अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

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विभिन्न
कुरआने करीम से तमस्सुक

कुरआने करीम से तमस्सुक

कुरआन हिकमत की किताब है, कुरआन इल्म की किताब है। किताबे हयात है। उम्मतो और क़ौमो की हक़ीक़ी हयात क़ुरआन के मआरिफ और उसके अहकाम पर अमल पैरा होने मे है....

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
ख़ुतब ए फ़िदक

ख़ुतब ए फ़िदक

जिस दिन तक आप जीवित थे मेरी हिमायत और समर्थन करने वाला था और मैं सुकून के साथ आती जाती थी और आप मेरे बाज़ू और सहायक थे,

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
मुसहफ़े फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा

मुसहफ़े फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा

अहलेबैत (अ) से नक़्ल होने वाली रिवायतों में से कुछ रिवायतों में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा के मुसहफ़ की बात कही गई

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
सुन्नियों की पुस्तकें और फ़ातेमा ज़हरा (स) की महानता

सुन्नियों की पुस्तकें और फ़ातेमा ज़हरा (स) की महानता

निःसंदेह फ़ातेमा मेरा टुकड़ा है, जो चीज़ उसे परेशान करती है वह मुझे परेशान करती है जो उसे पीड़ा देती है वह मुझे पीड़ा देती है।

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
हज़रत मोहसिन की शहादत

हज़रत मोहसिन की शहादत

हज़रत मोहसिन की शहादत कैसे हुई। शिया और सुन्नी किताबो से...

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का मरसिया

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा का मरसिया

जैसे ही पैग़म्बरे इस्लाम ने इस संसार से अपनी आखें मूंदी, मुसीबतें आना आरम्भ हो गईं, और इन मुसीबतों का सिलसिला एक के बाद एक बढ़ता ही चला  

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
फ़िदक के छीने जाने पर फ़ातेमा ज़हरा (स) की प्रतिक्रिया

फ़िदक के छीने जाने पर फ़ातेमा ज़हरा (स) की प्रतिक्रिया

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) ने कहा कि फ़िदक मुझे वापस दे दो, रसूल ने फ़िदक मुझे दिया था।

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
हज़रत फ़ातेमा की शहादत

हज़रत फ़ातेमा की शहादत

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के व्यक्तित्व ऐसे गुणों से सुसज्जित हैं कि कोई और महिला उनके स्तर तक पहुंचती ही नहीं।    

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर इमाम अली का खुत्बा

जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर इमाम अली का खुत्बा

मेरी तरफ़ से और आपकी उस दुख़्तर की तरफ़ से जो आपके जवार में नाज़िल हो रही है और बहुत जल्दी आप से मुलहक़ हो रही है।

नमाज़
तरकीबे नमाज़

तरकीबे नमाज़

अक़ामत के बाद सीधा खड़ा हो क़िब्ला की तरफ़ मुंह करके और इस तरह नियत करें नमाज़ पढ़ता हूँ मैं (जैसे) सुबह की दो रकअत वाजिब क़ुर्बतन इलल्लाह इसके साथ ही तकबीर कहें यानी अल्लाहु अकबर ब आवाज़ बलन्द कहें ,इसके बाद हम्द बिस्मिल्लाह के साथ पढ़ें।

आपका कमेंन्टस

यूज़र कमेंन्टस

mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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