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अशआर

मुसलमाँ के लहू में है सलीक़ा दिल-नवाज़ी का

मुसलमाँ के लहू में है सलीक़ा दिल-नवाज़ी का

मुरव्वत हुस्न-ए-आलम-गीर है मर्दान-ए-ग़ाज़ी का..

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किस शेर की आमद है कि रन काँप रहा है

किस शेर की आमद है कि रन काँप रहा है किस शेर की आमद है कि रन काँप रहा है रुस्तम का जिगर ज़ेर-ए-कफ़न काँप रहा है

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किस नूर की मज्लिस में मिरी जल्वागरी है

 किस नूर की मज्लिस में मिरी जल्वागरी है लिखा है कि थी हज़रत-ए-शब्बीर को आदत होती थी नमाज़-ए-सहरी से जो फ़राग़त पहले अली अकबर ही को बुलवाते थे हज़रत फ़रमाते थे करता हूँ इबादत में इबादत रौशन हो न क्यूँ चश्म-ए-हुसैन इब्न-ए-अली करता हूँ ज़ियारत में जमाल-ए-नुब्वी की  

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कोई 'अनीस' कोई आशना नहीं रखते

कोई 'अनीस' कोई आशना नहीं रखते जो तोशा-ए-सफ़र-ए-कर्बला नहीं रखते

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जो शख्स शहे दी का अज़ादार नही है

जो शख्स शहे दी का अज़ादार नही है जो शख्स शहे दी का अज़ादार नही है

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जवाबे शिकवा

जवाबे शिकवा दिल से जो बात निकलती है असर रखती है पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है

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शिकवा

 शिकवा क्यूँ ज़याँ - कार बनूँ सूद - फ़रामोश रहूँ फ़िक्र - ए - फ़र्दा न करूँ महव - ए - ग़म - ए - दोश रहूँ

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लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी हो मेरे दम से यूँही मेरे वतन की ज़ीनत जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

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नमाज़

नमाज़ फ़ज़ीलतों पे फ़ज़ीलत नसीब होती है, नमाज़ पढ़ने से इज़्ज़त नसीब होती है।।

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ताजे लताफत हैं फातेमा

ताजे लताफत हैं फातेमा मरयम का फख्ऱ एक झलक सी दिखा गया। ज़हरा का अक्स ज़हने रसा मे समा गया।

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सलाम

सलाम हाथो पा शह के रन को जो नूरे नज़र गये। ज़ुल्मो जफ़ाओ जौर के चेहरे उतर गये।

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हक़ निभाना मेरे हुसैन का है,

हक़ निभाना मेरे हुसैन का है, हक़ निभाना मेरे हुसैन का है, दिल ठिकाना मेरे हुसैन का है।

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इस्लाम की अज़मत

इस्लाम की अज़मत

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दिलासा हुसैन है।

दिलासा हुसैन है।

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मौत की आग़ोश में जब थक के सो जाती है माँ

मौत की आग़ोश में जब थक के सो जाती है माँ भूखा रहने ही नहीं देती यतीमों को कभी जाने किस किस से, कहाँ से माँग कर लाती है माँ

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फज़ीलतो का समन्दर बतूल हैं

फज़ीलतो का समन्दर बतूल हैं हक़ को है जिसपे नाज़ वो गौहर बतूल हैं........

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नमाज.की अज़मत

नमाज.की अज़मत

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इल्म

इल्म इल्म आता है ज़माने मे मौहम्मद बन कर................................

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बाप

बाप क़ैदखाने में हुआ कोहराम बच्ची मर गई। ख़्वाब में एक शब् सकीना को नज़र आता है बाप।।

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आपका कमेंन्टस

यूज़र कमेंन्टस

Gulzar rizvi:Mashaallah
2015-05-11 18:20:44

Moula umre draz ata kre is site ko banane wale ko .Ameen

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