अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

इमामे हुसैन(अ)
 इमाम हुसैन अ.स. का ग़म और अहले सुन्नत

इमाम हुसैन अ.स. का ग़म और अहले सुन्नत

सूरए यूसुफ़ में अल्लाह हज़रत याक़ूब अ.स. के बारे में फ़रमाता है कि वह हमेशा हज़रत यूसुफ़ के बिछड़ने पर रोते रहते थे यहां तक कि आप हज़रत यूसुफ़ के लिए इतना रोए कि आपकी आंखों की रौशनी चली गई। अहले सुन्नत के बड़े आलिम जलालुद्दीन सियूती अपनी मशहूर तफ़सीर दुर्रुल मनसूर में लिखते हैं कि हज़रत याक़ूब अ.स. ने अपने बेटे हज़रत यूसुफ़ अ.स. के बिछड़ने के ग़म में 80 साल आंसू बहाए और उनकी आंखों की रौशनी चली गई।  

इमामे हुसैन(अ)
जनाबे ज़ैनब  का भाई की लाश पर रोना

जनाबे ज़ैनब का भाई की लाश पर रोना

 या मौहम्मद ऐ जददे बुर्जुगवार आप पर आसमान के फरिशते दरुद भेजते है और ये आप हुसैन है कि जो रेत पर अपने खून मे ग़लता है। इसके आज़ा एक दुसरे से जुदा हो चुके है और ये तेरी बेटियाँ है जो क़ैदी बनी हुई है।

इमामे हुसैन(अ)
मारेफत के साथ ज़ियारते इमाम हुसैन (अ.स.) का सवाब

मारेफत के साथ ज़ियारते इमाम हुसैन (अ.स.) का सवाब

जो शख्स भी इमाम हुसैन (अ.स.) के हक़ की मारेफत रखते हुऐ उनकी कब्र पर आऐगा तो अल्लाह तआला उसके तमाम अगले और पिछले गुनाह ...

इमामे हुसैन(अ)
इमाम हुसैन(अ)का आन्दोलन

इमाम हुसैन(अ)का आन्दोलन

इस घटना से इमाम हुसैन बहुत दुखी हुए और उन्होंने रोते हुए कहा, हे हबीब, ईश्वर तुम्हे विभूतियां प्रदान करे। तुम बहुत विशेषताओं के स्वामी थे। ईश्वर तुम पर कृपा करे।  

इमामे हुसैन(अ)
इमाम हुसैन के बा वफ़ा असहाब

इमाम हुसैन के बा वफ़ा असहाब

मैंने अपने असहाब से आलम और बेहतर किसी के असहाब को नही पाया।

इमामे हुसैन(अ)
हज़रत इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम की ज़ियारत का सवाब

हज़रत इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम की ज़ियारत का सवाब

 इमाम की ज़ियारत हर उस मोमिन पर वाजिब है जिसने अल्लाह की तरफ़ से इमामत को स्वीकार किया है।

इमामे हुसैन(अ)
 शहादत इमाम हुसैन मानव इतिहास की बहुत बड़ी त्रासदी

शहादत इमाम हुसैन मानव इतिहास की बहुत बड़ी त्रासदी

इस महीने के विचार से बुनियादी स्तर पर जुड़ी हैं: लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के मदीना हिजरत और रसूलुल्लाह के दूसरे नवासे हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहू अन्हू की कर्बला में शहादत।

महीने की मुनासेबतें
ईदे मुबाहेला और जनाबे फ़ातेमा ज़हरा

ईदे मुबाहेला और जनाबे फ़ातेमा ज़हरा

ऐ पैग़म्बर, ज्ञान के आ जाने के बाद जो लोग तुम से कट हुज्जती करें उनसे कह दीजिए कि (अच्छा मैदान में) आओ, हम अपने बेटे को बुलायें तुम अपने बेटे को और हम अपनी औरतों को बुलायें और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाये और तुम अपने जानों को, उसके बाद हम सब मिलकर ख़ुदा की बारगाह में गिड़गिड़ायें और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें।

विभिन्न
मूसा (अ.स.) फ़िरऔन और ज़ंजीर ज़नी

मूसा (अ.स.) फ़िरऔन और ज़ंजीर ज़नी

यह वही ख़ामेनाई है ना कि जिसने फ़तवा दिया कि ज़ंजीर ज़नी न करो ?

इमामे अली(अ)
 ग़दीर पर रसूले इस्लाम (स.अ.) का विशेष ध्यान

ग़दीर पर रसूले इस्लाम (स.अ.) का विशेष ध्यान

रसूले इस्लाम को मालूम था कि इस सफ़र के अंत में उन्हें एक महान काम को अंजाम देना है जिस पर दीन की इमारत तय्यार होगी और उस इमारत के ख़म्भे उँचे होंगे कि जिससे आपकी उम्मत सारी उम्मतों की सरदार बनेगी, पूरब और पश्चिम में उसकी हुकूमत होगी मगर इसकी शर्त यह है कि वह सब अपने सुधरने के बारे में सोच-विचार करें

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यूज़र कमेंन्टस

mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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