अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

मोहर्रम
आशूर की हृदय विदारक घटना का चालीसवां दिन

आशूर की हृदय विदारक घटना का चालीसवां दिन

आशूर की हृदय विदारक घटना का चालीसवां दिन गुज़र रहा है। आशूर के दिन का ख़्याल आते ही ख़ून, अत्याचार के ख़िलाफ़ आंदोलन, भाले पर इतिहास लिखने वाले अमर बलिदानों के सिर और चेहरे पर तमांचे खाए हुए बच्चों के चेहरे मन में उभरते है।

विभिन्न
हज़रत अब्बास का ख़ुत्बा

हज़रत अब्बास का ख़ुत्बा

एक रिवायत में आया है कि हज़रत अब्बास (अ) ने मक्का शहर में सन 60 हिजरी में हुसैनी क़ाफ़िले के मक्के से कूफ़े की तरफ़ कूच करने से पहले एक ख़ुत्बा दिया आठ ज़िलहिज्जा सन साठ हिजरी यानी हुसैनी काफ़िले के कर्बला की तरफ़ कूच करने से ठीक एक दिन पहले क़मरे बनी हाशिम हज़रत अबुल फ़ज़लिल अब्बास (अ) ने ख़ान –ए- काबा की छत पर जाकर एक बहुत ही भावुक और क्रांतिकारी ख़ुत्बा दिया।

इतिहासिक कथाऐ
इस्लाम के बाक़ी रहने में इमाम हुसैन अ.ह के आंदोलन की भूमिका।

इस्लाम के बाक़ी रहने में इमाम हुसैन अ.ह के आंदोलन की भूमिका।

 हज़रत इमाम हुसैन अ. ने अपने रिश्तेदारों और साथियों के साथ इस्लाम को क़यामत तक के लिये अमर बना देने के लिए महान बलिदान दिया है। इस रास्ते में इमाम किसी क़ुरबानी से भी पीछे नहीं हटे, यहां तक ​​कि छः महीने के दूध पीते बच्चे को भी इस्लाम के लिए क़ुरबान कर

मोहर्रम
मारेकए बद्र व ओहद और शोहदा ए करबला मुशाहिद आलम

मारेकए बद्र व ओहद और शोहदा ए करबला मुशाहिद आलम

हज़रत सैय्यदुश शोहदा यूँ गोया हुए: ऐ करीम लोगो, सब्र से काम लो, इस लिये कि मौत तुम्हारे लिये एक पुल है, जिस से तुम सख़्तियों और मुसीबतों से उबूप कर के ख़ुदा की वसीअ व अरीज़ जन्नत और

मोहर्रम
पैग़ामे कर्बला

पैग़ामे कर्बला

यह कारवां ६० हिजरी क़मरी वर्ष के छठे महीने सफ़र की २८ तारीख़ को मदीने से मक्का की ओर चला था।

मोहर्रम
कर्बला में कौन सफल हुआ?  हुसैन (अ) या यज़ीद

कर्बला में कौन सफल हुआ? हुसैन (अ) या यज़ीद

कर्बला की घटना के बाद जितने इंक़ेलाब हुए शोहदा ए करबला के बदले (प्रतिशोध) के नाम से शुरू हुए, सभी का नारा था कि हम शोहदा ए करबला का बदला लेंगे।

मोहर्रम
वो कार्य जिसे सबसे पहले इमाम हुसैन ने किया!!!

वो कार्य जिसे सबसे पहले इमाम हुसैन ने किया!!!

प्रश्न यह है कि हम किस आधार पर यह कह रहे हैं कि यज़ीद की सत्ता से इस्लाम को ख़तरा था?  

मोहर्रम
इमाम हुसैन (अ) की रुख़सते आख़िर

इमाम हुसैन (अ) की रुख़सते आख़िर

मैं इसलिए आया हूँ कि तुम्हें आखिरी वसीयत करता हूँ

मोहर्रम
करबला मे इमाम हुसैन अ.स. का पहला खुतबा

करबला मे इमाम हुसैन अ.स. का पहला खुतबा

 आपने जो कुछ बयान फरमाया ये सब हम जानते है लेकिन जब तक आप भूखे प्यासे जान न देदे हम आपको छोड़ने वाले नही है।

मोहर्रम
कर्बला के शहीदों की श्रेष्ठ्ता का रहस्य

कर्बला के शहीदों की श्रेष्ठ्ता का रहस्य

इसी वजह से इमाम हुसैन अ. को सय्यदुश् शोहदा यानी दुनिया के तमाम शहीदों का सरदार कहा जाता है और कर्बला के शहीदों को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शहीद माना जाता है।

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mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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