ख़ालिस रेशम की न हो

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मोमिन की प्रसन्नता

मोमिन की प्रसन्नता सुगन्ध लगाना अच्छी चीज़ है इससे जहां सुगंध लगाने वाले को खुशी होती है और उसे अच्छी लगती है वहीं दूसरों को

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ख़ुश कैसे रहें

ख़ुश कैसे रहें हम बहुत कम हंसी मज़ाक़ करते हैं। इमाम ने फ़रमाया, ऐसा नहीं करो, निःसंदेह हंसी मज़ाक़ अच्छे आचरण का भाग है

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क़दम क़दम बढ़ाए जा

क़दम क़दम बढ़ाए जा नके लिए जन्नत में सुबह शाम रिज़्क़ है।

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ईमान क्या है?

ईमान क्या है? ईमान का शाब्दिक अर्थ होता है अपनाना।  ईमान शब्द की व्याख्या करते हुए हज़रत अली अलैहिस्सलाम कहते हैं कि इसका अर्थ है किसी को हृद्य की गहराई से पहचानना, मौखिक रूप से उसे स्वीकार करना और फिर उसे व्यवहारिक बनाना है।  वे कहते हैं कि वास्तविक ईमान, स्पष्टतम मार्ग और प्रज्वलित दीप के समान है।  ईमान का मनुष्य के हृदय से बहुत ही निकट का संबन्ध होता है।

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नुस्ख़हाए जामेअ

नुस्ख़हाए जामेअ दफ़ाए हेफ़क़ान (दिल की बेचैनी और घबराहट वग़ैरा) के लिये एक गोली ज़ीरा के ख़ुशान्द़ह के साथ खिलाएं।

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इस्लाम लोगों की आवश्यक्ताओं का उत्तर देने वाला धर्म

इस्लाम लोगों की आवश्यक्ताओं का उत्तर देने वाला धर्म इस आधार पर पवित्र क़ुरआन की दृष्टि में मनुष्य की रचना और प्रवृत्ति, उसको धर्म परायणता अर्थात बेहतर जीवन के लिए वैचारिक व व्यवहारिक सिद्धांतों की ओर मार्ग

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तीन पुर मअना हदीसे

तीन पुर मअना हदीसे

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