अलहसनैन इस्लामी नेटवर्क

लेख

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ईश्वरीय वाणी-4

ईश्वरीय वाणी-4

जी हां हमें यह पता है। पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा  कि हज़रत ईसा उस वस्तु के अतिरिक्त जो ईश्वर ने उन्हें सिखाया था,

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ईश्वरीय वाणी-3

ईश्वरीय वाणी-3

 पैग़म्बरे इस्लाम पर उतरने वाला क़ुरआन परालौकिक वास्तविक पर आधारित है।

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ईश्वरीय वाणी-2

ईश्वरीय वाणी-2

सदाचारियों की वैचारिक व व्यवहारिक विशेषताओं का उल्लेख करता है और बल देता है कि ऐसे लोग मार्गदर्शन पर हैं और मुक्ति पाने वाले हैं।

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ईश्वरीय वाणी-1

ईश्वरीय वाणी-1

पवित्र क़ुरआन के सूरों की पहचान की चर्चा में जो विषय महत्त्वपूर्ण है वह मक्की और मदनी सूरों की पहचान है

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क़ुरआन की फेरबदल से सुरक्षा

क़ुरआन की फेरबदल से सुरक्षा

ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित एक तर्क द्वारा क़ुरआन की सुरक्षा को सिध्द किया जा सकता है

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 क्या शियों का मानना है कि क़ुरआने करीम में तहरीफ़ (परिवर्तन) हुई है??

क्या शियों का मानना है कि क़ुरआने करीम में तहरीफ़ (परिवर्तन) हुई है??

अर्थ में परिवर्तन यह है कि आसमानी किताब की आयतों और वाक्यों के ग़लत अर्थ बयान किए जाएं जिसे पारिभाषिक ज़बान में “तफ़सीर बिर् राए” कहा जाता है।

इमामे महदी (अ)
इमाम अस्र (अ) कुरआने करीम की रौशनी में

इमाम अस्र (अ) कुरआने करीम की रौशनी में

अली(अ) उनकी ज़ौजा और उनकी औलाद हुज्ज्ते ख़ुदा है। इनसे हिदायत हासिल करने वाला सिराते मुस्तक़ीम की तरफ़ हिदायत पाने वाला है।(रसूले अकरम(स)) (शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज 58)  

इमामे हुसैन(अ)
यज़ीद के विरूद्ध हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का क़याम व उसके उद्देश्य

यज़ीद के विरूद्ध हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का क़याम व उसके उद्देश्य

जब शासकीय यातनाओं से तंग आकर हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम मदीना छोड़ने पर मजबूर हो गये तो उन्होने अपने क़ियाम के उद्देश्यों को इस प्रकार स्पष्ट किया। “ मैं अपने व्यक्तित्व को चमकाने या सुखमयी जीवन यापन करने या उपद्रव फैलाने के लिए क़ियाम नहीं कर रहा हूँ। बल्कि मैं केवल अपने नाना..............

मोहर्रम
आशूरा के पैग़ाम

आशूरा के पैग़ाम

बनी उमैय्या की हुकूमत की कोशिश यह थी कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की सुन्नत को मिटा कर ज़मान-ए-जाहिलियत  की सुन्नत को जारी किया जा...........

फ़ातेमा ज़हरा(अ)
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा उम्महातुल मोमिनीन की नज़र में

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा उम्महातुल मोमिनीन की नज़र में

ख़ुदावन्दे आलम ने बज़्मे इंसानी के अंदर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम से बेहतर किसी को ख़ल्क नहीं फरमाया।  

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mukhtar Abbas:mashallah
2017-09-01 21:46:03
mashallah subhanallah jazakallao bht achche
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