अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

मोहर्रम
इमाम हुसैन (अ) की रुख़सते आख़िर

इमाम हुसैन (अ) की रुख़सते आख़िर

मैं इसलिए आया हूँ कि तुम्हें आखिरी वसीयत करता हूँ

मोहर्रम
करबला मे इमाम हुसैन अ.स. का पहला खुतबा

करबला मे इमाम हुसैन अ.स. का पहला खुतबा

 आपने जो कुछ बयान फरमाया ये सब हम जानते है लेकिन जब तक आप भूखे प्यासे जान न देदे हम आपको छोड़ने वाले नही है।

मोहर्रम
कर्बला के शहीदों की श्रेष्ठ्ता का रहस्य

कर्बला के शहीदों की श्रेष्ठ्ता का रहस्य

इसी वजह से इमाम हुसैन अ. को सय्यदुश् शोहदा यानी दुनिया के तमाम शहीदों का सरदार कहा जाता है और कर्बला के शहीदों को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शहीद माना जाता है।

शौहदाऐ करबला
हज़रत अब्बास (अ.)

हज़रत अब्बास (अ.)

हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के भीतर पाई जाने वाली विशेषताओं में स्पष्टतम विशेषता, त्याग या बलिदान की भावना थी। 

मोहर्रम
अज़ादारों की 8 ज़िम्मेदारियां

अज़ादारों की 8 ज़िम्मेदारियां

1.    काले कपड़े पहनना। 2.    संवेदना या तलसियत व्यक्त करना। 3.    आशूरा के दिन काम धंधा छोड़ देना। 4.    ज़ियारत और ज़ियारत पढ़ना। 5.    रोना और आँसू बहाना।

मोहर्रम
आशूरा का रोज़ा

आशूरा का रोज़ा

न बुख़ारी की मज़कूरा दूसरी रिवायत कहती है के रसूले ख़ुदा (स) जिस वक़्त मक्का से मदीना हिजरत फ़रमाई तो न सिर्फ़ ये के आप आशूर को रोज़ा नहीं रखते थे बल्कि आपको इसके बारे में कोई इत्तला भी नहीं थी और जब आपने यहूदीयों को रोज़ा रखते हुए देखा तो तअज्जुब के साथ इस रोज़े के बारे में सवाल किया, आपने जवाब में सुना के यहूद जनाबे मूसा और बनी इस्राईल की नजात की ख़ुशी में इस दिन रोज़ा रखते हैं, तो रसूले ख़ुदा ने फ़रमाया किः  

मोहर्रम
अज़ादारी क्या है?

अज़ादारी क्या है?

अगर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अपने मक़सद में कामयाब हुए हैं तो खुशी में जश्न क्यों नहीं मनाया जाता और इसके विपरीत क्यों रोया जाता है? क्या यह रोना और मातम इस सफलता के मुक़ाबले में सही है? जो लोग ऐतराज़ करते हैं उन्होंने वास्तव में अज़ादारी के फ़लसफ़े को समझा ही नहीं है बल्कि उन्होंने अज़ादारी को आम तौर पर कमज़ोरी से पैदा होने वाले रोने की तरह माना है।

मोहर्रम
क्यों इमाम हुसैन यज़ीद के विरुद्ध उठ खड़े हुए?

क्यों इमाम हुसैन यज़ीद के विरुद्ध उठ खड़े हुए?

जब इमाम हुसैन अ. नें देखा कि ज़िन्दा रह कर इस्लाम और दीन के लिये कुछ नहीं किया जा सकता तो मर कर ही कुछ करते हैं

मोहर्रम
पहली मोहर्रमुल हराम से दसवी मोहर्रमुल हराम तक

पहली मोहर्रमुल हराम से दसवी मोहर्रमुल हराम तक

इस्लाम से पहले अरब के लोग इस महीने में युद्ध को वर्जित समझते थे और लड़ाई झगड़ा बंद कर दिया करते थे और यही कारण है कि उसी युग से इस महीने को यह नाम यानी मोहर्रमुल हराम दिया गया। (1) और मोहर्रम के महीने को चाँद पर आधारित कलंडर का पहला महीना महीना माना जाता है। (2)

इमामे हुसैन(अ)
जनाबे ज़ैनब  का भाई की लाश पर रोना

जनाबे ज़ैनब का भाई की लाश पर रोना

 या मौहम्मद ऐ जददे बुर्जुगवार आप पर आसमान के फरिशते दरुद भेजते है और ये आप हुसैन है कि जो रेत पर अपने खून मे ग़लता है। इसके आज़ा एक दुसरे से जुदा हो चुके है और ये तेरी बेटियाँ है जो क़ैदी बनी हुई है।

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यूज़र कमेंन्टस

mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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