अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

आमाल
शबे कद़र के मुखतसर आमाल

शबे कद़र के मुखतसर आमाल

इन रातो मे गुस्ल करना सुन्नते मुअक्केदा है। दो रकत नमाज़ सुबह की तरह पढ़ी जाऐ और हर रकत मे सात मरतबा क़ुलहो वल्लाहो अहद पढ़ी जाऐ और.....

इमामे अली(अ)
हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत

हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ने कहा कि हे अली, जिब्राईल ने मुझे तुम्हारे बारे में एक एसी सूचना दी है जो मेरे नेत्रों के लिए प्रकाश और हृदय के लिए आनंद बन गई है।

इमामे अली(अ)
हज़रत अली (अ) की वसीयत

हज़रत अली (अ) की वसीयत

''ऐ मेरे बेटे अगरचे मैने उतनी उमर नही पाई जितनी मुझसे पहले वालों की हुआ करती थी लेकिन मैंने उनके आमाल पर ग़ौर किया

इमामे अली(अ)
अमीरुल मोमिनीन अ. स.

अमीरुल मोमिनीन अ. स.

आप का जन्म रजब मास की 13वी तारीख को हिजरत से 23वर्ष पूर्व मक्का शहर के विश्व विख्यात व अतिपवित्र स्थान काबे मे हुआ था। आप अपने माता पिता के चौथे पुत्र थे।    

इमामे अली(अ)
इमाम अली की निगाह मे कसबे हलाल की जद्दो जहद

इमाम अली की निगाह मे कसबे हलाल की जद्दो जहद

आपके नज़दीक कसबे हलाल बेहतरीन सिफ़त थी। जिस पर आप खुद भी अमल पैरा थे।

इमामे अली(अ)
इमाम अली की ख़ामोशी

इमाम अली की ख़ामोशी

इन लोगों के मरने से कि जो मूर्ती पूजा, शिर्क, यहूदियत या ईसाईयत के सामने इस्लाम की ताक़त थे इनके मरने से इस्लाम की ताक़त कमज़ोरी में

इमामे हसन (अ)
इमाम हसन (अ) के दान देने और क्षमा करने की कहानी।

इमाम हसन (अ) के दान देने और क्षमा करने की कहानी।

यह आदमी मदीने में इमाम हसन का मेहमान बना और पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. एवं उनके अहलेबैत का श्रद्धालु बन गया।

इमामे हसन (अ)
हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम

हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम

हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम तथा आपकी माता हज़रत फ़ातिमा ज़हरा थीं। आप अपने माता पिता की प्रथम संतान थे।

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
 अल्लाह तआला ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. को हमारे लिए आइडियल क्यूं बनाया है?

अल्लाह तआला ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. को हमारे लिए आइडियल क्यूं बनाया है?

आपने हज़रत अली अ. से वसीयत की थी कि आपको रात में ग़ुस्ल दें, रात में कफ़न पहनाएं और रात ही में दफ़्न करें और जिन लोगों नें उन्हें दुख पहुँचाया था उनको जनाज़े में (अंतिम संस्कार) न आने दें  

अख़लाकी लेख
 गुद मैथुन इस्लाम की निगाह मे

गुद मैथुन इस्लाम की निगाह मे

“ जब किसी क़ौम में गुद मैथुन की ज़्यादती हो जाती है तो खुदा उस क़ौम से अपना हाथ उठा लेता है और उसे इसकी परवाह (ख्याल) नही होती कि यह क़ौम किसी जंगल में हल़ाक कर दी ..

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