अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

रसूले अकरम(स)
पैग़म्बर का स्वर्गवास

पैग़म्बर का स्वर्गवास

हुज़ूर रसूल करीम (स.अ.) ने बतारीख़ 28 सफ़र 11 हिजरी योमे दोशम्बा ब वक्ते दो पहर खि़लअते हयात उतार दिया।

रसूले अकरम(स)
रसूले इस्लाम स. का परिचय

रसूले इस्लाम स. का परिचय

 दो बार सीरिया का ऐतिहासिक सफ़र किया है; एक बार बारह साल की उम्र में और एक बार

रसूले अकरम(स)
हिजरत

हिजरत

आर्थिक प्रतिबन्धो से छुटने के बाद पैगम्बर ने फिर से इस्लाम प्रचार आरम्भ कर दिया।

रसूले अकरम(स)
रसूले अकरम के आखरी जुमले

रसूले अकरम के आखरी जुमले

 पूरे मदीने को अफ़रा तफ़री और घबराहट का महौल घेरे हुए था, पैग़म्बर (स) के साथी आँसुओं भरी आँखों, दुखी दिलों और परेशानी के साथ पैग़म्बर (स) के घर के आस पास जमा थे, ताकि किसी प्रकार पैग़म्बर (स) के स्वास्थ के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें, हर थोड़ी देर के बाद घर से कुछ सूचनाएं आ रही थीं, जो पैग़म्बर (स) के बिगड़ते स्वास्थ को बयान कर रही थीं, और सबको बता रहीं थी कि पैग़म्बर (स) के पवित्र जीवन के कुछ पल ही इस संसार में बाक़ी रह गए हैं। .

रसूले अकरम(स)
हदीसे रसूल (स.) और परवरिश

हदीसे रसूल (स.) और परवरिश

ऐ अली! ख़ुदा लानत करे उन माँ-बाप पर जो अपने बच्चे की ऐसी बुरी परवरिश करें कि जिस की वजह से आक करने की नौबत आ पहुँचे।"  

इमामे हुसैन(अ)
 इमाम हुसैन अ.स. का ग़म और अहले सुन्नत

इमाम हुसैन अ.स. का ग़म और अहले सुन्नत

सूरए यूसुफ़ में अल्लाह हज़रत याक़ूब अ.स. के बारे में फ़रमाता है कि वह हमेशा हज़रत यूसुफ़ के बिछड़ने पर रोते रहते थे यहां तक कि आप हज़रत यूसुफ़ के लिए इतना रोए कि आपकी आंखों की रौशनी चली गई। अहले सुन्नत के बड़े आलिम जलालुद्दीन सियूती अपनी मशहूर तफ़सीर दुर्रुल मनसूर में लिखते हैं कि हज़रत याक़ूब अ.स. ने अपने बेटे हज़रत यूसुफ़ अ.स. के बिछड़ने के ग़म में 80 साल आंसू बहाए और उनकी आंखों की रौशनी चली गई।  

इमामे हुसैन(अ)
जनाबे ज़ैनब  का भाई की लाश पर रोना

जनाबे ज़ैनब का भाई की लाश पर रोना

 या मौहम्मद ऐ जददे बुर्जुगवार आप पर आसमान के फरिशते दरुद भेजते है और ये आप हुसैन है कि जो रेत पर अपने खून मे ग़लता है। इसके आज़ा एक दुसरे से जुदा हो चुके है और ये तेरी बेटियाँ है जो क़ैदी बनी हुई है।

इमामे हुसैन(अ)
मारेफत के साथ ज़ियारते इमाम हुसैन (अ.स.) का सवाब

मारेफत के साथ ज़ियारते इमाम हुसैन (अ.स.) का सवाब

जो शख्स भी इमाम हुसैन (अ.स.) के हक़ की मारेफत रखते हुऐ उनकी कब्र पर आऐगा तो अल्लाह तआला उसके तमाम अगले और पिछले गुनाह ...

इमामे हुसैन(अ)
इमाम हुसैन(अ)का आन्दोलन

इमाम हुसैन(अ)का आन्दोलन

इस घटना से इमाम हुसैन बहुत दुखी हुए और उन्होंने रोते हुए कहा, हे हबीब, ईश्वर तुम्हे विभूतियां प्रदान करे। तुम बहुत विशेषताओं के स्वामी थे। ईश्वर तुम पर कृपा करे।  

विभिन्न
तबर्रा कितना सहीह कितना ग़लत?

तबर्रा कितना सहीह कितना ग़लत?

जब लानत मलामत और अपमानित करने का द्वार खुलता है, तो उसका उत्तर भी मिलता है, अगर आप किसी के विश्वासों और आस्थाओं का मज़ाक़ उड़ाएंगे तो वह भी आपके साथ वैसा ही करेगा, क्या यह सहीह है कि हमारी नासमझी या हमारे ग़लत कार्यों के कारण अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की तौहीन और अनका अपमान किया जाए? 

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mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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