अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
मुसहफ़े फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा

मुसहफ़े फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा

अहलेबैत (अ) से नक़्ल होने वाली रिवायतों में से कुछ रिवायतों में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा के मुसहफ़ की बात कही गई

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
हज़रत फ़ातेमा की शहादत

हज़रत फ़ातेमा की शहादत

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के व्यक्तित्व ऐसे गुणों से सुसज्जित हैं कि कोई और महिला उनके स्तर तक पहुंचती ही नहीं।    

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
विलायत के आसमान पर हिदायत का तारा

विलायत के आसमान पर हिदायत का तारा

फ़ातिमा ज़हरा मोहद्देसा थीं। यानी फ़रिश्ते उनके पास आते थे, आपके साथ बातें करते थे। किसी भी शिया या सुन्नी नें इस बात को ग़लत नहीं बताया है क्योंकि दोनों के उल्मा इस बात को मानते हैं

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर इमाम अली का खुत्बा

जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर इमाम अली का खुत्बा

मेरी तरफ़ से और आपकी उस दुख़्तर की तरफ़ से जो आपके जवार में नाज़िल हो रही है और बहुत जल्दी आप से मुलहक़ हो रही है।

ग़ैरे मासूमीन
हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा का शुभ जन्मदिन

हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा का शुभ जन्मदिन

आज हम इस्लाम की उस महान महिला का जन्म दिन मना रहे हैं जिसने इस्लामी इतिहास के निर्णायक चरण में ईश्वरीय धर्म की उमंगों का भरपूर ढंग से बचाव किया और अपने अद्वितीय व अटल इरादे से सत्य के प्रकाश को बुझने नहीं किया।

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
फ़िदक के छीने जाने पर फ़ातेमा ज़हरा (स) की प्रतिक्रिया

फ़िदक के छीने जाने पर फ़ातेमा ज़हरा (स) की प्रतिक्रिया

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) ने कहा कि फ़िदक मुझे वापस दे दो, रसूल ने फ़िदक मुझे दिया था।

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
ख़ुतब ए फ़िदक

ख़ुतब ए फ़िदक

जिस दिन तक आप जीवित थे मेरी हिमायत और समर्थन करने वाला था और मैं सुकून के साथ आती जाती थी और आप मेरे बाज़ू और सहायक थे,

धर्म और संप्रदाय
इस्लाम सब से अच्छा धर्म है

इस्लाम सब से अच्छा धर्म है

 ऐ मुस्लमानों तुम उन से कहो कि हम अल्लाह पर और जो उसने हमारी ओर भेजा और जो इब्राहीम, इस्माईल, इस्हाक़, याक़ूब और याक़ूब की संतान की ओर भेजा गया ईमान ले आये हैं।

धर्म और संप्रदाय
वहाबियत की सच्चाई

वहाबियत की सच्चाई

अगर कोई किसी को जुर्म किये बिना क़त्ल कर दे तो ऐसा ही है से इसने सभी को क़त्ल कर दिया हो और अगर कोई ज़िन्दा करदे तो ऐसा ही है जैसे उसने सभी को ज़िन्दा कर दिया।

ग़ैरे मासूमीन
हजरत फातेमा मासूमा

हजरत फातेमा मासूमा

आप की विलादत पहली ज़िल'क़ाद 123 हिजरी क़ो मदीना मुनव्वरा में हुई!

आपका कमेंन्टस

यूज़र कमेंन्टस

Nasir:ali
2020-02-02 13:36:53
Mashallah
Nasir:ali
2020-02-02 13:36:13
Ali ali
mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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